नई दिल्ली/ग्राउंड ब्यूरो — देश की राजधानी में आयोजित इंडिया मोबाइल कांग्रेस के दसवें संस्करण का उद्घाटन करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने तकनीक और डिजिटल सुधारों पर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने अपने संबोधन में साफ शब्दों में कहा कि सरकार की प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण यानी डीबीटी व्यवस्था ने देश के पांच लाख करोड़ रुपये गलत हाथों में जाने से बचा लिए हैं। प्रधानमंत्री के इस बयान के बाद राजनीतिक गलियारों और तकनीकी जगत में इस बात की चर्चा तेज हो गई है कि कैसे तकनीक ने सरकारी योजनाओं के लीकेज को पूरी तरह बंद कर दिया है। आज से कुछ साल पहले तक सरकारी पैसों का एक बड़ा हिस्सा बिचौलियों और फर्जी लाभार्थियों के पास चला जाता था, लेकिन अब सीधे बैंक खातों में पैसे पहुंचने से इस पर रोक लग गई है।
इस पूरे बदलाव पर बात करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने एक तीखा सवाल भी उठाया। उन्होंने कहा कि जिन लोगों की मुफ्त की कमाई और भ्रष्टाचार की दुकानें बंद हो गई हैं, वे कभी भी इस व्यवस्था से खुश नहीं हो सकते और न ही सरकार को पसंद कर सकते हैं। राजनीतिक दलों की तरफ से इस पर अपनी-अपनी प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। कांग्रेस पार्टी और अन्य विरोधी दलों ने सरकार के इन दावों पर सवाल खड़े किए हैं और कहा है कि आम आदमी की असली समस्याएं आज भी जस की तस बनी हुई हैं। हालांकि, सरकारी आंकड़ों के अनुसार, डीबीटी ने सरकारी खजाने को मजबूत करने और जरूरतमंदों तक सीधा पैसा पहुंचाने में ऐतिहासिक काम किया है।
बैंक और अस्पताल अब लोगों की जेब वाले फोन में
प्रधानमंत्री ने अपने भाषण में देश के डिजिटल बुनियादी ढांचे की तारीफ करते हुए कहा कि आज भारत में तकनीक हर आम नागरिक की पहुंच में आ चुकी है। उन्होंने मिसाल देते हुए कहा कि आज देश का आम आदमी अपने मोबाइल फोन के जरिए ही बैंक के काम और अस्पताल से जुड़ी जानकारियां पा रहा है। पहले जहाँ छोटे से काम के लिए लंबी लाइनों में लगना पड़ता था और दफ्तरों के चक्कर काटने पड़ते थे, वहीं अब स्मार्टफोन के एक क्लिक पर सब कुछ मुमकिन हो गया है। भारत का यह डिजिटल मॉडल अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी चर्चा का विषय बन गया है। पहले मोबाइल और तकनीकी आयोजनों में केवल भारत के गिने-चुने लोग ही दिखते थे, लेकिन आज इस क्षेत्र में भारत की साख पूरी दुनिया में फैल चुकी है और लगभग सौ देशों के प्रतिनिधि इस बदलाव को करीब से देख रहे हैं।
तकनीक के इस दौर में सुरक्षा और साइबर अपराध सबसे बड़ी चुनौती बनकर सामने आए हैं। प्रधानमंत्री ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के गलत इस्तेमाल यानी डीपफेक पर भी गंभीर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि आज के समय में डीपफेक वीडियो और तस्वीरें समाज के लिए एक बड़ा खतरा बन रही हैं। इससे फेक न्यूज और धोखेबाजी के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं, जिससे निपटने के लिए कड़े कदम उठाने की जरूरत है। सरकार और तकनीकी कंपनियों को मिलकर एक ऐसा तंत्र तैयार करना होगा जिससे आम लोग इस प्रकार के डिजिटल धोखों से बच सकें। बच्चों और युवाओं को इन फेक तकनीकों से बचाने के लिए डिजिटल साक्षरता बढ़ाना आज की सबसे बड़ी जरूरत बन गई है।
विपक्ष का पलटवार और सियासी बयानबाजी
प्रधानमंत्री के इस बयान के बाद विपक्षी दलों ने भी अपनी रणनीति तेज कर दी है। कांग्रेस पार्टी के प्रमुख प्रवक्ताओं ने मीडिया से बातचीत करते हुए सरकार की आर्थिक नीतियों पर सवाल उठाए। उनका कहना है कि बड़े-बड़े आंकड़े पेश करने से गरीबों की थाली की महंगाई कम नहीं हो रही है। विपक्ष का आरोप है कि सरकार तकनीकी तरक्की की आड़ में आम आदमी के सामने आ रही असली आर्थिक दिक्कतों को छुपाने की कोशिश कर रही है। देश में रोजगार और बढ़ती कीमतों के मुद्दों पर राजनीतिक दलों के बीच जुबानी जंग लगातार जारी है।
द फ्रीलान्स की जमीनी पड़ताल बताती है कि आम आदमी के जीवन में मोबाइल और इंटरनेट के आने से काफी आसानी जरूर हुई है। छोटे दुकानदारों से लेकर बड़े व्यापारियों तक ने डिजिटल पेमेंट को अपना लिया है, जिससे व्यापार में पारदर्शिता आई है। ग्रामीण इलाकों में भी जनधन खातों और यूपीआई ने पैसों के लेन-देन को पूरी तरह बदल दिया है। हालांकि, तकनीकी सुरक्षा और ग्रामीण क्षेत्रों में इंटरनेट की स्पीड से जुड़ी समस्याएं अभी भी पूरी तरह हल नहीं हो पाई हैं। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि सरकार डीपफेक और साइबर ठगी जैसी नई चुनौतियों से निपटने के लिए क्या ठोस और कड़े कानूनी कदम उठाती है।






