मुंबई/ग्राउंड ब्यूरो — भारतीय शेयर बाजार में इस हफ्ते जबरदस्त उठापटक देखी जा रही है। इसी के चलते लाखों छोटे और बड़े निवेशक अपने ऑनलाइन ट्रेडिंग खातों में लगातार लॉगिन कर रहे हैं। बाजार खुलते ही मोबाइल स्क्रीन पर नजरें गड़ाए बैठे लोगों की संख्या अचानक बढ़ गई है। ब्रोकर्स और ट्रेडिंग कंपनियों के सर्वर पर लोड बढ़ने की खबरें आ रही हैं। निवेशक यह देखना चाहते हैं कि उनके पोर्टफोलियो पर ताजा बदलावों का क्या असर पड़ा है। बाजार में आईटी सेक्टर के शेयरों में आई अचानक तेजी ने हर किसी का ध्यान खींचा है। इसके साथ ही देश की दिग्गज कंपनियों के दूसरी तिमाही के वित्तीय परिणाम आने शुरू हो गए हैं। आम खुदरा निवेशक इस समय किसी भी मुनाफे वाले मौके को हाथ से जाने नहीं देना चाहते हैं।
दलाल स्ट्रीट के जानकारों का कहना है कि यह हलचल सिर्फ किसी एक शेयर तक सीमित नहीं है। पिछले कुछ सत्रों में विदेशी निवेशकों की बिकवाली से बाजार में दबाव बना हुआ था। लेकिन अब घरेलू स्तर पर कई सकारात्मक संकेत दिखाई दे रहे हैं। इन्फोसिस, एचसीएल टेक और एचडीएफसी बैंक जैसी दिग्गज कंपनियां अपने तिमाही नतीजे पेश करने जा रही हैं। नतीजों से पहले बाजार में काफी अनुमान लगाए जा रहे हैं। निवेशक यह भांपने की कोशिश कर रहे हैं कि किस कंपनी की कमाई बेहतर रहने वाली है। जब भी नतीजे आने वाले होते हैं, ट्रेडिंग ऐप्स पर सक्रियता कई गुना बढ़ जाती है। लोग अपने ऑर्डर पहले से लगाकर बैठते हैं ताकि कोई मौका न छूटे।
आईटी कंपनियों के शेयरों में जोरदार खरीदारी का दौर
बाजार में पिछले दो दिनों से सबसे ज्यादा चमक सूचना प्रौद्योगिकी यानी आईटी कंपनियों में दिख रही है। अमेरिकी बाजारों से मिले मजबूत संकेतों के बाद भारतीय आईटी शेयरों में जमकर खरीदारी हुई है। टीसीएस के नतीजों के बाद अब बाजार को इन्फोसिस और एचसीएल टेक से काफी उम्मीदें हैं। विश्लेषकों का मानना है कि मंदी की आशंकाओं के बावजूद भारतीय टेक कंपनियों के पास नए सौदे आ रहे हैं। इस उम्मीद ने निवेशकों के भरोसे को मजबूती दी है। सॉफ्टवेयर कंपनियों के शेयरों में तीन से चार फीसदी तक का उछाल दर्ज किया गया है। भारी तेजी के चलते इंट्राडे ट्रेडर्स ने सुबह से ही लगातार ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म्स पर सौदे किए हैं। इस वजह से तकनीकी प्लेटफॉर्म्स पर ट्रैफिक अचानक बढ़ गया है।
दूसरी तरफ इंफ्रास्ट्रक्चर और पावर ट्रांसमिशन से जुड़ी कंपनियों में भी अच्छी हलचल बनी हुई है। केईसी इंटरनेशनल जैसी कंपनियों को नए बड़े ऑर्डर मिलने की खबर से इनके शेयर तेजी से चढ़े हैं। जब किसी कंपनी को बड़ा काम मिलता है, तो उसकी आने वाली तिमाहियों की कमाई सुधरने की उम्मीद बढ़ जाती है। खुदरा निवेशकों ने ऐसे चुनिंदा शेयरों में तेजी देखकर तुरंत पोजीशन बनाना शुरू कर दिया है। डीमार्ट के तिमाही आंकड़े आने के बाद रिटेल सेक्टर के शेयरों पर भी जानकारों की पैनी नजर बनी हुई है। बड़े ब्रोकरेज हाउस लगातार अपनी रिपोर्ट जारी कर रहे हैं, जिससे बाजार में गहमागहमी और बढ़ गई है।
रिजर्व बैंक के विदेशी मुद्रा नियमों का बाजार पर असर
शेयर बाजार के अलावा मुद्रा बाजार में भी कई बड़े बदलाव देखने को मिल रहे हैं। भारतीय रिजर्व बैंक ने हाल ही में विदेशी मुद्रा को लेकर अपने नियमों को सख्त किया है। इस कदम का सीधा मकसद अमेरिकी डॉलर की बढ़ती मांग पर लगाम लगाना है। रुपये को सहारा देने के लिए केंद्रीय बैंक लगातार चौकसी बरत रहा है। रुपये की कमजोरी से आयात महंगा होता है और कंपनियों की लागत बढ़ जाती है। रिजर्व बैंक की सख्ती के बाद रुपये में स्थिरता की उम्मीद बंधी है। इसका सकारात्मक असर शेयर बाजार की धारणा पर भी साफ देखा जा रहा है। विदेशी संस्थागत निवेशक भी इन नियमों के बाद अपनी रणनीतियों में बदलाव कर रहे हैं।
कच्चे तेल की अंतरराष्ट्रीय कीमतों में भी नरमी आने से भारतीय अर्थव्यवस्था को कुछ राहत मिली है। तेल सस्ता होने से देश का आयात बिल घटता है और महंगाई काबू में रहती है। इससे ऑटोमोबाइल, पेंट्स और सीमेंट जैसी कंपनियों को सीधा फायदा पहुंचता है। शेयर बाजार के ट्रेडर इन सभी वैश्विक आंकड़ों को एक साथ जोड़कर देख रहे हैं। जब अर्थव्यवस्था के बुनियादी संकेत मजबूत होते हैं, तो निवेशक जोखिम लेने से नहीं डरते हैं। यही वजह है कि सुबह सवा नौ बजते ही ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म्स पर ऑर्डर्स की बाढ़ आ जाती है। हर कोई मौजूदा तेजी का फायदा उठाकर अपनी पूंजी बढ़ाना चाहता है।
सोने-चांदी के रिकॉर्ड भाव और खुदरा निवेशकों की रणनीति
शेयरों के अलावा कीमती धातुओं के बाजार में भी इस समय अभूतपूर्व तेजी देखने को मिल रही है। घरेलू बाजार में सोना और चांदी अपने रिकॉर्ड स्तरों के करीब कारोबार कर रहे हैं। त्योहारी सीजन के चलते सर्राफा बाजार में मांग काफी ज्यादा बनी हुई है। जो लोग सीधे शेयर बाजार में जोखिम नहीं लेना चाहते, वे कमोडिटी ट्रेडिंग में हाथ आजमा रहे हैं। कई खुदरा ट्रेडर अपने ब्रोकिंग खाते से ही गोल्ड ईटीएफ और चांदी के फ्यूचर कॉन्ट्रैक्ट खरीद रहे हैं। दुनिया भर में जारी भू-राजनीतिक तनाव के कारण निवेशक सोने को सबसे सुरक्षित ठिकाना मान रहे हैं। कमोडिटी सेगमेंट में सक्रियता बढ़ने से भी ऑनलाइन ब्रोकरेज ऐप्स पर ट्रैफिक लगातार ऊंचा बना हुआ है।
वित्तीय सलाहकारों की मानें तो मौजूदा दौर में छोटे निवेशकों को बेहद सतर्क रहने की जरूरत है। बाजार जब भी बहुत तेजी से ऊपर-नीचे होता है, तो नुकसान का जोखिम बढ़ जाता है। किसी भी सोशल मीडिया टिप या अफवाह के चक्कर में आकर बिना सोचे-समझे शेयर न खरीदें। कंपनियों के तिमाही आंकड़े, उनके कर्ज की स्थिति और कामकाज का तरीका देखकर ही निवेश का फैसला लें। जानकारों का कहना है कि सिर्फ ट्रेडिंग ऐप खोलकर बार-बार स्क्रीन देखने से मुनाफा नहीं बनता। सही समय पर सही फैसले लेना और धैर्य रखना ही शेयर बाजार में सफलता की असली कुंजी है।





