नई दिल्ली/ग्राउंड ब्यूरो — इन दिनों देश की राजनीति और समाज में कई ऐसे अजीबोगरीब वाकये चर्चा का विषय बने हुए हैं, जिन पर हर कोई बात कर रहा है। कभी फोन कॉल्स को लेकर प्रशासनिक गलियारों में भ्रम की स्थिति बन जाती है तो कभी देर रात पुलिस की कार्यशैली पर सवाल उठने लगते हैं। ऐसा ही एक ताजा मामला ओडिशा के नए राज्यपाल से जुड़ा हुआ है। जब देश के सबसे बड़े कार्यालय यानी प्रधानमंत्री कार्यालय से उनके पास फोन पहुंचा, तो उन्होंने उसे किसी आम स्पैम कॉल या प्राइवेट नंबर समझकर छोड़ दिया। बाद में जब उन्हें असलियत का पता चला तो खुद उन्होंने मीडिया के सामने इस मजेदार वाकये का जिक्र किया। इस घटना के बाद से ही प्रशासनिक अधिकारियों के बीच निजी नंबरों और आधिकारिक संवाद को लेकर एक नई बहस छिड़ गई है कि कैसे आज के दौर में अनजान नंबरों से बचना भारी पड़ सकता है।
दूसरी ओर, राजधानी दिल्ली से एक ऐसा मामला सामने आया जिसने कानून व्यवस्था और परिवार की प्राइवेसी पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। दिल्ली पुलिस के एक कथित वीडियो क्लिप के वायरल होने के बाद अभिजीत दीपके सामने आए और उन्होंने तीखा ऐतराज जताया। उनका कहना था कि रात के साढ़े तीन बजे उनके बुजुर्ग माता-पिता को बेवजह परेशान किया गया, जो कि पुलिस के तय नियमों के खिलाफ है। इस घटना ने आम नागरिकों के अधिकारों और पुलिसिया कार्रवाई के तौर-तरीकों पर एक बार फिर से सवालिया निशान लगा दिया है। परिवार वालों का आरोप है कि आधी रात को इस तरह घर पर आकर डराना-धमकाना किसी भी लिहाज से सही नहीं ठहराया जा सकता है। इस मामले में पुलिस प्रशासन की तरफ से अभी तक कोई ठोस सफाई सामने नहीं आई है, लेकिन स्थानीय स्तर पर इसे लेकर भारी रोष देखा जा रहा है।
आईआईटी बॉम्बे आत्महत्या केस और आजाद मैदान का अनशन
शिक्षा जगत से जुड़ी एक अन्य दर्दनाक खबर ने मुंबई से लेकर राष्ट्रीय राजधानी तक हलचल पैदा कर दी है। आईआईटी बॉम्बे के एक छात्र की आत्महत्या के मामले में न्याय की मांग को लेकर छात्र के माता-पिता मुंबई के आजाद मैदान में भूख हड़ताल पर बैठ गए हैं। उनका सीधा आरोप है कि संस्थान के भीतर उनके बेटे को मानसिक प्रताड़ना का शिकार बनाया गया था, जिसकी निष्पक्ष जांच आज तक नहीं हो पाई है। इस मामले में अब राजनीतिक सरगर्मी भी तेज हो गई है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता राहुल गांधी ने खुद पीड़ित माता-पिता से फोन पर लंबी बात की और उन्हें हरसंभव कानूनी और राजनीतिक मदद दिलाने का पूरा भरोसा दिया है। माता-पिता का कहना है कि जब तक उन्हें न्याय नहीं मिल जाता, वे अपना अनशन और संघर्ष किसी भी कीमत पर खत्म नहीं करेंगे।
छात्र के पिता ने मीडिया से बातचीत में बताया कि उन्हें कॉलेज प्रशासन से कभी भी संतोषजनक जवाब नहीं मिला। उन्होंने कहा कि उनके बेटे की मौत सामान्य नहीं थी बल्कि संस्थान की व्यवस्थागत कमियों का नतीजा थी। इस अनशन को समर्थन देने के लिए अब देश भर के छात्र संगठन और सामाजिक कार्यकर्ता भी आजाद मैदान पहुंचने लगे हैं। राहुल गांधी के इस फोन कॉल के बाद से यह मामला अब स्थानीय स्तर से उठकर राष्ट्रीय राजनीति के केंद्र में आ गया है। विपक्षी दलों का कहना है कि देश के बड़े तकनीकी संस्थानों में छात्रों की सुरक्षा और उनकी मानसिक स्थिति पर गंभीर ध्यान देने की जरूरत है। सरकार और कॉलेज प्रशासन पर अब दबाव बढ़ता जा रहा है कि वे इस मामले की नए सिरे से उच्च स्तरीय जांच बिठाएं।
मोबाइल फोन की लत और बच्चों द्वारा पुलिस में शिकायत
समाज के बदलते दौर और आधुनिक तकनीक के दुष्प्रभावों से जुड़ा एक दिलचस्प मामला उत्तर प्रदेश के शामली जिले से सामने आया है। आजकल माता-पिता अपने बच्चों को मोबाइल फोन की लत से बचाने के लिए तमाम तरह के जतन करते हैं। शामली में भी जब माता-पिता ने अपने बच्चों से जिद्द छुड़ाने के लिए मोबाइल फोन छीन लिया, तो बच्चों ने इसका ऐसा अनोखा विरोध किया कि पुलिस भी हैरान रह गई। बच्चे सीधे थाने पहुंच गए और अपने ही माता-पिता के खिलाफ पुलिस से शिकायत कर दी। उनका कहना था कि उनके माता-पिता ने उनका पढ़ाई और मनोरंजन का साधन छीन लिया है, इसलिए पुलिस उन्हें उनका फोन वापस दिलाए।
इस अजीबोगरीब शिकायत ने स्थानीय पुलिस कर्मियों को भी असमंजस में डाल दिया कि वे इस मामले में क्या कार्रवाई करें। पुलिस ने बच्चों को प्यार से समझाया और काउंसलिंग करके घर वापस भेजा, लेकिन इस घटना ने आज के दौर के सबसे बड़े सच को उजागर कर दिया है। आज के समय में छोटे बच्चों से लेकर बड़ों तक के बीच मोबाइल फोन किस कदर उनकी जिंदगी का अहम हिस्सा बन चुका है, इसका अंदाजा इस घटना से आसानी से लगाया जा सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि डिजिटल युग में माता-पिता और बच्चों के बीच संवाद की कमी और गैजेट्स पर बढ़ती निर्भरता आने वाले समय में एक बहुत बड़ा सामाजिक संकट बन सकती है। जरूरत इस बात की है कि घर-घर में बच्चों को स्क्रीन टाइम सीमित करने के लिए प्यार से समझाया जाए, न कि केवल सख्ती बरती जाए।
सैमसंग फोन की उम्र और तकनीकी बाजार का सच
इन तमाम सामाजिक और प्रशासनिक खबरों के बीच तकनीक के मोर्चे पर भी आम उपभोक्ता लगातार नए सवालों से जूझ रहे हैं। बाजार में जब कोई नया स्मार्टफोन या सैमसंग का फोन आता है, तो ग्राहक अक्सर यही सोचते हैं कि यह डिवाइस कितने साल तक बिना किसी परेशानी के चलेगा। तकनीकी विशेषज्ञों का मानना है कि आज के दौर में कंपनियां सॉफ्टवेयर अपडेट तो दे रही हैं, लेकिन बैटरियों की उम्र और हार्डवेयर की क्षमता सीमित होती जा रही है। ग्राहकों को नया फोन खरीदने से पहले यह जरूर देख लेना चाहिए कि कंपनी कितने साल तक सुरक्षा अपडेट और सॉफ्टवेयर सपोर्ट दे रही है।
बाजार में बढ़ती महंगाई के बीच हर आम आदमी अपने खून-पसीने की कमाई का एक-एक पैसा सोच-समझकर खर्च करना चाहता है। ऐसे में यह जानना बहुत जरूरी हो जाता है कि कोई भी महंगा फोन बदलने से पहले औसतन कितने साल तक सही से काम कर सकता है। जानकारों की सलाह है कि फोन को बार-बार बदलने के बजाय उसकी बैटरी और स्टोरेज की समय पर देखभाल करनी चाहिए ताकि वह लंबे समय तक साथ निभा सके। तकनीक के इस दौर में चाहे प्रशासनिक फोन कॉल्स हों, पुलिस की आधी रात की दबिश हो या फिर बच्चों के हाथ से छीना गया मोबाइल, हर मोर्चे पर तकनीक और संवाद ही आज के दौर की सबसे बड़ी सच्चाई बनकर सामने आ रहे हैं।




