सोशल मीडिया पर वायरल हुआ गुमराह करने वाला वीडियो
डिजिटल युग में सोशल मीडिया की ताकत जितनी बड़ी है, इसका गलत इस्तेमाल समाज में जहर घोलने के लिए उतनी ही तेजी से किया जा रहा है। इन दिनों इंटरनेट के विभिन्न प्लेटफॉर्म्स पर एक वीडियो धड़ल्ले से शेयर किया जा रहा है। इस वीडियो में कुछ लोगों की भीड़ एक नीले रंग की बहुमंजिला इमारत को बेरहमी से तोड़ती हुई नजर आ रही है। इस क्लिप को शेयर करते हुए दावा किया जा रहा है कि यह भारत के पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता का है। पोस्ट में यह सनसनीखेज कहानी गढ़ी गई है कि एयरपोर्ट परिसर के नजदीक स्थित एक सदी पुरानी धार्मिक इमारत को प्रशासन या उपद्रवियों द्वारा निशाना बनाया गया है।
इस तरह के वीडियो जब सोशल मीडिया पर अपलोड किए जाते हैं, तो लोग बिना सोचे-समझे इन्हें शेयर करने लगते हैं। इससे न केवल आम जनता के बीच गलत संदेश जाता है, बल्कि दो समुदायों के बीच तनाव पैदा होने का गंभीर खतरा भी मंडराने लगता है। 'द फ्रीलांस' की फैक्ट चेक टीम ने जब इस वायरल दावे की तह तक जाने की ठानी, तो जो सच्चाई सामने आई, उसने इस प्रोपेगैंडा की पोल खोलकर रख दी। आइए जानते हैं कि इस पूरे मामले की असलियत क्या है और यह वीडियो कहां से आया है।
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पड़ताल में खुला सच: वीडियो का भारत से दूर-दूर तक नाता नहीं
जब हमारी टीम ने वायरल हो रहे इस वीडियो की बारीकी से जांच की, तो सबसे पहले इसके दृश्यों के कीफ्रेम्स निकालकर डिजिटल टूल्स की मदद से रिवर्स इमेज सर्च किया गया। इस प्रक्रिया के दौरान हमें कई ऐसे लिंक और वीडियो मिले, जिन्होंने इस दावे की धज्जियां उड़ा दीं। यह वीडियो भारत के किसी भी राज्य, शहर या कस्बे का नहीं है, बल्कि यह अंतरराष्ट्रीय सीमा के उस पार यानी हमारे पड़ोसी देश बांग्लादेश की एक घटना से जुड़ा हुआ है।
बांग्लादेश के मीडिया संस्थानों और वहां के स्थानीय पत्रकारों द्वारा साझा की गई रिपोर्ट्स से यह पूरी तरह स्पष्ट हो गया कि इस फुटेज का कोलकाता या भारत के किसी भी हिस्से की किसी मस्जिद से कोई संबंध नहीं है। सोशल मीडिया यूजर्स ने व्यूज और लाइक्स पाने के लिए या फिर जानबूझकर सांप्रदायिक सौहार्द बिगाड़ने के मकसद से इस विदेशी वीडियो को एक स्थानीय भारतीय घटना के रूप में पेश किया है। ऐसी हरकतें डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर नफरत फैलाने का एक पुराना और खतरनाक तरीका बन चुकी हैं, जिस पर लगाम लगाना बेहद जरूरी है।
आखिर क्या है बांग्लादेश के पाबना में हुई उस घटना की असली कहानी?
अब सवाल यह उठता है कि अगर यह वीडियो बांग्लादेश का है, तो वहां असल में क्या हुआ था और इमारत क्यों तोड़ी जा रही थी? मिली जानकारी के अनुसार, यह घटना बांग्लादेश के पाबना उपजिला के अंतर्गत आने वाले कुलुनिया गांव की है। कुछ समय पहले वहां एक दिल दहला देने वाली वारदात सामने आई थी, जहां दस साल की एक मासूम बच्ची के साथ क्रूरता की सारी हदें पार करते हुए दुष्कर्म किया गया और फिर उसकी बेरहमी से हत्या कर दी गई। बच्ची का शव मिलने के बाद पूरे इलाके में कोहराम मच गया था और आम जनता का गुस्सा सातवें आसमान पर पहुंच गया था।
स्थानीय पुलिस ने इस मामले में त्वरित कार्रवाई करते हुए मुख्य आरोपी मुस्तफा प्रमाणिक और उसके एक अन्य सहयोगी को धर दबोचा। जब ग्रामीणों को इस जघन्य अपराध के बारे में पता चला, तो उनका गुस्सा फूट पड़ा। आरोपी के घिनौने कृत्य से आक्रोशित भीड़ ने कानून को अपने हाथ में लेते हुए मुस्तफा के तीन मंजिला मकान पर धावा बोल दिया। वायरल वीडियो उसी मकान में हो रही तोड़फोड़ का है, जहां लोग गुस्से में आकर दरवाजे, खिड़कियां और फर्नीचर को तहस-नहस कर रहे थे। इस आपराधिक घटना का धर्म या भारत में किसी धार्मिक स्थल से दूर-दूर तक कोई लेना-देना नहीं है।
"वायरल वीडियो पूरी तरह से बांग्लादेश के पाबना जिले का है। वहां एक नाबालिग बच्ची के साथ हुए जघन्य अपराध से गुस्साए ग्रामीणों ने आरोपी के घर पर हमला किया था। इस घटना का भारत या कोलकाता की किसी भी मस्जिद से कोई संबंध नहीं है, यह पूरी तरह से एक अफवाह है।" — मोहम्मद राफ्त, स्थानीय पत्रकार, बांग्लादेश
कोलकाता एयरपोर्ट और बांकरा मस्जिद का सच क्या है?
इस फर्जी दावे को फैलाने वालों ने अपनी कहानी में कोलकाता एयरपोर्ट के पास स्थित 136 साल पुरानी बांकरा मस्जिद का भी जिक्र किया है। सच जानने के लिए जब इस एंगल की पड़ताल की गई, तो एक अलग ही प्रशासनिक प्रक्रिया सामने आई। एयरपोर्ट के रनवे के विस्तार और सुरक्षा मानकों को बेहतर बनाने के लिए नेताजी सुभाष चंद्र बोस अंतरराष्ट्रीय (NSCBI) एयरपोर्ट प्राधिकरण द्वारा कुछ क्षेत्रों में बदलाव और शिफ्टिंग का काम किया जा रहा है। इसी सिलसिले में कुछ समय पहले उस पुरानी मस्जिद परिसर में आम लोगों के प्रवेश और वहां नमाज अदा करने पर अस्थायी रूप से रोक लगाई गई थी।
यह पूरी तरह से प्रशासनिक और तकनीकी कारणों से उठाया गया कदम था, जिसके तहत एयरपोर्ट की जमीन पर मौजूद बुनियादी ढांचे को व्यवस्थित किया जा रहा था। हालांकि, किसी भी विश्वसनीय समाचार माध्यम या स्थानीय प्रशासन की रिपोर्ट में इस बात की पुष्टि नहीं हुई कि उस मस्जिद को तोड़ा गया हो या उस पर बुलडोजर चलाया गया हो। शरारती तत्वों ने इसी प्रशासनिक रोक और बांग्लादेश में हुई एक आपराधिक घटना के वीडियो को आपस में जोड़कर एक बेहद खतरनाक और झूठी कहानी गढ़ दी, ताकि देश का माहौल खराब किया जा सके।
निष्कर्ष: अफवाहों से सावधान रहें, सच जानना आपका अधिकार
आज के समय में सोशल मीडिया पर किसी भी वीडियो या फोटो को देखकर तुरंत किसी नतीजे पर पहुंचना खतरनाक हो सकता है। बिना सोचे-समझे फॉरवर्ड किए गए संदेश देश की शांति और सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा बन जाते हैं। कोलकाता एयरपोर्ट के नाम पर बांग्लादेश की एक आपराधिक घटना का वीडियो शेयर करना इसी सोची-समझी साजिश का हिस्सा है। 'द फ्रीलांस' की इस विस्तृत जांच से यह साबित हो गया है कि वायरल दावा सौ फीसदी झूठा और मनगढ़ंत है। पाठकों से अपील है कि ऐसी किसी भी भ्रामक सामग्री को आगे बढ़ाने से बचें और हमेशा आधिकारिक व प्रामाणिक स्रोतों पर ही भरोसा करें। सतर्क रहें, सुरक्षित रहें।







