नई दिल्ली/ग्राउंड ब्यूरो — देश के करोड़ों केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनभोगियों की निगाहें इस समय सरकार के अगले कदम पर टिकी हैं। हर कोई यह जानना चाहता है कि उनका महंगाई भत्ता यानी डीए कब बढ़ेगा। हाल ही में हुई केंद्रीय कैबिनेट की बैठक में इस अहम मुद्दे पर कोई आधिकारिक फैसला नहीं आ सका। इसके बाद से कर्मचारियों के बीच चर्चा और उत्सुकता का दौर और तेज हो गया है। सरकारी दफ्तरों से लेकर चाय की दुकानों तक बस यही एक सवाल गूंज रहा है कि क्या इस बार का तोहफा सीधे दिवाली पर मिलेगा।
पिछले कुछ हफ्तों से मीडिया रिपोर्ट्स और कर्मचारी संगठनों के बयानों में यह दावा किया जा रहा था कि सरकार इस बैठक में डीए बढ़ाने का बड़ा ऐलान कर सकती है। लेकिन बैठक खत्म होने के बाद जब कोई घोषणा नहीं हुई तो कर्मचारियों में थोड़ी मायूसी जरूर छाई है। जानकारों का कहना है कि सरकार त्योहारी सीजन के ठीक पहले इस सौगात का ऐलान कर सकती है ताकि कर्मचारियों को सीधा और बड़ा फायदा मिल सके। हालांकि आधिकारिक मोहर लगने तक हर कोई सिर्फ कयास ही लगा रहा है।
कर्मचारी संगठनों की मांग और बोनस पर नजर
अखिल भारतीय रक्षा कर्मचारी महासंघ यानी एआईडीईएफ ने सरकार के सामने अपनी मांगें रखी हैं। संगठन ने साफ कहा है कि सरकार को बिना किसी और देरी के महंगाई भत्ते में बढ़ोतरी का ऐलान करना चाहिए। इसके साथ ही कर्मचारियों के लिए मिलने वाले बोनस की सीमा को भी बढ़ाने की पुरजोर मांग की गई है। उनका तर्क है कि महंगाई लगातार बढ़ रही है और ऐसे में बोनस की पुरानी सीमा बहुत कम साबित हो रही है। यदि सरकार इस पर विचार करती है तो त्योहारी खुशियां कई गुना बढ़ जाएंगी।
कर्मचारियों की ओर से यह भी कहा जा रहा है कि हर बार फैसले में होने वाली देरी से बजट का गणित गड़बड़ा जाता है। त्योहारी खरीदारी के लिए कर्मचारियों को पैसों की जरूरत होती है और यदि समय पर डीए का पैसा मिल जाए तो बाजार में भी रौनक लौट आती है। पिछले कई सालों का ट्रेंड देखें तो सरकार अक्सर अक्टूबर के महीने में या दशहरा और दिवाली के आसपास ही डीए बढ़ाने का आधिकारिक पत्र जारी करती है। इस बार भी यही उम्मीद की जा रही है कि प्रशासनिक प्रक्रियाएं अंतिम दौर में हैं।
केंद्रीय कर्मचारियों को पता होनी चाहिए डीए से जुड़ी ये जरूरी बातें
महंगाई भत्ते का सीधा ताल्लुक देश में बढ़ रही महंगाई के आंकड़ों से होता है। अखिल भारतीय उपभोक्ता मूल्य सूचकांक के आधार पर हर छह महीने में डीए की समीक्षा की जाती है। केंद्र सरकार साल में दो बार यानी जनवरी और जुलाई के प्रभाव से डीए में संशोधन करती है। हालांकि इन घोषणाओं के होने में अक्सर दो से तीन महीने का वक्त लग जाता है और बढ़ा हुआ पैसा एरियर के रूप में जुड़कर मिलता है। कर्मचारियों को यह भी समझना होगा कि डीए उनकी मूल सैलरी का एक तय हिस्सा होता है जो महंगाई के असर को कम करने के लिए दिया जाता है।
अब जबकि कैबिनेट बैठक से खाली हाथ लौटना पड़ा है, तो सभी की निगाहें दशहरे और दिवाली के बीच के समय पर टिकी हैं। क्या सरकार आखिरी वक्त पर सरप्राइज देगी या फिर थोड़ा और इंतजार करना पड़ेगा, यह आने वाले कुछ दिनों में साफ हो जाएगा। 'द फ्रीलान्स' की टीम इस पूरे मामले पर अपनी पैनी नजर बनाए हुए है और जैसे ही कोई नया आधिकारिक आदेश आएगा, हम सबसे पहले आप तक सटीक जानकारी पहुंचाएंगे। तब तक कर्मचारियों को संयम बनाए रखने की सलाह दी जा रही है।
बाजार और अर्थव्यवस्था पर इसका क्या असर होगा
जब भी लाखों केंद्रीय कर्मचारियों का डीए बढ़ता है, तो इसका असर केवल उनके घरों तक सीमित नहीं रहता। बाजार की अर्थव्यवस्था पर भी इसका सीधा और बड़ा प्रभाव देखने को मिलता है। कर्मचारियों के हाथ में जब अतिरिक्त पैसा आता है, तो वे जमकर खरीदारी करते हैं। इससे ऑटोमोबाइल, रियल एस्टेट, इलेक्ट्रॉनिक्स और रिटेल सेक्टर में बंपर बिक्री होती है। व्यापारी वर्ग भी इस संभावित बढ़ोतरी का बेसब्री से इंतजार करता है क्योंकि उनका त्योहारी कारोबार काफी हद तक सरकारी कर्मचारियों की जेब पर निर्भर करता है।
अर्थशास्त्रियों का मानना है कि इस बार यदि एरियर का भुगतान भी एक साथ हो गया तो बाजार में अचानक नकदी का प्रवाह बढ़ जाएगा। यही वजह है कि सरकार हर पहलू पर बहुत ही सोच-समझकर कदम उठा रही है। वित्त मंत्रालय के अधिकारी आंकड़ों के हिसाब से बजट के संतुलन को परख रहे हैं ताकि देश की राजकोषीय स्थिति पर कोई अतिरिक्त दबाव न पड़े। कुल मिलाकर, यह इंतजार थोड़ा लंबा जरूर हो गया है, लेकिन उम्मीद का दीया अभी भी पूरी तरह روشن है।







