नई दिल्ली/ग्राउंड ब्यूरो — अमेरिकी शेयर बाजार इस समय दुनिया भर के निवेशकों का ध्यान अपनी ओर खींच रहा है। डाउ जोंस और नैस्डैक जैसे बड़े सूचकांक लगातार नए रिकॉर्ड बना रहे हैं। जानकारों का मानना है कि आने वाले दिनों में कंपनियों के तिमाही नतीजे और महंगाई के आंकड़े बाजार की अगली चाल तय करेंगे। निवेशकों की नजर इस बात पर टिकी है कि अमेरिकी अर्थव्यवस्था आगे किस दिशा में बढ़ती है।
बीते कुछ सत्रों से अमेरिकी बाजारों में लगातार तेजी का माहौल बना हुआ है। नैस्डैक ने अपने पिछले सभी रिकॉर्ड तोड़ते हुए नया शिखर छुआ है। तकनीकी शेयरों में आई जोरदार तेजी के कारण नैस्डैक पहली बार 27600 के ऊपर बंद हुआ। इसके साथ ही डाउ जोंस और एसएंडपी 500 में भी लगातार चौथे दिन मजबूती दर्ज की गई है। बाजार के जानकारों का कहना है कि वैश्विक स्तर पर निवेशकों का भरोसा अभी बना हुआ है।
घरेलू बाजार पर क्या होगा इसका असर
अमेरिकी बाजारों की इस रिकॉर्ड तेजी का असर भारतीय बाजार पर भी पड़ सकता है। लेकिन शुरुआती रुझान थोड़े मिले-जुले नजर आ रहे हैं। गिफ्ट निफ्टी से जहां बाजार के लिए सकारात्मक संकेत मिल रहे हैं, वहीं एशियाई बाजारों में सुस्ती का माहौल भी देखा जा रहा है। ऐसे में आज भारतीय शेयर बाजार की शुरुआत में उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है। जानकारों का कहना है कि कारोबारियों को आज बेहद सावधानी के साथ अपनी पोजीशन बनानी चाहिए।
कच्चे तेल की कीमतों में भी पिछले कुछ दिनों से नरमी बनी हुई है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चा तेल 104 डॉलर प्रति बैरल के नीचे कारोबार कर रहा है। इसके अलावा सोने और चांदी की कीमतों में लगातार मजबूती देखने को मिल रही है। बेस मेटल्स में भी चौतरफा खरीदारी का माहौल है। इन सभी वैश्विक कमोडिटी ट्रेंड्स का सीधा असर भारतीय बाजार की चाल पर भी पड़ रहा है।
महंगाई के आंकड़ों और नतीजों पर टिकी नजर
बाजार के जानकारों का मानना है कि आने वाले दिनों में आने वाले खुदरा महंगाई यानी सीपीआई के आंकड़े बहुत अहम होंगे। इन आंकड़ों से साफ होगा कि केंद्रीय बैंक ब्याज दरों को लेकर आगे क्या फैसला ले सकते हैं। इसके अलावा कंपनियों के तीसरी तिमाही के नतीजे भी बाजार को नई दिशा देंगे। निवेशक हर एक बड़ी खबर पर बारीक नजर बनाए हुए हैं ताकि समय रहते सही निवेश निर्णय ले सकें।
विश्लेषकों का सुझाव है कि मौजूदा वैश्विक हालातों को देखते हुए निवेशकों को बहुत ज्यादा जोखिम उठाने से बचना चाहिए। अमेरिकी बाजार भले ही रिकॉर्ड ऊंचाई पर हैं, लेकिन स्थानीय बाजार की अपनी चुनौतियां हैं। इसलिए मजबूत फंडामेंटल वाली कंपनियों के शेयरों पर ही दांव लगाना समझदारी होगी। द फ्रीलान्स की टीम वैश्विक बाजारों के हर एक अपडेट पर लगातार नजर बनाए हुए है।
कमोडिटी और वैश्विक संकेतों का पूरा गणित
अमेरिकी बाजार के साथ-साथ वैश्विक स्तर पर कमोडिटी बाजार में भी हलचल तेज है। अमेरिकी बाजार में शुक्रवार को मिला-जुला कारोबार देखने को मिला था। सोने और चांदी की कीमतों में लगातार तेजी से निवेशकों का रुझान सेफ हेवन एसेट्स की तरफ बढ़ा है। दूसरी तरफ कच्चे तेल की कीमतों में कमजोरी से अर्थव्यवस्था को थोड़ी राहत मिल सकती है। जानकारों का कहना है कि ये सभी कारक मिलकर वैश्विक वित्तीय बाजार की तस्वीर तय कर रहे हैं।












