बॉलीवुड की जानी-मानी अभिनेत्री करीना कपूर खान और साउथ के सुपरस्टार पृथ्वीराज सुकुमारन की नई फिल्म 'दायरा' आखिरकार पर्दे पर आ चुकी है। इस फिल्म को लेकर पिछले काफी समय से दर्शकों के बीच जबरदस्त चर्चा बनी हुई थी। फिल्म की स्टारकास्ट को देखकर हर किसी को यही उम्मीद थी कि यह पर्दे पर एक धमाकेदार और गंभीर सामाजिक मुद्दा लेकर आएगी। हालांकि, सिनेमाघरों में उतरने के बाद इस फिल्म को लेकर मिली-जुली प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं।
करीना और पृथ्वीराज की मजबूत अदाकारी
फिल्म का सबसे मजबूत पक्ष इसके मुख्य कलाकार हैं। करीना कपूर खान ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि वह किसी भी किरदार में पूरी तरह ढल सकती हैं। उनकी स्क्रीन प्रेजेंस और इमोशनल सीन्स दर्शकों को थियेटर में बांधे रखते हैं। वहीं, पृथ्वीराज सुकुमारन ने भी उनके साथ बराबर की टक्कर ली है। दोनों के बीच के आमने-सामने वाले दृश्य फिल्म के सबसे बेहतरीन हिस्सों में गिने जा रहे हैं, जो दर्शकों का ध्यान खींचने में पूरी तरह कामयाब होते हैं।
संबंधित खबरें
कानून और न्याय की बहस में उलझी कहानी
'दायरा' की कहानी मुख्य रूप से न्याय व्यवस्था, व्यक्तिगत विचारधारा और कानून के दायरे के इर्द-गिर्द घूमती है। निर्देशक ने यह दिखाने की कोशिश की है कि जब सही और गलत के बीच की लाइन धुंधली हो जाती है, तब एक आम इंसान या सिस्टम कैसे रिएक्ट करता है। हालांकि, इस भारी-भरकम विषय को पर्दे पर उतारते वक्त लेखक और निर्देशक संतुलन बनाने में थोड़े चूके नजर आते हैं। फिल्म कई जगह कोर्टरूम ड्रामा और वैचारिक भाषणों में उलझ कर रह जाती है।
"सिनेमा समाज का आईना होता है, और जब बड़े कलाकार गंभीर मुद्दों पर बात करते हैं, तो दर्शक कुछ नया देखना चाहते हैं। 'दायरा' में अभिनय का स्तर बेहतरीन है, लेकिन पटकथा थोड़ी और कसी हुई होनी चाहिए थी।" — राहुल वर्मा, फिल्म समीक्षक
कमजोर पटकथा ने बढ़ाई मुश्किलें
भले ही कलाकारों ने अपना शत-प्रतिशत दिया हो, लेकिन फिल्म की सबसे बड़ी कमजोरी इसका ढीला स्क्रीनप्ले है। कहानी कई मौकों पर धीमी हो जाती है और बेवजह लंबी लगने लगती है। जिस रफ्तार से फिल्म शुरू होती है, वह क्लाइमेक्स तक आते-आते अपनी धार खो देती है। कई सीन ऐसे हैं जिन्हें आसानी से काटा जा सकता था, जिससे फिल्म की लंबाई कम होती और कसावट बढ़ती।
संगीत और सिनेमैटोग्राफी का साथ
फिल्म का तकनीकी पक्ष काफी मजबूत है। सिनेमैटोग्राफी ने कहानी के माहौल को पर्दे पर सटीक तरीके से उकेरा है। डार्क और ग्रे टोन वाले शॉट्स फिल्म के गंभीर मिजाज के साथ पूरी तरह न्याय करते हैं। वहीं, बैकग्राउंड म्यूजिक कुछ जगहों पर बहुत असरदार है और तनावपूर्ण दृश्यों का प्रभाव और ज्यादा बढ़ा देता है। गानों को फिल्म की गति के हिसाब से ठीक-ठाक जगह मिली है, जो कहानी में बाधा नहीं बनते।
क्या आपको देखनी चाहिए यह फिल्म?
अगर आप करीना कपूर और पृथ्वीराज सुकुमारन के बहुत बड़े फैन हैं, तो आप इन दोनों की लाजवाब अदाकारी के लिए एक बार सिनेमाघर का रुख कर सकते हैं। लेकिन अगर आप किसी कसी हुई, रोमांचक और बिना किसी झोल वाली थ्रिलर की तलाश में हैं, तो हो सकता है कि यह फिल्म आपको थोड़ी निराश करे। कुल मिलाकर, 'दायरा' एक ऐसी फिल्म है जो अच्छी नीयत के साथ बनाई गई, लेकिन अपनी महत्वाकांक्षाओं के बोझ तले थोड़ी दब गई।






