नई दिल्ली/ग्राउंड ब्यूरो — तकनीक की दुनिया से एक बड़ी और हैरान करने वाली खबर सामने आ रही है। कभी एक अरब डॉलर यानी करीब आठ हजार करोड़ रुपये की मार्केट वैल्यू वाले मशहूर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस स्टार्टअप Character.AI ने अब खुद को दिवालिया घोषित करने के लिए आवेदन कर दिया है। यह वही कंपनी है जिसके चैटबॉट्स और एआई किरदारों के साथ दुनिया भर के करोड़ों यूजर बातें करते थे और अपना समय बिताते थे। कंपनी की माली हालत इतनी खराब हो गई कि उसे अदालत का दरवाजा खटखटाना पड़ा। यह घटना दिखाती है कि एआई बाजार में चमक-धमक के पीछे कितनी बड़ी वित्तीय चुनौतियां छिपी होती हैं।
शुरुआती दौर में इस स्टार्टअप को लेकर निवेशकों में भारी उत्साह देखा गया था। लोगों को लगा था कि वर्चुअल किरदारों से चैट करने का यह तरीका भविष्य की तकनीक है। लेकिन धीरे-धीरे खर्चे बढ़ने लगे और कंपनी उस हिसाब से मुनाफा नहीं कमा पाई। हालात तब और बिगड़ गए जब इस तकनीक के बच्चों पर पड़ने वाले बुरे असर को लेकर सवाल उठने लगे। कई रिपोर्ट्स में यह सामने आया कि इन चैटबॉट्स की लत की वजह से युवा और बच्चे मानसिक रूप से प्रभावित हो रहे हैं। इन तमाम विवादों और कानूनी पचड़ों के बीच निवेशकों का भरोसा डगमगा गया और कंपनी कर्ज के बोझ तले दबती चली गई।
डिज्नी की बीस मिलियन डॉलर की स्टॉकिंग हॉर्स बोली
इस पूरी तबाही के बीच मनोरंजन की दुनिया की जानी-मानी कंपनी डिज्नी ने एक बड़ा कदम उठाया है। डिज्नी ने एक स्टॉकिंग हॉर्स समझौते के तहत Character.AI को खरीदने के लिए 20 मिलियन डॉलर यानी करीब 160 करोड़ रुपये की बोली लगा दी है। दिवालिया प्रक्रिया में स्टॉकिंग हॉर्स बोली का मतलब होता है कि कोई कंपनी शुरुआती और सबसे सुरक्षित बोली लगाती है ताकि दिवालिया हुई कंपनी के एसेट्स को सस्ते में न बेचना पड़े और एक बेस प्राइस तय हो जाए। डिज्नी के इस कदम से साफ है कि वह एआई तकनीक और इन वर्चुअल किरदारों के कॉपीराइट को अपने पाले में लाना चाहती है ताकि भविष्य की कहानियों में इनका इस्तेमाल किया जा सके।
डिज्नी और इस दिवालिया स्टार्टअप के बीच चल रही इस डील पर बाजार के जानकारों की पैनी नजर बनी हुई है। हालांकि बोली की यह रकम उस एक अरब डॉलर की वैल्यूएशन के मुकाबले बहुत कम है जो कभी इस कंपनी की हुआ करती थी। इसे निवेशकों के लिए एक बड़ा झटका माना जा रहा है जिन्होंने इसमें अपना पैसा लगाया था। दिवालिया अदालत अब इस पूरी नीलामी प्रक्रिया की देखरेख कर रही है। आने वाले दिनों में यह साफ हो पाएगा कि क्या कोई अन्य कंपनी भी इस दौड़ में शामिल होती है या फिर डिज्नी ही इस पूरे प्लेटफॉर्म की मालकिन बनती है।
गूगल के साथ समझौते की चर्चा और बच्चों की सुरक्षा पर सवाल
इस पूरे घटनाक्रम के बीच गूगल और Character.AI के बीच किसी पुराने समझौते को लेकर भी नई चर्चाएं तेज हो गई हैं। गूगल इस स्टार्टअप का एक बड़ा साझीदार रहा है और तकनीकी स्तर पर दोनों ने मिलकर काफी काम किया था। लेकिन इन कारोबारी समझौतों से इतर समाज में एक बड़ी चिंता बच्चों की सुरक्षा को लेकर बन रही है। माता-पिता और बाल अधिकार संगठन लगातार सवाल उठा रहे हैं कि क्या इस तरह के एआई चैटबॉट्स बच्चों के कोमल दिमाग पर बुरा असर डाल रहे हैं? कई मामलों में देखा गया है कि यूजर इन वर्चुअल दोस्तों से इस हद तक जुड़ जाते हैं कि वे असल दुनिया से कट जाते हैं।
द फ्रीलान्स की जमीनी पड़ताल बताती है कि आने वाले समय में सरकारों को एआई कंपनियों के लिए कड़े नियम बनाने ही होंगे। केवल तकनीकी तरक्की के नाम पर बच्चों की मानसिक सेहत से खिलवाड़ नहीं किया जा सकता। Character.AI का दिवालिया होना और डिज्नी द्वारा इसे खरीदने की कोशिश इस बात का सबूत है कि एआई का बाजार अब बहुत तेजी से बदल रहा है। जो कंपनियां सिर्फ हवा हवाई वादों पर चल रही थीं, उन्हें अब असल दुनिया के वित्तीय और कानूनी दबावों का सामना करना पड़ रहा है। आने वाले हफ्तों में यह तय हो जाएगा कि इस चर्चित प्लेटफॉर्म का मालिकाना हक किसके हाथ में जाता है और इसके चैटबॉट्स का भविष्य क्या होगा।










