नई दिल्ली/ग्राउंड ब्यूरो — देश के सराफा बाजारों में इन दिनों गहनों को लेकर भारी हलचल मची हुई है। शादियों का सीजन आते ही गहनों की मांग तेजी से बढ़ जाती है। भारतीय परिवारों में सोने और चांदी के आभूषण केवल सजने-संवरने का साधन नहीं हैं। लोग इन्हें सबसे सुरक्षित बचत और निवेश का बड़ा जरिया मानते हैं। इस बीच केंद्र सरकार और भारतीय मानक ब्यूरो ने गहनों की शुद्धता को लेकर बड़े कदम उठाए हैं। अब चांदी के जेवरों पर भी विशिष्ट पहचान संख्या यानी एचयूआईडी हॉलमार्किंग को सख्ती से लागू करने की तैयारी है। इस फैसले से आम खरीदारों को नकली चांदी या मिलावट से मुक्ति मिलेगी। हर जेवर की अपनी एक अलग पहचान होगी।
बाजार में जेवरों की बढ़ती कीमतों के बीच शुद्धता सबसे बड़ा सवाल बन गई है। पहले केवल सोने के आभूषणों पर छह अंकों का अल्फान्यूमेरिक कोड अनिवार्य किया गया था। इस व्यवस्था की सफलता के बाद अब चांदी के बाजार को भी पूरी तरह पारदर्शी बनाया जा रहा है। छोटे शहरों से लेकर बड़े महानगरों तक के जौहरी अपनी दुकानों में नए मानक वाले आभूषण तैयार कर रहे हैं। खरीदार अब बिना हॉलमार्क वाले जेवर लेने से बच रहे हैं। जब कोई ग्राहक दुकान पर जाता है तो वह सीधे हॉलमार्क की जांच करता है। इससे पुराने समय से चली आ रही मिलावट की शिकायतों पर काफी हद तक लगाम लगी है।
चांदी के गहनों पर नए हॉलमार्किंग नियमों का सीधा असर
चांदी के जेवरों पर एचयूआईडी लागू होने से आम ग्राहक को सबसे बड़ा फायदा शुद्धता का होगा। अब तक चांदी के बर्तनों और पाजेब जैसे पारंपरिक गहनों में मिलावट की शिकायतें बहुत ज्यादा आती थीं। कई बार अस्सी फीसदी शुद्धता बताकर सत्तर फीसदी से भी कम शुद्धता की चांदी बेची जाती थी। नए नियमों के बाद हर आभूषण पर उसकी सही शुद्धता साफ अक्षरों में दर्ज होगी। खरीदार सरकारी मोबाइल ऐप के जरिए खुद जेवर के नंबर को डालकर उसकी पूरी जानकारी देख सकेंगे। इससे आभूषण किस तारीख को और किस लैब में जांचा गया, यह सब एक क्लिक में पता चल जाएगा।
सराफा कारोबारियों का कहना है कि शुरुआत में इस नियम से थोड़ी परेशानी जरूर हो सकती है। छोटे कारीगरों को नई तकनीक और जांच केंद्रों से जुड़ने में वक्त लगेगा। लेकिन लंबी अवधि में यह कदम पूरे बाजार के लिए फायदेमंद साबित होगा। जब ग्राहकों का भरोसा बढ़ेगा, तो चांदी के गहनों की मांग में और तेजी आएगी। देश के प्रमुख सराफा संघों ने अपने सभी सदस्यों को नए नियमों के अनुसार स्टॉक तैयार करने का निर्देश दिया है। जो दुकानदार नियमों का पालन नहीं करेंगे, उन पर सख्त जुर्माने का प्रावधान भी रखा गया है।
शादियों में दिखावे की होड़ और सुरक्षा की गंभीर चुनौतियां
एक तरफ जहां गहनों की शुद्धता को लेकर नियम कड़े हो रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ सामाजिक स्तर पर भी बदलाव दिख रहे हैं। शादियों में करोड़ों के जेवर, लग्जरी गाड़ियां और भारी नकदी देने के मामले लगातार सुर्खियों में हैं। हाल ही में उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद समेत कई इलाकों से शादियों में करोड़ों के आभूषणों के लेन-देन की खबरें सामने आई हैं। सामाजिक कार्यकर्ता इसे समाज के लिए चिंता का विषय बता रहे हैं। उनका मानना है कि ऐसा दिखावा मध्यमवर्गीय परिवारों पर भारी दबाव बनाता है। दिखावे की इस होड़ के चलते कई परिवार कर्ज के जाल में फंस जाते हैं।
इसके साथ ही घरों में रखे कीमती गहनों की सुरक्षा भी एक बड़ा मुद्दा बन गई है। हाल के दिनों में कई शहरों में शादियों के दौरान या घरों में चोरी की घटनाएं बढ़ी हैं। कुछ मामलों में शातिर चोरों ने घरों में घुसकर लाखों के जेवर पार कर दिए। वहीं कुछ जगहों पर शादी के तुरंत बाद जेवर लेकर भागने के फर्जीवाड़े भी सामने आए हैं। पुलिस अधिकारियों ने आम लोगों से अपील की है कि वे घरों में बहुत ज्यादा सोना-चांदी न रखें। जरूरत न होने पर जेवरों को बैंक लॉकर में ही सुरक्षित रखना सबसे समझदारी भरा फैसला है।
सोने के आयात और घरेलू अर्थव्यवस्था पर नीतिगत चर्चा
भारत दुनिया में सोने के सबसे बड़े खरीदारों में गिना जाता है। हर साल विदेशों से सैकड़ों टन सोना आयात किया जाता है। इससे देश के विदेशी मुद्रा भंडार पर सीधा असर पड़ता है। देश के नीति निर्माता लगातार आम नागरिकों से अपील करते रहे हैं कि वे सोने को केवल अलमारी में बंद रखने के बजाय वित्तीय साधनों में निवेश करें। सरकार ने इसी उद्देश्य से सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड जैसी योजनाएं शुरू की थीं। इन योजनाओं का मकसद यही था कि लोगों को सोने की बढ़ती कीमत का फायदा भी मिले और देश का पैसा विदेशी आयात में न फंसे।
द फ्रीलान्स की ग्राउंड पड़ताल में सामने आया है कि युवा पीढ़ी अब भारी-भरकम गहनों की जगह हल्के और रोजमर्रा में पहनने वाले डिजाइन पसंद कर रही है। डिजिटल गोल्ड और पेपर गोल्ड के प्रति भी युवाओं का रुझान बढ़ा है। हालांकि पारंपरिक परिवारों में आज भी असली आभूषण खरीदने का महत्व कम नहीं हुआ है। सराफा विशेषज्ञों का कहना है कि हॉलमार्किंग के नए नियमों से पारंपरिक बाजार को नया जीवन मिलेगा। ग्राहक अब बिना किसी डर के शुद्ध सोने और चांदी के आभूषण खरीद सकेंगे। आने वाले त्योहारी सीजन में इस पारदर्शी व्यवस्था का बड़ा लाभ पूरे बाजार को मिलने की उम्मीद है।






