ठाणे में खौफनाक वारदात: सोने की चेन के लालच में दोस्तों ने ली जान
महाराष्ट्र के ठाणे शहर से एक ऐसी सनसनीखेज घटना सामने आई है जिसने दोस्ती जैसे पवित्र रिश्ते को तार-तार कर दिया है। भौतिक सुख-सुविधाओं और कम उम्र में बड़ी ख्वाहिशों को पूरा करने की जिद ने दो किशोरों को ऐसा अंधा बना दिया कि उन्होंने अपने ही एक सहपाठी को मौत के घाट उतार दिया। मामला ठाणे के कसारवडावली पुलिस स्टेशन क्षेत्र का है, जहां 12वीं कक्षा में पढ़ने वाले दो नाबालिग छात्रों ने अपने 17 वर्षीय दोस्त की बेरहमी से हत्या कर दी। इस घटना के सामने आने के बाद इलाके में हड़कंप मच गया है और हर कोई हैरान है कि इतनी कम उम्र के बच्चों के मन में इस तरह की क्रूरता कहां से आ गई।
प्राथमिक जांच में यह बात सामने आई है कि आरोपियों की नजर मृतक के पास मौजूद करीब एक लाख रुपये कीमत की सात ग्राम सोने की चेन पर थी। आरोपी इस चेन को चुराकर उस पैसे से अपने जन्मदिन की पार्टी मनाना चाहते थे और एक नई मोटरसाइकिल खरीदना चाहते थे। जब उनका यह लालच परवान चढ़ा, तो उन्होंने इस खौफनाक साजिश को अंजाम देने का फैसला कर लिया। पुलिस के अनुसार, इस पूरे षड्यंत्र में दोनों आरोपी किशोर शामिल थे, जिन्होंने सुनियोजित तरीके से अपने ही दोस्त को रास्ते से हटाने की योजना बनाई थी।
गायब होने की शिकायत से लेकर पुलिस की गहरी छानबीन तक
इस पूरे मामले की शुरुआत तब हुई जब 17 वर्षीय किशोर 24 सितंबर की शाम को करीब सात बजे अपने घर से निकला, लेकिन देर रात तक वापस नहीं लौटा। बेटे के घर न लौटने पर परिजनों ने आसपास तलाश की, लेकिन उसका कोई सुराग नहीं मिला। अगले दिन उसके पिता ने स्थानीय थाने में बेटे के लापता होने की शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए तुरंत अपहरण का मामला दर्ज किया और जांच के पहिए तेजी से घुमा दिए।
खोजी दल ने इलाके के लगभग 80 से 90 सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली ताकि लापता किशोर की आखिरी लोकेशन का पता लगाया जा सके। शुरुआत में पुलिस के हाथ कोई ठोस सुराग नहीं लगा। इस बीच, आरोपियों में से एक ने खुद पुलिस और पीड़ित परिवार के पास पहुंचकर शातिर तरीके से नाटक किया। उसने दावा किया कि उसने पीड़ित को ब्रह्मांड सर्कल के पास एक अज्ञात युवक के साथ सफेद रंग की एक्टिवा स्कूटर पर जाते देखा था। उसने ऐसा दिखावा किया जैसे वह अपने दोस्त के गायब होने से बेहद दुखी है, ताकि किसी को उस पर शक न हो सके।
फिल्म 'दृश्यम 3' से प्रेरणा लेकर रची गई थी सबूत मिटाने की साजिश
जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ी, पुलिस का शक दोनों नाबालिगों पर गहराने लगा। पुलिस ने जब उनके मोबाइल फोन के डेटा का तकनीकी विश्लेषण किया और उनसे सख्ती से पूछताछ की, तो परतें खुलने लगीं। पूछताछ के दौरान एक आरोपी ने अपना जुर्म कबूल कर लिया। पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, आरोपियों ने अपराध को अंजाम देने और उसके बाद सबूतों को मिटाने के लिए लोकप्रिय फिल्म ‘दृश्यम 3’ से प्रेरणा ली थी। उन्होंने सोचा था कि वे पुलिस और कानून की आंखों में धूल झोंककर आसानी से बच निकलेंगे।
आरोपियों ने पुलिस को गुमराह करने के लिए एक बेहद शातिर तरीका अपनाया। उन्होंने मृतक का मोबाइल फोन तोड़कर एक चलती हुई बस में फेंक दिया ताकि फोन की लोकेशन लगातार बदलती रहे और जांच करने वाली टीम दूसरी दिशा में भटक जाए। इसके अलावा, उन्होंने वारदात के बाद सबूतों को पूरी तरह मिटाने के लिए कई हथकंडे अपनाए, लेकिन वे पुलिस की पैनी नजर से बच नहीं सके।
सिगरेट पीने के बहाने सुनसान जगह पर बुलाकर किया गया हमला
पुलिस पूछताछ में हुए खुलासे के अनुसार, आरोपियों ने सुनियोजित तरीके से अपने दोस्त को घोड़बंदर रोड पर ब्रह्मांड फेज-2 के पास एक सुनसान जगह पर बुलाया। उन्होंने पीड़ित को सिगरेट पीने के बहाने वहां आमंत्रित किया था। जब वह वहां पहुंचा, तो दोनों ने मिलकर उस पर चाकू से कई वार किए। इसके बाद पहचान छिपाने के लिए पत्थर से उसका चेहरा बुरी तरह कुचल दिया ताकि कोई उसकी लाश की शिनाख्त न कर सके। हत्या को अंजाम देने के बाद उन्होंने शव को पास की झाड़ियों में छिपा दिया था।
क्रूरता का सिलसिला यहीं नहीं थमा। अगले दिन दोनों आरोपी दोबारा उस सुनसान जगह पर पहुंचे। वे अपने साथ पेट्रोल लेकर आए थे ताकि शव को पूरी तरह जलाकर राख कर दिया जाए और डीएनए या अन्य साक्ष्य मिटाए जा सकें। उनकी निशानदेही पर पुलिस ने गुरुवार को घटनास्थल से आधा जला हुआ शव बरामद कर लिया। कसारवडावली पुलिस ने इस मामले में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 103(1) यानी हत्या और धारा 238 यानी सबूत नष्ट करने के आरोप में मुकदमा दर्ज कर लिया है।
वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों की प्रतिक्रिया और कानूनी कार्रवाई
मामले की गंभीरता को देखते हुए स्थानीय पुलिस बल के साथ-साथ अपराध शाखा के वरिष्ठ अधिकारी भी जांच में जुटे हुए हैं। पुलिस ने आरोपियों द्वारा इस्तेमाल किए गए हथियार, पेट्रोल और अन्य साक्ष्यों को अपने कब्जे में ले लिया है। चूंकि आरोपी नाबालिग हैं, इसलिए किशोर न्याय बोर्ड के नियमों के तहत आगे की वैधानिक कार्रवाई की जा रही है। समाजशास्त्रियों और मनोवैज्ञानिकों का मानना है कि किशोरों में बढ़ती भौतिकवादी सोच, अपराध की दुनिया का अंधा अनुकरण और सहनशीलता की कमी इस तरह की दर्दनाक घटनाओं को जन्म दे रही है।
"आरोपियों ने जन्मदिन की पार्टी और बाइक खरीदने के लिए अपने ही दोस्त की जान ले ली। उन्होंने फिल्म से आइडिया लेकर पुलिस को भटकाने की पूरी कोशिश की थी, लेकिन हमारे तकनीकी सबूतों और सीसीटीवी सर्विलांस ने इस अंधे कत्ल की गुत्थी को सुलझा लिया। दोनों नाबालिगों को हिरासत में लेकर आगे की कानूनी प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।" — स्थानीय पुलिस इन्वेस्टिगेशन टीम












