नई दिल्ली/ग्राउंड ब्यूरो — भारतीय रिजर्व बैंक की ताजा मौद्रिक नीति बैठक शुरू होते ही पूरे देश के वित्तीय बाजार की सांसें थम गई हैं। देश के आम आदमी से लेकर बड़े कारोबारियों तक की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि इस बार केंद्रीय बैंक ब्याज दरों को लेकर क्या बड़ा फैसला लेगा। बाजार के जानकारों का मानना है कि महंगाई पर लगाम लगाने के लिए आरबीआई रेपो रेट में पचास से पचहत्तर आधार अंकों तक की भारी बढ़ोतरी कर सकता है। अगर ऐसा हुआ तो आने वाले दिनों में आपका बैंक लोन और महंगा हो जाएगा और हर महीने भरी जाने वाली ईएमआई का बोझ काफी बढ़ जाएगा।
इस बीच, रिजर्व बैंक ने बैंकिंग सिस्टम में नकदी को नियंत्रित करने के लिए एक और बड़ा कदम उठाया है। हाल ही में सामने आए आंकड़ों के मुताबिक, विदेशी मुद्रा अनिवासी योजना के तहत बैंकों के पास करीब चार लाख पैंतालीस हजार करोड़ रुपये की भारी-भरकम अतिरिक्त नकदी जमा थी। इस सरप्लस पैसे में से करीब पचहत्तर हजार करोड़ रुपये से अधिक की बड़ी रकम आरबीआई ने अपने पास वापस मंगा ली है। केंद्रीय बैंक का यह कदम साफ इशारा करता है कि वह बाजार में पैसों के बहाव को धीमा करना चाहता है ताकि बढ़ती महंगाई को तेजी से काबू में लाया जा सके।
महंगे कर्ज का दौर और आपकी जेब पर सीधा असर
ब्याज दरों में होने वाली संभावित बढ़ोतरी का सीधा असर आम आदमी की जेब पर पड़ना तय है। पिछले कुछ महीनों से होम लोन, कार लोन और पर्सनल लोन लेने वाले लोग पहले ही बढ़ी हुई ईएमआई का सामना कर रहे हैं। यदि रेपो रेट में पचास से पचहत्तर बेसिस प्वाइंट की और बढ़ोतरी कर दी जाती है, तो बैंकों के लिए फंड जुटाना महंगा हो जाएगा। बैंक इस बढ़े हुए खर्च का बोझ सीधे अपने ग्राहकों पर डालेंगे। इसका मतलब साफ है कि नया कर्ज लेना महंगा होगा और पुराने लोन चुकाने वाले ग्राहकों को या तो ज्यादा ईएमआई चुकानी होगी या फिर अपने लोन की अवधि बढ़वानी पड़ेगी।
दूसरी ओर, बाजार के जानकारों का यह भी कहना है कि इस स्थिति में कुछ खास निवेश के नए मौके भी बन सकते हैं। जब ब्याज दरें बढ़ती हैं, तो बैंक अपने फिक्स्ड डिपॉजिट और बचत योजनाओं पर मिलने वाला ब्याज भी बढ़ा देते हैं। ऐसे में जो लोग सुरक्षित निवेश करना चाहते हैं, उनके लिए एफडी में पैसे लगाने का यह सही समय साबित हो सकता है। निवेशक अपनी रणनीति में बदलाव करके इस बढ़े हुए ब्याज दर के माहौल का फायदा उठा सकते हैं और सुरक्षित रिटर्न सुनिश्चित कर सकते हैं।
बैंकिंग नियमों में बदलाव और आम खाताधारक की चिंताएं
ब्याज दरों के फेरबदल के साथ-साथ आरबीआई लगातार बैंकों के लिए नए और कड़े नियम भी लागू कर रहा है। हाल ही में जारी किए गए नए दिशा-निर्देशों से आम खाताधारकों के दैनिक बैंकिंग कामकाज पर भी सीधा असर पड़ रहा है। बैंकों को अपनी आंतरिक सुरक्षा, नकदी प्रबंधन और ग्राहकों के खातों के रख-रखाव के मामलों में अब और अधिक सतर्कता बरतनी पड़ रही है। हालांकि आम नागरिकों को शुरुआत में इन नए नियमों के कारण थोड़ी बहुत परेशानी का सामना करना पड़ सकता है, लेकिन लंबी अवधि में यह बैंकिंग प्रणाली को और अधिक मजबूत और सुरक्षित बनाने के लिए बेहद जरूरी है।
द फ्रीलान्स की जमीनी पड़ताल बताती है कि देश के छोटे और मंझोले व्यापारी इस संभावित ब्याज दर वृद्धि को लेकर खासे चिंतित हैं। उनका मानना है कि पहले से ही कच्चे माल की ऊंची कीमतों और कम मांग के बीच कारोबार चलाना मुश्किल हो रहा है। ऐसे में यदि बैंक लोन और महंगे हो गए, तो नए बिजनेस प्रोजेक्ट शुरू करना और पुरानी वर्किंग कैपिटल का प्रबंधन करना बहुत कठिन हो जाएगा। व्यापारी वर्ग अब उम्मीद कर रहा है कि केंद्रीय बैंक विकास की रफ्तार और महंगाई के बीच एक सही संतुलन बनाए रखेगा ताकि अर्थव्यवस्था को मंदी के दौर से बचाया जा सके।
बाजार की नजरें मौद्रिक नीति के फैसलों पर
आने वाले कुछ घंटों में गवर्नर की ओर से घोषित होने वाले नीतिगत फैसले तय करेंगे कि देश का वित्तीय बाजार आने वाले महीनों में किस दिशा में आगे बढ़ेगा। शेयर बाजार भी आरबीआई के इस रुख पर पैनी नजर बनाए हुए है, क्योंकि ब्याज दरों का सीधा असर बैंकिंग, रियल्टी और ऑटोमोबाइल सेक्टर के शेयरों पर पड़ता है। आम जनता से लेकर बड़े निवेशकों तक, हर कोई बस इसी बात का इंतजार कर रहा है कि केंद्रीय बैंक इस बार महंगाई के मोर्चे पर क्या नया हथियार चलाता है।






