हैदराबाद/ग्राउंड ब्यूरो — तेलंगाना राज्य पिछले चौबीस घंटों के दौरान कई बड़े और चौंकाने वाले हादसों तथा राजनीतिक घटनाओं का गवाह बना है। एक तरफ जहां सड़क हादसों ने कई परिवारों को गम में डुबो दिया है, वहीं दूसरी तरफ सियासत के गलियारों में लगातार नए मोड़ आ रहे हैं। राज्य के अलग-अलग हिस्सों से आई इन खबरों ने आम जनजीवन और प्रशासनिक व्यवस्था पर कई बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। पुलिस और प्रशासन के अधिकारी इन सभी मामलों की अपने स्तर पर जांच कर रहे हैं और हालात पर लगातार नजर बनाए हुए हैं।
सबसे दर्दनाक घटना विकाराबाद जिले के अनंतगिरी घाट रोड पर सामने आई है, जहां श्रद्धालुओं से भरी एक बस अचानक अनियंत्रित होकर पलट गई। इस भीषण हादसे में चार लोगों की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि करीब पचास लोग गंभीर रूप से घायल हो गए। स्थानीय लोगों और पुलिस ने तुरंत राहत और बचाव कार्य शुरू किया तथा सभी घायलों को पास के सरकारी अस्पताल में भर्ती कराया। शुरुआती जांच में सामने आया है कि मोड़ पर चालक ने बस से नियंत्रण खो दिया था, जिसके बाद यह बड़ा हादसा हो गया।
अनंतगिरी घाट सड़क हादसा और प्रशासनिक लापरवाही के सवाल
अनंतगिरी घाट रोड पर हुआ यह बस हादसा कोई पहली घटना नहीं है, बल्कि इस रास्ते पर पहले भी कई बार वाहन दुर्घटना का शिकार हो चुके हैं। स्थानीय ड्राइवरों का कहना है कि इस इलाके में तीखे मोड़ हैं और संकेतक बोर्ड भी ठीक से नहीं लगे हैं। हादसे की खबर मिलते ही जिला प्रशासन के बड़े अधिकारी मौके पर पहुंच गए और अस्पताल जाकर घायलों का हालचाल जाना। मुख्यमंत्री ने इस दुर्घटना पर गहरा दुख जताया है और मृतकों के परिवारों को आर्थिक मदद देने की घोषणा की है। पुलिस ने बस मालिक और चालक के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है और हादसे की तकनीकी जांच की जा रही है।
दूसरी तरफ, तेलंगाना की राजनीति में एक बड़ा भूचाल तब आया जब अदालत के एक फैसले के बाद खैरताबाद विधानसभा सीट के विधायक को अयोग्य घोषित कर दिया गया। इस कानूनी कार्रवाई के बाद अब इस सीट पर बहुत जल्द उपचुनाव कराए जाने की पूरी संभावना है। राजनीतिक दलों ने इस फैसले के बाद अपनी कमर कस ली है और मैदान में उतरने की तैयारियां शुरू कर दी हैं। निर्वाचन आयोग कभी भी चुनाव की तारीखों का ऐलान कर सकता है, जिससे राज्य में राजनीतिक सरगर्मी काफी बढ़ गई है।
विधानसभा गेट विवाद और हाई कोर्ट का कड़ा रुख
राजनीतिक उठापटक के बीच तेलंगाना विधानसभा के गेट पर महिला बीआरएस विधायकों के साथ कथित बदसलूकी का मामला भी तूल पकड़ चुका है। इस घटना को लेकर मामला अदालत तक पहुंचा, जहां हाई कोर्ट ने पुलिस महानिदेशक को कड़ा आदेश दिया है। कोर्ट ने साफ कहा है कि ड्यूटी पर तैनात सभी पुलिसकर्मियों के पास अपनी स्पष्ट पहचान और नेमप्लेट होनी चाहिए ताकि इस तरह की घटनाओं पर रोक लग सके। विपक्षी दलों ने इस मुद्दे को लेकर सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है और सदन से लेकर सड़क तक विरोध प्रदर्शन की चेतावनी दी है।
इन तमाम सियासी और प्रशासनिक हलचलों के बीच एक और हैरान करने वाली खबर कामारेड्डी और हैदराबाद के इलाकों से आई, जहां एक दसवीं कक्षा के छात्र ने घर में घुसकर स्कूल के डायरेक्टर पर चाकू से हमला कर दिया। इस सनसनीखेज वारदात में स्कूल डायरेक्टर की मौत हो गई, जिससे पूरे इलाके में सनसनी फैल गई है। नाबालिग छात्र द्वारा इस तरह की खतरनाक वारदात को अंजाम दिए जाने से स्कूलों में बच्चों की मानसिकता और सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंताएं पैदा हो गई हैं। पुलिस ने आरोपी छात्र को हिरासत में ले लिया है और उससे पूछताछ की जा रही है कि आखिर उसने यह खौफनाक कदम क्यों उठाया।
बारिश की कमी से जूझते राज्य में मुख्यमंत्री का वरुण यज्ञ
एक तरफ जहां राज्य में अपराध और हादसों का दौर चल रहा है, वहीं दूसरी तरफ मौसम की बेरुखी से परेशान होकर मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी ने खुद कमान संभाल ली है। खेतों में सूखती फसलों और बारिश की भारी कमी को देखते हुए मुख्यमंत्री अपनी पत्नी के साथ एक पारंपरिक अनुष्ठान में शामिल हुए। उन्होंने राज्य में अच्छी बारिश और किसानों की खुशहाली के लिए विधि-विधान के साथ 'वरुण यज्ञ' किया और विशेष पूजा-अर्चना की।
इस धार्मिक अनुष्ठान को लेकर सोशल मीडिया और राजनीतिक हलकों में तरह-तरह की चर्चाएं हो रही हैं। एक तरफ जहां अंधविश्वास के खिलाफ बात करने वाले लोग इसकी आलोचना कर रहे हैं, वहीं ग्रामीण इलाकों के किसान इसे संकट के समय की एक पारंपरिक उम्मीद मान रहे हैं। हमारे रिपोर्टर ने जब स्थानीय किसानों से बात की, तो उनका कहना था कि इस समय फसल बचाने के लिए हर मुमकिन कोशिश जरूरी है, चाहे वह तकनीकी हो या पारंपरिक। प्रशासन का पूरा ध्यान अब राज्य में सूखे से निपटने और किसानों को राहत पहुंचाने पर केंद्रित हो गया है।





