कोलकाता/ग्राउंड ब्यूरो — भारतीय फुटबॉल के मैदान पर इन दिनों मोहन बागान क्लब का जलवा साफ दिखाई दे रहा है। क्लब के खिलाड़ियों ने अपनी बेहतरीन खेल शैली से एक बार फिर साबित कर दिया है कि वे देश की सबसे मजबूत टीमों में शामिल हैं। हाल ही में मिले परिणामों के अनुसार, मोहन बागान ने फुटबॉल के मैदान पर ऐसा कमाल कर दिखाया है जिसकी चर्चा पूरे देश के खेल प्रेमियों के बीच हो रही है। टीम ने एक ही सीजन में कई बड़े मुकाबले जीतकर अपने नाम का डंका बजा दिया है। मैदान पर खिलाड़ियों का जोश और उनका पसीना रंग लाया है।
ताजा खेल रिपोर्ट्स के मुताबिक, मोहन बागान ने पंजाब एफसी को पेनल्टी शूटआउट में हराकर आईएफए शील्ड के फाइनल में अपनी पक्की जगह बना ली है। इससे पहले खेले गए मुकाबलों में भी टीम का प्रदर्शन बेहद शानदार रहा है। एक रोमांचक मैच में मोहन बागान ने मात्र 10 खिलाड़ियों के साथ खेलते हुए जादुई वापसी की और मोहम्मदन टीम को 3-2 के अंतर से हरा दिया। इस जीत के साथ ही क्लब ने अपने ऊपर लगा आठ साल का लंबा खिताबी सूखा भी पूरी तरह से खत्म कर दिया है। टीम की इस ऐतिहासिक जीत के बाद से कोलकाता की सड़कों पर जश्न का माहौल है।
50 साल बाद आया यह दोहरा धमाल
मोहन बागान के लिए यह साल इतिहास के पन्नों में दर्ज होने वाला साबित हो रहा है। क्लब ने कलकत्ता फुटबॉल लीग यानी सीएफएल का खिताब जीतने के बाद अब आईएफए शील्ड पर भी अपना कब्जा जमा लिया है। खेल के जानकारों का कहना है कि ऐसा दोहरा धमाल मोहन बागान ने पूरे 50 साल के लंबे अंतराल के बाद किया है। टीम के इस प्रदर्शन को देखकर विरोधी टीमें भी हैरान हैं। क्लब के सीनियर खिलाड़ियों से लेकर युवा फुटबॉलरों तक ने इस जीत में अपनी पूरी ताकत झोंक दी है। कोच की रणनीति मैदान पर पूरी तरह से सफल साबित हुई है और खिलाड़ियों ने हर पास पर पूरा नियंत्रण दिखाया है।
इस जीत की गूंज सिर्फ कोलकाता तक सीमित नहीं है, बल्कि देश भर के फुटबॉल प्रशंसक मोहन बागान की इस कामयाबी की तारीफ कर रहे हैं। डूरंड कप जैसे बड़े टूर्नामेंट में भी टीम ने दमदार खेल दिखाया है और जमशेदपुर को पेनल्टी शूटआउट में हराकर सेमीफाइनल का टिकट कटाया है। लगातार कड़े मुकाबले खेलने के बावजूद खिलाड़ियों की फिटनेस और उनका हौसला कम नहीं हुआ है। मैदान पर पसीना बहाने वाले इन खिलाड़ियों ने यह दिखा दिया है कि कड़ी मेहनत और पक्के इरादे से किसी भी सूखे को खत्म किया जा सकता है।
पंजाब और मोहम्मदन के खिलाफ कठिन मुकाबले
फुटबॉल का खेल आसान नहीं होता और मोहन बागान को भी फाइनल तक पहुंचने के लिए काफी पसीना बहाना पड़ा है। पंजाब एफसी के खिलाफ हुआ मुकाबला बेहद कड़ा था जहां दोनों टीमों ने एक-दूसरे को कड़ी टक्कर दी। अंत में मैच का फैसला पेनल्टी शूटआउट से हुआ जिसमें मोहन बागान के गोलकीपर और शूटर्स ने शांत दिमाग से काम लिया। दबाव के पलों में सही शॉट लगाकर टीम ने फाइनल का टिकट हासिल किया। स्थानीय खेल प्रेमियों का मानना है कि इस तरह के कड़े मुकाबले ही खिलाड़ियों को बड़े स्तर के लिए तैयार करते हैं।
मोहम्मदन टीम के खिलाफ हुआ मैच तो और भी ज्यादा रोमांचक रहा था जब मोहन बागान को मैच के दौरान 10 खिलाड़ियों के साथ ही मैदान पर उतरना पड़ा था। लाल कार्ड मिलने के बाद टीम दबाव में आ सकती थी, लेकिन खिलाड़ियों ने हार नहीं मानी। मैदान पर एक-एक खिलाड़ी ने दोगुनी मेहनत की और तीन गोल दागकर मैच का पासा अपनी तरफ पलट दिया। यह जीत सिर्फ अंकों की नहीं थी, बल्कि यह टीम के अजेय जज्बे की जीत थी। क्लब के पुराने दिग्गजों ने भी इस युवा टीम की पीठ थपथपाई है और इसे आने वाले समय के लिए एक शुभ संकेत बताया है।
फुटबॉल के मैदान पर नई उम्मीदों का दौर
मोहन बागान की इन लगातारिय सफलताओं से भारतीय घरेलू फुटबॉल में एक नया रोमांच पैदा हो गया है। आने वाले दिनों में टीम को कई और बड़े टूर्नामेंट खेलने हैं और खिलाड़ियों का आत्मविश्वास सातवें आसमान पर है। क्लब प्रबंधन का कहना है कि वे खिलाड़ियों को बेहतर सुविधाएं दे रहे हैं ताकि वे मैदान पर अपना शत-प्रतिशत दे सकें। कोलकाता के युवा खिलाड़ी अब मोहन बागान की जर्सी पहनकर मैदान पर उतरने के लिए और अधिक प्रेरित हो रहे हैं। यह सफलता सिर्फ एक कप जीतने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह आने वाली पीढ़ी के लिए एक नई राह तैयार कर रही है।
द फ्रीलान्स की ग्राउंड पड़ताल बताती है कि क्लब के दफ्तर से लेकर मैदान के बाहर तक समर्थकों का हुताश और उत्साह देखने लायक है। हर कोई अपने चहेते खिलाड़ियों की एक झलक पाने को बेताब रहता है। जैसे-जैसे फाइनल मुकाबले नजदीक आ रहे हैं, खिलाड़ियों पर दबाव भी बढ़ रहा है, लेकिन कोच का मानना है कि उनकी टीम किसी भी चुनौती से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार है। आने वाले हफ्तों में मोहन बागान का यह स्वर्णिम दौर भारतीय फुटबॉल को एक नई दिशा दे सकता है, जिस पर हर खेल प्रेमी की पैनी नजर बनी हुई है।









