हैदराबाद/करमनगर — तेलंगाना में धान की सरकारी खरीद को लेकर प्रशासनिक और राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। राज्य सरकार ने घोषणा की है कि एक अक्टूबर से धान की खरीद का काम सुचारू रूप से शुरू कर दिया जाएगा। इस फैसले के बाद राज्य के किसानों ने राहत की सांस ली है। धान की कटाई के इस सीजन में मंडियों में अपनी फसल बेचने के लिए किसानों को किसी तरह की परेशानी न हो, इसके पुख्ता इंतजाम किए जा रहे हैं।
हालांकि इस बीच राज्य की राजनीति में धान के मुद्दे पर घमासान मचा हुआ है। विभिन्न राजनीतिक दल इस मुद्दे पर एक-दूसरे को घेरने की कोशिश कर रहे हैं। विपक्षी पार्टियां किसानों की समस्याओं और समर्थन मूल्य को लेकर सरकार से तीखे सवाल पूछ रही हैं। राजनीतिक मंचों से लेकर सोशल मीडिया तक धान की खरीद और किसानों के मुनाफे को लेकर बहस छिड़ गई है जिसे स्थानीय स्तर पर ' ' यानी धान की आग कहा जा रहा है।
कLरीमनगर में अनुबंध खेती और हाइब्रिड धान का चलन
एक तरफ जहां राजनीति गरमाई हुई है, वहीं दूसरी तरफ करीमनगर जिले के किसान खेती में नए प्रयोग कर रहे हैं। यहां के किसान अब पारंपरिक तरीकों से आगे बढ़कर हाइब्रिड धान की खेती की ओर बढ़ रहे हैं। इतना ही नहीं, किसान बड़ी कंपनियों और कृषि संगठनों के साथ अनुबंध खेती यानी कॉन्ट्रैक्ट फार्मिंग भी कर रहे हैं। इससे किसानों को अपनी फसल का दाम पहले से तय मिल जाता है और बाजार के उतार-चढ़ाव का खतरा कम हो जाता है।
कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि अनुबंध खेती से किसानों को आधुनिक बीज, खाद और तकनीकी सहायता आसानी से मिल जाती है। इससे फसल की गुणवत्ता भी सुधरती है और बाजार में उसकी मांग बनी रहती है। करीमनगर के किसानों का यह कदम राज्य के बाकी हिस्सों के लिए भी एक मिसाल बनता जा रहा है। किसान अब सिर्फ पारंपरिक धान पर निर्भर न रहकर अधिक मुनाफा देने वाली किस्मों को अपना रहे हैं।
फसल की सुरक्षा और उन्नत पैदावार के नुस्खे
धान की फसल को कीटों और बीमारियों से बचाने के लिए कृषि वैज्ञानिक लगातार नए शोध कर रहे हैं। हाल ही में फ्रंटियर्स की एक रिपोर्ट में धान की फसल में रोग और कीट प्रतिरोधक क्षमता विकसित करने पर जोर दिया गया है। किसान अपनी फसल को सुरक्षित रखने के लिए कृषि विशेषज्ञों की सलाह से आधुनिक कीटनाशकों और उर्वरकों का इस्तेमाल कर रहे हैं।
यूट्यूब और अन्य डिजिटल माध्यमों पर भी किसानों को जागरूक करने वाले वीडियो खूब देखे जा रहे हैं। मसलन, धान में अधिक कल्ले और बंपर पैदावार पाने के लिए ह्यूमसोल जैसे उत्पादों के इस्तेमाल की विधि और सही मात्रा की जानकारी किसान ऑनलाइन ले रहे हैं। डिजिटल खेती के इस दौर में ग्रामीण क्षेत्रों के युवा किसान मोबाइल के जरिए खेती की आधुनिक तकनीक सीख रहे हैं और अपनी पैदावार को दोगुना करने में लगे हैं।
बाजार की स्थिति और किसानों की उम्मीदें
एक अक्टूबर से खरीद शुरू होने के बाद यह देखना अहम होगा कि मंडियों मेंकिसानों को उनकी मेहनत का पूरा दाम कितनी जल्दी मिलता है। सरकार के दावों के मुताबिक इस बार खरीद केंद्रों पर बारदाना, तौल और भुगतान की व्यवस्था को पारदर्शी बनाया गया है। किसानों को उम्मीद है कि उन्हें इस सीजन में बिचौलियों से मुक्ति मिलेगी और उनका धान सीधे न्यूनतम समर्थन मूल्य पर बिकेगा।
द फ्रीलान्स की जमीनी पड़ताल बताती है कि तेलंगाना का किसान इस समय बदलाव के दौर से गुजर रहा है। एक तरफ राजनीति के दांव-पेंच हैं तो दूसरी तरफ तकनीक और अनुबंध खेती के जरिए अपनी आर्थिक स्थिति सुधारने की जिद है। आने वाले कुछ सप्ताह यह तय कर देंगे कि राज्य का कृषि बाजार इन नई व्यवस्थाओं के साथ कितनी तेजी से तालमेल बिठा पाता है।







