द फ्रीलान्स की ग्राउंड इन्वेस्टिगेशन टीम को मिले ताजा और बेहद खास दस्तावेजों के मुताबिक, देश के टेलीकॉम सेक्टर में अब तक के सबसे बड़े वित्तीय बदलाव की जमीन तैयार हो चुकी है। रिलायंस जियो का बहुप्रतीक्षित इनिशियल पब्लिक आफर यानी आईपीओ आगामी 21 अक्टूबर को बाजार में निवेशकों के लिए खुलने जा रहा है। इस ऐतिहासिक कदम के लिए कंपनी ने गुजरात के अहमदाबाद में औपचारिक तौर पर रेड हेरिंग प्रोस्पेक्टस यानी आरएचपी फाइल कर दिया है, जिसके बाद से शेयर बाजार के जानकारों की निगाहें इस पर टिक गई हैं।
इस पूरे मेगा प्रोजेक्ट और कंपनी के रणनीतिक विस्तार की सीधी कमान रिलायंस जियो के चेयरमैन आकाश अंबानी के हाथों में है। आकाश अंबानी की अगुवाई में ही पिछले कुछ हफ्तों से निवेशकों के साथ बंद कमरे में कई दौर की अहम बैठकें हो चुकी हैं। द फ्रीलान्स की टीम ने जब वित्तीय बाजार के जानकारों से बात की, तो यह बात सामने आई कि यह भारत के कॉर्पोरेट इतिहास का सबसे बड़ा शेयर बाजार डेब्यू हो सकता है, जिससे टेलीकॉम से लेकर डिजिटल सर्विसेज तक के बाजार में बड़ा फेरबदल देखने को मिलेगा।
अहमदाबाद में आरएचपी फाइलिंग के क्या हैं मायने?
अहमदाबाद को इस बड़े वित्तीय दस्तावेज की फाइलिंग के लिए चुने जाने के पीछे कंपनी की सोची-समझी रणनीति काम कर रही है। आरएचपी फाइल होने के साथ ही निवेशकों के सामने कंपनी की वित्तीय सेहत, पिछले सालों का मुनाफा, कर्ज की स्थिति और भविष्य की कमाई के तमाम रास्ते पूरी तरह साफ हो गए हैं। जानकारों का मानना है कि जियो के इस कदम से देश के शेयर बाजार में खुदरा और संस्थागत निवेशकों का उत्साह काफी ज्यादा बढ़ जाएगा और एक नया रिकॉर्ड बन सकता है।
बाजार के विश्लेषकों का कहना है कि पिछले कुछ सालों में जियो ने अपने रिचार्ज प्लान्स और डेटा सेवाओं के जरिए देश के कोने-कोने में जो पैठ बनाई है, उसने निवेशकों का भरोसा बहुत मजबूत किया है। कंपनी की प्रति ग्राहक कमाई यानी एआरपीयू में लगातार सुधार देखा गया है, जो इस आईपीओ के लिए सबसे बड़ा प्लस पॉइंट साबित होने जा रहा है। आकाश अंबानी की लीडरशिप में कंपनी ने तकनीक और एआई सेक्टर में भी भारी निवेश किया है, जिसका असर इस आईपीओ के वैल्यूएशन पर साफ नजर आ रहा है।
बाजार और दूसरी कंपनियों पर इसका असर
जियो के इस आईपीओ के मैदान में उतरने से एयरटेल और वोडाफोन-आइडिया जैसी अन्य टेलीकॉम कंपनियों पर भी अपनी रणनीति बदलने का भारी दबाव बन गया है। निवेशकों के बीच इस बात की चर्चा आम है कि जियो के शेयर बाजार में लिस्ट होने से कंपनी को अपने आगामी 5जी और 6जी नेटवर्क विस्तार के लिए बेहिसाब फंड आसानी से मिल जाएगा। आम जनता और छोटे निवेशकों के बीच भी इस बात को लेकर भारी उत्सुकता है कि वे इस आईपीओ में किस तरह से बोली लगा सकते हैं।
द फ्रीलान्स की पड़ताल बताती है कि अक्टूबर के तीसरे हफ्ते में खुलने वाले इस आईपीओ के लिए ब्रोकरेज हाउसों ने अपनी तैयारियां अभी से शुरू कर दी हैं। हालांकि, जानकारों का यह भी कहना है कि निवेशकों को किसी भी कंपनी के शेयर खरीदने से पहले उसके आरएचपी में दी गई वित्तीय बारीकियों को ध्यान से पढ़ लेना चाहिए। आकाश अंबानी के नेतृत्व वाली जियो टीम का यह दांव आने वाले दिनों में भारतीय शेयर बाजार की तकदीर तय करने में सबसे अहम भूमिका निभाने वाला है।
निवेशकों और ग्राहकों के लिए क्या है खास?
इस बड़े आईपीओ के आने से आम ग्राहकों को मिलने वाली डेटा सेवाओं और प्लान्स पर क्या असर पड़ेगा, इसको लेकर भी बाजार में तरह-तरह की चर्चाएं चल रही हैं। कंपनी के अंदरूनी सूत्रों का कहना है कि आईपीओ के जरिए मिलने वाले फंड का एक बड़ा हिस्सा नेटवर्क की क्वालिटी सुधारने और हर गांव तक हाई-स्पीड इंटरनेट पहुंचाने पर खर्च किया जाएगा। द फ्रीलान्स इस पूरे घटनाक्रम पर लगातार अपनी पैनी नजर बनाए हुए है और जैसे ही 21 अक्टूबर की तारीख नजदीक आएगी, हम आपके लिए हर एक बड़े अपडेट की अंदरूनी खबर लाते रहेंगे।


