नई दिल्ली/ग्राउंड ब्यूरो — भारत के कृषि सेक्टर और किसानों की जिंदगी से जुड़ी खबरें इन दिनों देश भर में चर्चा का विषय बनी हुई हैं। ताजा घटनाक्रम में केंद्र सरकार से लेकर राज्य सरकारों तक ने किसानों के लिए कई बड़े कदम उठाए हैं। एक तरफ जहां ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए भारी-भरकम फंड जारी किए जा रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ स्थानीय स्तर पर किसानों के सम्मान और उनकी मदद के लिए नए आंकड़े और योजनाएं सामने आ रही हैं। खेती-किसानी से जुड़े इन सभी मामलों का सीधा असर देश के करोड़ों अन्नदाताओं की रोजमर्रा की जिंदगी पर पड़ रहा है।
इसी कड़ी में सबसे बड़ा कदम केंद्र सरकार की तरफ से उठाया गया है। प्रधानमंत्री ने कृषि बुनियादी ढांचा कोष के तहत एक लाख करोड़ रुपये की भारी-भरकम राशि से जुड़े कृषि ऋणदान प्रोजेक्ट की शुरुआत की है। इस योजना का मुख्य मकसद देश के गांवों में खेती से जुड़े गोदाम, कोल्ड स्टोरेज और फसल कटाई के बाद के इंतजामों को बेहतर बनाना है। सरकार का मानना है कि जब किसानों को अपनी फसल रखने और उसे सही समय पर बेचने के लिए आधुनिक सुविधाएं मिलेंगी, तो उनकी कमाई में इजाफा होगा और उन्हें बिचौलियों के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे।
एक लाख करोड़ रुपये के कृषि फंड से गांवों में बदलेगी तस्वीर
इस बड़े प्रोजेक्ट के तहत मिलने वाले पैसों से ग्रामीण इलाकों में खेती से जुड़े कई तरह के प्रोजेक्ट्स को खड़ा किया जाएगा। बैंक इस फंड से किसानों, कृषि स्टार्टअप्स और ग्रामीण उद्यमियों को बहुत कम ब्याज दर पर कर्ज देंगे। जानकारों का कहना है कि अगर यह पैसा सही जगह और समय पर खर्च हुआ, तो भारत के गांवों की तस्वीर पूरी तरह बदल सकती है। किसान अब अपनी फसल को औने-पौने दामों पर बेचने के बजाय गोदामों में सुरक्षित रख सकेंगे और बाजार में भाव सुधरने पर ही उसे बेच पाएंगे।
दूसरी तरफ, राज्यों के स्तर पर भी किसानों की भलाई के लिए कई काम हो रहे हैं। पश्चिम बंगाल में 'कृषक बंधु' योजना की नई सूची को लेकर ग्रामीण इलाकों में काफी हलचल है। इस योजना के तहत राज्य के छोटे और सीमांत किसानों को आर्थिक मदद दी जाती है ताकि वे खेती की शुरुआती लागत को आसानी से उठा सकें। हर साल लाखों किसानों के खातों में इस योजना का पैसा सीधा पहुंचता है, जिससे उन्हें खाद, बीज और पानी का खर्च चलाने में बड़ी राहत मिलती है। सूची में नाम देखने और स्टेटस चेक करने के लिए इन दिनों ग्रामीण इलाकों में इंटरनेट कैफे और मोबाइल दुकानों पर काफी भीड़ देखी जा रही है।
राज्य स्तर पर किसान सम्मान और कल्याण योजनाओं का विस्तार
असम के दूधनोई इलाके में हाल ही में 'किसान सम्मान दिवस' का आयोजन किया गया। इस विशेष कार्यक्रम में स्थानीय किसानों को सम्मानित किया गया और उन्हें बेहतर खेती के तरीकों के बारे में जानकारी दी गई। कृषि वैज्ञानिकों ने किसानों को मौसम के बदलाव से निपटने और कम लागत में ज्यादा पैदावार लेने के गुर सिखाए। ऐसे आयोजनों से किसानों का हौसला बढ़ता है और उन्हें महसूस होता है कि समाज और सरकार उनके योगदान को पूरी अहमियत दे रही है।
मैदान पर काम करने वाले रिपोर्टरों के मुताबिक, इन तमाम योजनाओं के बावजूद जमीनी स्तर पर कुछ चुनौतियां अभी भी बनी हुई हैं। कई किसानों का कहना है कि बैंक से मिलने वाले कर्ज के कागजी काम बहुत पेचीदा होते हैं, जिन्हें पूरा करने में उन्हें चक्कर काटने पड़ते हैं। वहीं, सरकारी दफ्तरों में योजनाओं की जानकारी समय पर न मिलने से कई जरूरतमंद लोग पीछे रह जाते हैं। इसके बावजूद, एक लाख करोड़ के नए फंड और राज्य की योजनाओं से यह उम्मीद जरूर जगी है कि आने वाले दिनों में किसानों की स्थिति में सुधार आएगा।
जमीनी हकीकत और किसानों तक योजनाओं की पहुंच
द फ्रीलान्स की टीम ने जब ग्रामीण इलाकों का दौरा किया, तो यह बात सामने आई कि योजनाओं का फायदा हर आखिरी व्यक्ति तक पहुंचाने के लिए प्रशासन को अभी और मेहनत करनी होगी। डिजिटल साक्षरता की कमी के कारण कई किसान ऑनलाइन फॉर्म भरने में असमर्थ रहते हैं। हालांकि, स्थानीय प्रशासन और बैंक अधिकारियों ने शिविर लगाकर इन दिक्कतों को दूर करने का भरोसा दिलाया है। कुल मिलाकर, कृषि क्षेत्र में पैसों के आने और सम्मान मिलने का यह दौर किसानों के लिए एक नई उम्मीद लेकर आया है।





