नई दिल्ली/ग्राउंड ब्यूरो — सोशल मीडिया के इस दौर में आए दिन अजीबोगरीब ट्रेंड्स और सवाल सामने आते रहते हैं। आजकल इंटरनेट पर एक नया सवाल बहुत तेजी से वायरल हो रहा है कि क्या सुंदर बनने के लिए पाकिस्तानी लड़कियां तुर्की जा रही हैं। इस विषय ने लोगों का ध्यान अपनी ओर खींचा है और हर कोई यह जानना चाहता है कि इसके पीछे की असल सच्चाई क्या है। इंटरनेट पर मौजूद रिपोर्ट्स के मुताबिक, तुर्की इन दिनों मेडिकल टूरिज्म का एक बहुत बड़ा केंद्र बन चुका है। दुनियाभर के देशों से लोग अपनी खूबसूरती को निखारने और कॉस्मेटिक सर्जरी करवाने के लिए तुर्की का सफर कर रहे हैं।
जब हमने इस मामले की गहराई से पड़ताल की तो पता चला कि तुर्की में मिलने वाली मेडिकल सेवाएं और कॉस्मेटिक सर्जरी पश्चिमी देशों के मुकाबले काफी सस्ती पड़ती हैं। इसके अलावा वहां के डॉक्टरों का कौशल और आधुनिक तकनीक भी मरीजों को बहुत आकर्षित करती है। पाकिस्तान और दक्षिण एशिया के दूसरे देशों से भी लोग इलाज के साथ-साथ सौंदर्य से जुड़ी सर्जरी कराने के लिए इस्तांबुल जैसे बड़े शहरों का रुख कर रहे हैं। हालांकि, इसे केवल किसी एक देश या खास वर्ग तक सीमित करके देखना सही नहीं होगा क्योंकि यह एक वैश्विक रुझान है जो पिछले कुछ सालों में बहुत तेजी से बढ़ा है।
तुर्की क्यों बन रहा है मेडिकल और ब्यूटी टूरिज्म का बड़ा गढ़?
तुर्की की राजधानी इस्तांबुल और दूसरे बड़े शहरों में पिछले एक दशक में हेल्थ केयर सेक्टर का विकास बहुत तेजी से हुआ है। सरकार ने भी मेडिकल टूरिज्म को बढ़ावा देने के लिए कई तरह की रियायतें और सुविधाएं दी हैं। यहां पर बालों के प्रत्यारोपण यानी हेयर ट्रांसप्लांट, दांतों की सर्जरी और चेहरे की बनावट से जुड़ी प्लास्टिक सर्जरी बहुत कम खर्च में हो जाती है। यूरोप और अमेरिका के मुकाबले यहां का खर्च आधा या तिहाई रह जाता है, जिससे आम लोगों के लिए भी यह सपने जैसा सच साबित होता है। यही वजह है कि सिर्फ पाकिस्तान ही नहीं बल्कि खाड़ी देशों और पड़ोसी राज्यों से भी लोग बड़ी संख्या में तुर्की पहुंच रहे हैं।
स्थानीय मीडिया रिपोर्ट्स और सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स के जरिए इन इलाजों के नतीजे खूब प्रचारित किए जाते हैं। लोग अपने बदलाव की तस्वीरें और वीडियो इंटरनेट पर शेयर करते हैं, जिन्हें देखकर दूसरे लोगों में भी ऐसी सर्जरी कराने की इच्छा जागती है। टिकट के सस्ते विकल्प और वीजा मिलने की आसान प्रक्रिया ने भी इस सफर को बहुत सरल बना दिया है। मरीज तुर्की में कुछ दिन की छुट्टी और इलाज दोनों का लुत्फ एक साथ उठा लेते हैं, जिसे मेडिकल वेकेशन भी कहा जाता है।
सोशल मीडिया के वायरल ट्रेंड और हकीकत के बीच का फर्क
हर वायरल होने वाली बात पूरी तरह सच हो, ऐसा जरूरी नहीं होता। सोशल मीडिया पर कई बार सनसनीखेज हेडलाइंस बनाकर चीजों को बहुत बड़ा-चढ़ाकर पेश किया जाता है। 'द फ्रीलान्स' की पड़ताल में यह बात सामने आई कि तुर्की जाने वाले लोगों में महिलाओं की संख्या अच्छी खासी है, लेकिन इसे सिर्फ एक देश की महिलाओं तक सीमित करना गलत होगा। इसमें पाकिस्तान, भारत, मध्य पूर्व और पश्चिमी देशों के नागरिक भी शामिल हैं जो अपनी पसंद के हिसाब से कॉस्मेटिक ट्रीटमेंट लेते हैं।
इस पूरे मामले पर जानकारों का मानना है कि सुंदरता और व्यक्तिगत देखभाल को लेकर लोगों की सोच में बड़ा बदलाव आया है। अब लोग अपनी कमियों को दूर करने के लिए सर्जरी का सहारा लेने से कतराते नहीं हैं। तुर्की ने इस बाजार को बहुत समझदारी से पकड़ा है और अंतरराष्ट्रीय मानकों के हिसाब से अपनी सेवाएं दी हैं। हालांकि, किसी भी विदेशी देश में जाकर सर्जरी करवाने से पहले वहां के अस्पतालों की विश्वसनीयता और डॉक्टर के अनुभव की पूरी जांच कर लेनी चाहिए ताकि किसी भी तरह के खतरे से बचा जा सके।











