नई दिल्ली/ग्राउंड ब्यूरो — देश भर में आज इंटरनेट पर अचानक एक शब्द ने लोगों का ध्यान खींचा है। गूगल ट्रेंड्स पर 'तहासिलदार' यानी तहसीलदार शब्द को लेकर अचानक लोगों ने बहुत ज्यादा खोजबीन शुरू कर दी है। पिछले कुछ घंटों में इस शब्द को सर्च करने वालों की संख्या में भारी उछाल आया है। यह ट्रेंड मुख्य रूप से दक्षिण भारत और हिंदी पट्टी के कई राज्यों में एक साथ देखा जा रहा है। आम लोग यह जानना चाहते हैं कि राजस्व विभाग के इस बड़े अधिकारी से जुड़े नियम या कोई नया आदेश क्या आया है।
हमारी टीम ने जब इस अचानक आए डिजिटल तूफान की जमीनी पड़ताल की तो कई दिलचस्प बातें सामने आईं। पता चला कि लोग जमीन के कागजात, म्यूटेशन और जाति प्रमाण पत्र जैसे कामों के लिए ऑनलाइन पोर्टल की स्थिति जांच रहे हैं। कई राज्यों में तहसीलदार कार्यालयों से जुड़े नए डिजिटल पोर्टल शुरू किए गए हैं। इन पोर्टलों पर सर्वर की धीमी रफ्तार या तकनीकी दिक्कतों के कारण लोगों को खासी परेशानी हो रही है। इसी वजह से नागरिक लगातार इंटरनेट पर समाधान ढूंढ रहे हैं और यह शब्द गूगल पर टॉप ट्रेंड बन गया है।
राजस्व विभाग के नए डिजिटल पोर्टल और सर्वर की समस्या
दैनिक जीवन में भूमि और संपत्ति से जुड़े हर छोटे काम के लिए लोगों को तहसीलदार कार्यालय के चक्कर काटने पड़ते हैं। पिछले कुछ दिनों से देश के कई हिस्सों में जमीन के रिकॉर्ड ऑनलाइन करने का काम तेजी से चल रहा है। सरकार चाहती है कि लोग घर बैठे अपनी जमीन का ब्योरा देख सकें। लेकिन सर्वर डाउन होने और तकनीकी खामियों के कारण आम आदमी का काम समय पर नहीं हो पा रहा है। लोग दफ्तर जाने के बजाय सीधे इंटरनेट पर यह तलाश रहे हैं कि उनका काम ऑनलाइन कैसे पूरा होगा।
स्थानीय स्तर पर काम कर रहे कई राजस्व कर्मचारियों ने बताया कि लोगों की भीड़ रोज कार्यालयों में उमड़ रही है। जब ऑनलाइन पोर्टल काम नहीं करता है तो तनाव और बढ़ जाता है। कई जगहों पर अधिकारियों के नए दिशा-निर्देश भी आए हैं जिनके बारे में लोग विस्तार से जानना चाहते हैं। सोशल मीडिया और मैसेजिंग ऐप्स पर भी इससे जुड़े संदेश तेजी से वायरल हो रहे हैं। यही मुख्य वजह है कि मोबाइल पर लोग लगातार इस पद और इससे जुड़ी सेवाओं के बारे में सर्च कर रहे हैं।
आम जनता को हो रही है परेशानी और अधिकारियों की प्रतिक्रिया
इस पूरे मामले पर जब हमने कुछ स्थानीय लोगों से बात की तो उनका दर्द साफ झलका। एक स्थानीय नागरिक ने बताया कि उन्हें जमीन के नामांतरण के लिए कई हफ्तों से दौड़ाया जा रहा है। ऑनलाइन आवेदन करने के बाद भी फाइल आगे नहीं बढ़ रही है। जब वे इस बारे में पुख्ता जानकारी चाहते हैं तो उन्हें कोई संतोषजनक जवाब नहीं मिलता। मजबूरन लोग इंटरनेट का सहारा लेते हैं ताकि उन्हें सही प्रक्रिया और नियमों की जानकारी मिल सके।
दूसरी तरफ प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि सिस्टम को पूरी तरह पारदर्शी बनाने का प्रयास जारी है। अधिकारियों ने अपील की है कि लोग किसी भी अफवाह पर ध्यान न दें और केवल आधिकारिक वेबसाइट का ही उपयोग करें। सर्वर की दिक्कतों को दूर करने के लिए तकनीकी टीम लगातार काम कर रही है। आने वाले दिनों में व्यवस्था के और अधिक सुधरने की उम्मीद जताई जा रही है। द फ्रीलान्स इस मामले पर लगातार नजर बनाए रखेगा और हर अपडेट आप तक पहुंचाता रहेगा।
डिजिटल बदलाव और आगे की राह
भारत में प्रशासनिक सेवाओं का डिजिटलीकरण एक बड़ा कदम है। लेकिन जब तक ग्रामीण इलाकों में इंटरनेट की रफ्तार और सर्वर की क्षमता मजबूत नहीं होती, तब तक ऐसी मुश्किलें आती रहेंगी। तहसीलदार का पद ग्रामीण प्रशासन की रीढ़ माना जाता है। जब तक इस रीढ़ को आधुनिक तकनीक का मजबूत सहारा नहीं मिलेगा, तब तक आम जनता को राहत मिलना मुश्किल है। हमारी ग्राउंड रिपोर्ट का यही निष्कर्ष है कि तकनीक तभी सफल होगी जब वह आम आदमी के लिए आसान और सुलभ हो।








