भागलपुर — बिहार के भागलपुर में गंगा नदी पर बना विक्रमशिला सेतु इन दिनों अपनी तकनीकी मरम्मत और आधुनिकीकरण के काम को लेकर चर्चा में है। भारी वाहनों के दबाव और लगातार बढ़ते ट्रैफिक के कारण इस महत्वपूर्ण पुल की सेहत पर बुरा असर पड़ रहा था। इसी समस्या से निपटने के लिए अब मुंबई की एक विशेष विशेषज्ञ कंपनी को काम सौंपा गया है। यह कंपनी अत्याधुनिक कार्बन प्लेटिंग तकनीक का इस्तेमाल कर रही है, जिससे पुल का लगभग 50 टन अतिरिक्त लोड कम किया जा रहा है। अधिकारियों का दावा है कि इस विशेष तकनीकी सुधार के बाद विक्रमशिला सेतु की उम्र सीधे 25 साल तक बढ़ जाएगी।
मरम्मत के इस मौजूदा चरण में पुल पर कई बड़े बदलाव किए जा रहे हैं। हाल ही में नवगछिया छोर पर लगे बेली ब्रिज को पूरी तरह से हटा दिया गया है और क्रेन की मदद से पुराने स्लैब को भी अलग किया गया है। इसके बाद अब कंक्रीट ढलाई का काम पूरा करके नए गर्डर सेट करने की प्रक्रिया शुरू की जा रही है। सेतु पर लगभग 65 सदस्यों की एक तकनीकी टीम दिन-रात काम कर रही है। रेलिंग लगाने और सड़क कटिंग का काम भी युद्ध स्तर पर जारी है ताकि तय समय सीमा के भीतर पुल को फिर से यातायात के लिए सुरक्षित तरीके से खोला जा सके।
नावों के सहारे गंगा पार करने को मजबूर आम लोग और शिक्षिकाएं
पुल बंद होने की वजह से भागलपुर और नवगछिया के बीच रोजाना सफर करने वाले आम लोगों, खासकर महिला शिक्षकों और दफ्तर जाने वालों का जीवन काफी संघर्षपूर्ण हो गया है। सड़क मार्ग बंद होने के कारण लोगों को अब गंगा नदी पार करने के लिए नावों और जहाजों का सहारा लेना पड़ रहा है। कई बार महज दो मिनट की देरी होने पर लोगों की जहाज छूट जाती है, जिससे उन्हें घंटों अगली नाव का इंतजार करना पड़ता है। सुबह और शाम के वक्त गंगा घाटों पर भारी भीड़ उमड़ रही है और घाटों के आसपास लंबा ट्रैफिक जाम आम बात बन गई है.
स्थानीय नागरिकों और नौकरीपेशा महिलाओं ने प्रशासन के सामने अपनी नाराजगी और समस्याएं खुलकर रखनी शुरू कर दी हैं। कई लोगों ने जिला प्रशासन से गुहार लगाई है कि कम से कम सुल्तानगंज और अगवानी के बीच तुरंत अतिरिक्त जहाज और नावों का संचालन शुरू किया जाए। लोगों का कहना है कि जब तक विक्रमशिला सेतु की पूरी मरम्मत नहीं हो जाती, तब तक वैकल्पिक परिवहन व्यवस्था को और बेहतर किया जाना चाहिए ताकि रोजाना आने-जाने वालों का समय और पैसा दोनों बच सके। घाटों पर बढ़ती भीड़ को नियंत्रित करने के लिए पुलिस बल भी तैनात किया गया है, लेकिन यात्रियों की संख्या के मुकाबले व्यवस्थाएं कम पड़ रही हैं।
ट्रस ब्रिज का काम और अक्टूबर के अंत तक की नई समयसीमा
प्रशासनिक रिपोर्टों के अनुसार, पुल की सुदृढ़ीकरण प्रक्रिया का अगला बड़ा चरण अक्टूबर के अंतिम हफ्ते से शुरू होने वाला है। इस चरण में मुख्य रूप से ट्रस ब्रिज से जुड़े जटिल तकनीकी कार्य किए जाएंगे। इंजीनियरों का मानना है कि कार्बन प्लेटिंग और गर्डर बदलने का यह काम देश में अपनी तरह के सबसे बड़े ढांचागत सुधारों में से एक है। पुल के बियरिंग और अन्य अंदरूनी हिस्सों की भी जांच की जा रही है ताकि भविष्य में किसी भी तरह की बड़ी दुर्घटना या संरचनात्मक कमजोरी से बचा जा सके।
द फ्रीलान्स की ग्राउंड टीम ने पाया कि स्थानीय प्रशासन इस बात को लेकर गंभीर है कि काम समय पर पूरा हो, लेकिन आम जनता की रोजाना की तकलीफें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। पुल के दोनों छोर पर भारी पुलिस बल और ट्रैफिक पुलिसकर्मी तैनात हैं ताकि कोई अनधिकृत व्यक्ति निर्माण स्थल के पास न पहुंचे। हालांकि, इंजीनियरों का भरोसा है कि एक बार यह पूरा तकनीकी काम पूरा हो जाने के बाद, विक्रमशिला सेतु अगले कई दशकों तक बिना किसी रुकावट के उत्तर और दक्षिण बिहार के बीच मजबूत संपर्क बनाए रखेगा।




