पटना से लखनऊ आ रही इंडिगो एयरलाइंस की एक उड़ान के साथ हवा में बड़ा हादसा टल गया। विमान जब करीब 17 हजार फीट की ऊंचाई पर हवा में था, तब उस पर अचानक आकाशीय बिजली गिर गई। इस प्राकृतिक आपदा की वजह से विमान का अगला हिस्सा यानी नोज बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया। चालक दल के पास मौजूद पायलट ने अपनी सूझबूझ का परिचय दिया और लखनऊ एयरपोर्ट पर विमान की सुरक्षित लैंडिंग कराई।
यह घटना मंगलवार को आसमान में छाए घने बादलों और खराब मौसम के दौरान हुई। उड़ान संख्या 6ई-6323 ने पटना से उड़ान भरी थी और इसे निर्धारित समय पर लखनऊ के चौधरी चरण सिंह अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट पर उतरना था। यात्रा के दौरान अचानक मौसम खराब हो गया और विमान बादलों के बीच आकाशीय बिजली की चपेट में आ गया। बिजली गिरने से विमान के अगले हिस्से के उपकरण और बॉडी को नुकसान पहुंचा।
अमौसी एयरपोर्ट पर विमान की सुरक्षित इमरजेंसी लैंडिंग
विमान पर बिजली गिरने के बाद कॉकपिट में तैनात पायलट ने तुरंत लखनऊ एयर ट्रैफिक कंट्रोल यानी एटीसी से संपर्क साधा। पायलट ने स्थिति की गंभीरता को देखते हुए एयरपोर्ट पर आपातकाल लैंडिंग की अनुमति मांगी। एयरपोर्ट प्रशासन ने तुरंत पूरी तैयारी कर ली और फायर ब्रिगेड तथा एम्बुलेंस को रनवे के पास तैनात कर दिया गया। गनीमत यह रही कि तकनीकी नुकसान के बावजूद विमान के मुख्य नियंत्रण प्रणाली पर कोई असर नहीं पड़ा।
पायलट ने पूरी सावधानी बरतते हुए अमौसी एयरपोर्ट के रनवे पर विमान को बहुत ही सहज तरीके से उतार लिया। विमान के जमीन पर रुकते ही यात्रियों ने राहत की सांस ली। इंडिगो एयरलाइंस की तकनीकी टीम ने तुरंत विमान को अपनी निगरानी में लिया और नुकसान का जायजा लेना शुरू कर दिया। शुरुआती जांच में पता चला है कि विमान के अगले हिस्से का फाइबर कोव आकाशीय बिजली की चपेट में आने से टूट गया है।
यात्रियों में मची अफरा-तफरी, सभी सुरक्षित बाहर निकाले गए
17 हजार फीट की ऊंचाई पर विमान के भीतर बैठे यात्रियों को अचानक एक तेज धमाका सुनाई दिया और विमान जोर से हिल गया। इस तेज झटके से यात्रियों में कुछ समय के लिए डर का माहौल बन गया और कई लोग घबरा गए। हालांकि, केबिन क्रू के सदस्यों ने तुरंत मोर्चा संभाला और यात्रियों को सांत्वना दी कि विमान पूरी तरह नियंत्रण में है। किसी भी यात्री को गंभीर चोट आने की कोई खबर नहीं है।
सभी यात्रियों को सुरक्षित तरीके से विमान से बाहर निकालकर टर्मिनल भवन में पहुंचाया गया। एयरलाइंस की तरफ से यात्रियों को उनके गंतव्य तक भेजने के लिए वैकल्पिक इंतजाम किए गए। नागरिक उड्डयन महानिदेशालय यानी डीजीसीए के अधिकारियों को भी इस पूरी घटना की जानकारी दे दी गई है। तकनीकी विशेषज्ञों की टीम अब इस बात की जांच कर रही है कि बिजली गिरने से विमान के अंदरूनी सर्किट्स को कितना नुकसान हुआ है।
मौसम खराब होने पर उड़ानों की सुरक्षा और एहतियाती कदम
बरसात और आंधी-तूफान के दिनों में आसमान में बादलों के बीच बिजली चमकना आम बात है। आधुनिक विमानों को इस तरह से डिजाइन किया जाता है कि वे बिजली गिरने के झटके को सह सकें। विमान के बाहरी हिस्से पर मेटल की ऐसी परत होती है जो बिजली के करंट को बाहर ही बाहर जमीन की तरफ या हवा में डिस्चार्ज कर देती है। इसके बावजूद इस तरह की घटनाएं यात्रियों के मन में सुरक्षा को लेकर सवाल खड़े करती हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि पायलटों को ऐसे संकट से निपटने की विशेष ट्रेनिंग दी जाती है। इस बार भी पायलट की मुस्तैदी के कारण एक बड़ा विमान हादसा होने से टल गया। विमान को फिलहाल उड़ान भरने से रोक दिया गया है और जब तक पूरी मरम्मत और जांच नहीं हो जाती, इसे हैंगर में ही रखा जाएगा। एयरलाइंस ने इस घटना पर दुख जताते हुए कहा है कि यात्रियों की सुरक्षा उनके लिए सबसे ऊपर है।








