नई दिल्ली/ग्राउंड ब्यूरो — देश की दिग्गज आईटी कंपनी टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज यानी टीसीएस इन दिनों बड़े अंदरूनी बदलावों के दौर से गुजर रही है। पिछले कुछ हफ्तों में सामने आए घटनाक्रम बताते हैं कि कंपनी ने अपने कामकाज के तौर-तरीकों में बड़ा फेरबदल किया है। एक तरफ जहां कंपनी अपने कर्मचारियों के काम के टारगेट को लेकर काफी सख्त हो गई है, वहीं दूसरी तरफ भविष्य की तकनीक यानी एआई के क्षेत्र में बहुत तेजी से पैर पसारने की तैयारी कर रही है। इन सब के बीच टेक जगत में काम करने के माहौल और संस्कृति को लेकर भी तीखी बहस छिड़ी हुई है।
ताजा रिपोर्टों के मुताबिक, टीसीएस ने उन कर्मचारियों को बड़ा झटका दिया है जो तय किए गए काम के लक्ष्यों को पूरा नहीं कर पा रहे हैं। कंपनी ने साफ कर दिया है कि जो लोग अपने प्रदर्शन के मानकों पर खरे नहीं उतरेंगे, उनकी वेरिएबल पे यानी अतिरिक्त मिलने वाले वेतन पर सीधी कैंची चलाई जाएगी। इस कदम से सुस्त रफ्तार से काम करने वाले कर्मचारियों की मुश्किलें काफी बढ़ गई हैं। प्रबंधन का साफ संदेश है कि कंपनी के बढ़ते कारोबार में हर कर्मचारी को अपनी पूरी क्षमता दिखानी होगी और तय किए गए लक्ष्यों को समय पर हासिल करना होगा।
एआई कारोबार को धार देने के लिए बनेगी नौ हजार इंजीनियरों की टीम
एक तरफ जहां टारगेट पूरा न करने वालों पर गाज गिर रही है, वहीं दूसरी तरफ टीसीएस भविष्य की आधुनिक तकनीकों के लिए अपनी ताकत लगातार बढ़ा रही है। कंपनी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी एआई के कारोबार को दुनिया भर में तेजी से फैलाने की बड़ी योजना पर काम कर रही है। इस योजना के तहत टीसीएस करीब आठ हजार नौ सौ यानी लगभग नौ हजार इंजीनियरों की एक खास टीम तैयार कर रही है। यह टीम आने वाले समय में एआई आधारित प्रोजेक्ट्स पर काम करेगी और ग्राहकों को आधुनिक तकनीकी समाधान उपलब्ध कराएगी। बाजार के जानकारों का मानना है कि ग्लोबल स्तर पर बदलती तकनीकी जरूरतों को पूरा करने के लिए यह एक बहुत बड़ा और जरूरी कदम है।
दूसरी ओर, टाटा समूह के दूसरे शेयरों और कारोबारी समझौतों में भी हलचल तेज है। हाल ही में टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज से डेढ़ हजार करोड़ रुपये से ज्यादा का भारी-भरकम ऑर्डर मिलने के बाद समूह की एक अन्य कंपनी के शेयरों में जबर्दस्त तेजी देखने को मिली है। यह इस बात का सबूत है कि टीसीएस का व्यावसायिक दायरा और उसका नेटवर्क कितना मजबूत है। देश की बड़ी कंपनियों के साथ होने वाले ऐसे बड़े सौदों से पूरे शेयर बाजार में सकारात्मक माहौल बनता है और निवेशकों का भरोसा भी लगातार मजबूत होता चला जाता है।
माइक्रोसॉफ्ट गए कर्मचारी ने खोली पुरानी कंपनी के वर्क कल्चर की पोल
इन अंदरूनी बदलावों के बीच टीसीएस से जुड़ी एक और दिलचस्प चर्चा सोशल मीडिया और टेक मंचों पर चल रही है। टीसीएस की नौकरी छोड़कर माइक्रोसॉफ्ट जाने वाले एक तकनीकी पेशेवर ने दोनों कंपनियों के काम करने के तरीकों में बड़ा अंतर बताया है। उस टेक कर्मचारी का कहना है कि काम की संस्कृति का बदलाव बिल्कुल वास्तविक है और वहां का माहौल टीसीएस के मुकाबले काफी अलग और खुला हुआ है। उसने बताया कि माइक्रोसॉफ्ट जैसी जगहों पर पदानुक्रम यानी सीनियर-जूनियर का दायरा बहुत ज्यादा सख्त नहीं होता और वहां सब कुछ काफी हद तक एक समान यानी फ्लैट होता है, जिससे कर्मचारियों को अपनी बात खुलकर रखने का मौका मिलता है।
इन तमाम खबरों के बीच टीसीएस में कुल कर्मचारियों की संख्या यानी हेडकाउंट को लेकर भी बाजार में लगातार समीक्षा की जा रही है। विश्लेषक इस बात पर नजर बनाए हुए हैं कि कंपनी नई नियुक्तियों और छंटनी के बीच किस तरह संतुलन बिठा रही है। एक तरफ जहां एआई के जानकारों की फौज तैयार की जा रही है, वहीं दूसरी तरफ पुराने कर्मचारियों पर प्रदर्शन का दबाव लगातार बढ़ाया जा रहा है। कुल मिलाकर देखा जाए तो देश की यह सबसे बड़ी आईटी कंपनी खुद को आने वाले समय के हिसाब से ढालने के लिए एक बड़े दौर से गुजर रही है, जिसके असर आने वाले दिनों में साफ दिखाई देंगे।
बाजार और कर्मचारियों पर क्या होगा इसका असर?
टीसीएस के इन फैसलों का असर सीधे तौर पर देश के लाखों आईटी प्रोफेशनल्स पर पड़ रहा है। जो युवा इस क्षेत्र में अपना करियर बना रहे हैं, उनके लिए अब सिर्फ डिग्री या सामान्य कोडिंग आना काफी नहीं होगा। एआई और नई आधुनिक तकनीकों में महारत हासिल करना अब हर इंजीनियर के लिए जरूरी होता जा रहा है। जो कर्मचारी खुद को समय के साथ नहीं बदलेंगे, उनके लिए आने वाला समय काफी चुनौतीपूर्ण हो सकता है।
दूसरी तरफ, निवेशकों और बाजार के जानकारों का मानना है कि टीसीएस का यह आक्रामक रुख कंपनी के मुनाफे के लिए फायदेमंद साबित हो सकता है। वैश्विक बाजार में मुकाबला बहुत कड़ा है और जो कंपनियां समय पर एआई तकनीक को अपना लेंगी, वही आने वाले समय में बाजार पर राज करेंगी। द फ्रीलान्स की इस ग्राउंड पड़ताल से यह साफ है कि आईटी सेक्टर में अब केवल काम चलाना काफी नहीं होगा, बल्कि बेहतरीन प्रदर्शन और आधुनिक तकनीक ही सफलता की एकमात्र चाबी बचेगी।








