नई दिल्ली/ग्राउंड ब्यूरो — भारत और वेस्टइंडीज के बीच खेल के मैदान पर एक ऐसा मुकाबला देखने को मिला जिसने क्रिकेट प्रेमियों की धड़कनें बढ़ा दीं। इस हाई-स्कोरिंग मैच में वेस्टइंडीज की टीम ने अपनी आक्रामक बल्लेबाजी के दम पर भारत के खिलाफ शानदार जीत हासिल की है। मैच की शुरुआत से ही दोनों टीमों के बीच कांटे की टक्कर देखने को मिली, लेकिन अंत में वेस्टइंडीज के बल्लेबाजों ने बाजी अपने नाम कर ली। भारतीय टीम के गेंदबाजों के लिए यह दिन बेहद मुश्किल भरा साबित हुआ और मैदान पर कैरेबियन बल्लेबाजों का दबदबा साफ तौर पर नजर आया।
वेस्टइंडीज की इस बड़ी जीत में शाई होप और शेरफेन रदरफोर्ड की पारियों ने सबसे अहम भूमिका निभाई। मैदान पर उतरते ही इन दोनों बल्लेबाजों ने भारतीय गेंदबाजों की एक न चलने दी और चौके-छक्कों की बारिश कर दी। एक तरफ जहां शाई होप ने बेहतरीन शतक जड़कर अपनी टीम को मजबूत स्थिति में पहुंचाया, वहीं दूसरी तरफ शेरफेन रदरफोर्ड ने भी अपने तूफानी अंदाज से सभी को हैरान कर दिया। रदरफोर्ड अब क्रिकेट के इतिहास में एक और बड़ा रिकॉर्ड अपने नाम करने के बेहद करीब पहुंच चुके हैं और क्रिस गेल के खास रिकॉर्ड की बराबरी करने से बस एक कदम दूर हैं।
संजू सैमसन की तूफानी पारी भी नहीं बचा सकी हार
वेस्टइंडीज की तरफ से मिले विशाल स्कोर का पीछा करने उतरी भारतीय टीम की शुरुआत में कुछ झटके लगे, लेकिन विकेटकीपर बल्लेबाज संजू सैमसन ने मोर्चा संभाल लिया। संजू सैमसन ने मैदान के चारों तरफ बेहतरीन शॉट लगाए और एक आक्रामक पारी खेलकर टीम की उम्मीदों को जिंदा रखा। उन्होंने अपनी इस तूफानी पारी से साबित कर दिया कि वे दबाव की स्थिति में भी शानदार प्रदर्शन करने का दम रखते हैं। संजू का यह अंदाज देखकर दर्शकों में भी भारी उत्साह देखने को मिला और उन्होंने हर शॉट पर जमकर उनका समर्थन किया।
हालांकि, संजू सैमसन की यह शानदार पारी अंत में बेकार साबित हुई क्योंकि उन्हें दूसरे छोर से मजबूत साथ नहीं मिल पाया। टीम के बाकी बल्लेबाज जल्दी आउट होकर पवेलियन लौट गए, जिससे स्कोरबोर्ड का दबाव लगातार बढ़ता चला गया। भारत की बल्लेबाजी इस मैच में एक समय पटरी से उतरती नजर आई और लक्ष्य काफी दूर होता चला गया। संजू के आउट होने के बाद मैच पूरी तरह से वेस्टइंडीज के पक्ष में झुक गया और भारतीय टीम इस रोमांचक मुकाबले को अपने नाम करने से चूक गई।
भारतीय गेंदबाजी की कमजोरी और बुमराह की खलती कमी
इस मुकाबले में भारतीय गेंदबाजी की पोल पूरी तरह से खुल गई और मैदान पर गेंदबाजों के पास कैरेबियन बल्लेबाजों के हमलों का कोई जवाब नहीं था। जसप्रीत बुमराह की गैरमौजूदगी का असर साफ तौर पर दिखाई दिया, क्योंकि डेथ ओवरों में टीम को विकेट निकालने वाला गेंदबाज नहीं मिल पाया। खराब गेंदबाजी और लचर फील्डिंग के कारण वेस्टइंडीज की टीम आसानी से एक बड़ा स्कोर खड़ा करने में कामयाब रही। गेंदबाजों ने कई आसान गेंदें फेंकी जिनका फायदा उठाकर बल्लेबाजों ने आसानी से रन बटोरे।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि गेंदबाजी में थोड़ी और अनुशासनता दिखाई जाती, तो मैच का नतीजा कुछ और हो सकता था। मैदान की पिच बल्लेबाजों के अनुकूल जरूर थी, लेकिन भारतीय गेंदबाजों ने अपनी रणनीति में कोई खास बदलाव नहीं किया। कप्तान के पास भी गेंदबाजी विकल्पों का अभाव साफ नजर आया, जिससे विपक्षी बल्लेबाजों को खुलकर खेलने का पूरा मौका मिल गया। आने वाले मुकाबलों में टीम मैनेजमेंट को इस कमजोरी पर गंभीरता से काम करना होगा।
मैदान पर तीसरे अंपायर के फैसले को लेकर गरमाया माहौल
मैच के दौरान केवल चौके-छक्के ही नहीं बल्कि मैदान पर तीखी नोकझोंक और भयंकर बवाल भी देखने को मिला। खेल के एक अहम मोड़ पर जब तीसरे अंपायर का फैसला आया, तो बल्लेबाज और मैदानी अंपायर के बीच तीखी बहस छिड़ गई। डीआरएस के जरिए जब सच सामने आया और बल्लेबाज को आउट करार दिया गया, तो खिलाड़ी गुस्से में लाल हो गया। इस फैसले से नाखुश बल्लेबाज ने मैदान पर ही अपना विरोध जताया और गुस्से में मैदान छोड़कर बाहर चला गया।
इस घटना के बाद मैदान पर कुछ देर के लिए खेल रोकना पड़ा और सुरक्षाकर्मियों तथा अंपायरों को बीच-बचाव करना पड़ा। सोशल मीडिया और खेल गलियारों में भी इस फैसले को लेकर तरह-तरह की चर्चाएं शुरू हो गई हैं और फैंस दो गुटों में बंट गए हैं। कुछ लोगों का मानना है कि फैसला नियमों के मुताबिक सही था, जबकि कई क्रिकेट जानकारों का कहना है कि अंपायरिंग में और अधिक स्पष्टता होनी चाहिए। इस विवाद ने इस हाई-वोल्टेज मैच की गर्माहट को और ज्यादा बढ़ा दिया है।







