सिनेमाघरों में फ्लॉप होने के बाद सामने आया 'महाकाव्य' के मेकर्स का दर्द
भारतीय पौराणिक कथाओं पर आधारित फिल्मों का दौर इन दिनों अपने चरम पर है, लेकिन हर प्रोजेक्ट बॉक्स ऑफिस पर सफलता का स्वाद नहीं चख पा रहा है। हाल ही में रिलीज हुई फिल्म 'महाकाव्य श्री रामायण कथा' बॉक्स ऑफिस पर बुरी तरह असफल साबित हुई। फिल्म की इस निराशाजनक परफॉर्मेंस के बाद अब इसके निर्माता प्रकाश महोबिया ने एक ऐसा सनसनीखेज बयान दिया है, जिससे फिल्म इंडस्ट्री में नई बहस छिड़ गई है। उनका कहना है कि उनकी फिल्म को स्वाभाविक तौर पर दर्शकों की नापसंद का सामना नहीं करना पड़ा, बल्कि इसे सुनियोजित तरीके से नीचे गिराया गया है।
पहली बार बतौर निर्माता फिल्म जगत में कदम रखने वाले प्रकाश महोबिया का मानना है कि उनकी फिल्म को सिनेमाघरों में निष्पक्ष माहौल नहीं मिला। उनका दावा है कि जिन गिने-चुने दर्शकों ने थिएटर्स में जाकर यह फिल्म देखी, उन्होंने इसकी सराहना की। लेकिन बड़े पैमाने पर आम जनता तक यह फिल्म पहुंच ही नहीं पाई, क्योंकि शुरुआत से ही इसके खिलाफ एक मजबूत दीवार खड़ी कर दी गई थी। मेकर्स का अब यह सोचना है कि यदि फिल्म को देखने का मौका ही नहीं मिलेगा, तो दर्शक उसकी गुणवत्ता या खामियों पर अपनी निष्पक्ष राय कैसे कायम कर पाएंगे।
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यूट्यूबर्स और सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स को पैसे देकर बदनाम करने का आरोप
अपने दावों को आगे बढ़ाते हुए प्रोड्यूसर प्रकाश महोबिया ने डिजिटल प्लेटफॉर्म्स और सोशल मीडिया पर चलने वाले ट्रेंड्स पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि उनकी टीम के पास पुख्ता जानकारियां आई हैं कि डिजिटल क्रिएटर्स, यूट्यूबर्स और विभिन्न सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स को इस फिल्म के खिलाफ माहौल तैयार करने के लिए इस्तेमाल किया गया।
उनका सीधा आरोप है कि फिल्म को नुकसान पहुंचाने के लिए सुनियोजित तरीके से पेड नेगेटिव मार्केटिंग का सहारा लिया गया। इसके तहत सोशल मीडिया पर फिल्म की कमियों को इस तरह से उछाला गया कि आम दर्शक सिनेमाघरों का रुख करने से ही कतराने लगे। प्रकाश महोबिया का कहना है कि आज के दौर में सोशल मीडिया की राय बॉक्स ऑफिस के आंकड़ों को सीधे तौर पर प्रभावित करती है, और इसी का फायदा उठाकर उनकी फिल्म को जानबूझकर कमजोर साबित किया गया।
नितेश तिवारी और नमित मल्होत्रा की मेगा-बजट 'रामायण' से सीधी प्रतिस्पर्धा
जब प्रकाश महोबिया से यह सवाल पूछा गया कि इस कथित नेगेटिव कैंपेन के पीछे आखिर किसका हाथ हो सकता है, तो उन्होंने इशारों-इशारों में बड़े नामों की ओर इशारा किया। बाजार में यह चर्चा आम है कि इसी विषय पर बॉलीवुड के जाने-माने निर्देशक नितेश तिवारी और निर्माता नमित मल्होत्रा एक बहुत ही भारी-भरकम बजट वाली फिल्म 'रामायण' बना रहे हैं।
प्रकाश महोबिया का कहना है कि उनकी फिल्म की शूटिंग रणबीर कपूर स्टारर इस बड़ी फिल्म के ऐलान से काफी पहले शुरू हो चुकी थी और उनकी टीम ने अपनी पूरी मेहनत के साथ इसे पूरा किया था। हालांकि, उन्होंने सीधे तौर पर किसी का नाम लेते हुए यह नहीं कहा कि नितेश तिवारी या नमित मल्होत्रा ने खुद ऐसा किया है, लेकिन उन्होंने इतना जरूर जोड़ा कि उन्हें लगातार यही बताया जा रहा है कि बड़ी फिल्म के मेकर्स या उनके सहयोगियों द्वारा बाजार में इस तरह की रणनीति अपनाई गई ताकि छोटी फिल्म रास्ते से हट जाए।
'महाकाव्य श्री रामायण कथा' से जुड़े विवाद और वीएफएक्स की आलोचना
गौरतलब है कि अभिषेक सिंह के निर्देशन में बनी फिल्म 'महाकाव्य श्री रामायण कथा' में अंजलि अरोड़ा, देव शर्मा और अभिनेता रजनीश दुग्गल ने मुख्य भूमिकाएं निभाई हैं। जब फिल्म का कास्टिंग ऐलान हुआ था, तब से ही सोशल मीडिया पर इसे लेकर विवाद शुरू हो गया था। विशेषकर सीता के किरदार के लिए अंजलि अरोड़ा के चयन को लेकर एक वर्ग ने सोशल मीडिया पर कड़ी आपत्ति जताई थी।
इसके अलावा, फिल्म के टीज़र और ट्रेलर रिलीज होने के बाद इसके वीएफएक्स (VFX) और तकनीकी पक्ष की भी जमकर आलोचना हुई थी। रिलीज के बाद दर्शकों ने कई ऐसी कमियां निकालीं, जिसमें एक पोस्टर सबसे ज्यादा चर्चा में रहा, जिसमें कथित तौर पर वानर सेना के एक सदस्य को चश्मा पहने हुए दिखाया गया था। इन तमाम वजहों से फिल्म की शुरुआती आलोचना स्वाभाविक भी मानी जा रही थी, लेकिन मेकर्स का दावा है कि आलोचना से परे जाकर इसे पूरी तरह खारिज कराने का षड्यंत्र रचा गया।
बॉक्स ऑफिस पर आंकड़ों की हकीकत और मेकर्स का अगला कदम
ट्रैकर्स और बॉक्स ऑफिस रिपोर्ट्स के अनुसार, 'महाकाव्य श्री रामायण कथा' सिनेमाघरों में दर्शकों को खींचने में पूरी तरह असफल रही। सैकनिल्क की रिपोर्ट बताती है कि इस फिल्म ने दुनिया भर के बॉक्स ऑफिस पर बमुश्किल केवल 46 लाख रुपये की कमाई की है, जो फिल्म के कुल बजट के सामने ऊंट के मुंह में जीरे के समान है।
तमाम आर्थिक नुकसान और आलोचनाओं के बावजूद, प्रोड्यूसर प्रकाश महोबिया हार मानने के मूड में नहीं हैं। उनका कहना है कि उनके लिए पैसे से ज्यादा महत्वपूर्ण यह है कि दर्शक उनकी फिल्म को देख नहीं पाए। चूंकि उन्हें फिल्म बनाने के बाद इसकी मार्केटिंग और डिस्ट्रीब्यूशन का कोई खास अनुभव नहीं था, इसलिए वह अपनी इस पहली भूल से सीख ले रहे हैं। मेकर्स ने अब यह तय किया है कि वे इस फिल्म को एक बार फिर से सिनेमाघरों में रिलीज करेंगे ताकि जिन दर्शकों तक यह पहले नहीं पहुंच पाई, वे इसे नए सिरे से देख सकें।
फिल्म जगत में इस तरह के आरोप-प्रत्यारोप कोई नई बात नहीं है, लेकिन एक छोटे बजट के निर्माता द्वारा सीधे तौर पर बड़ी फिल्मों के प्रोडक्शन हाउस पर इस तरह के गंभीर आरोप लगाना यह साबित करता है कि आज के समय में बॉक्स ऑफिस की लड़ाई केवल पर्दे पर नहीं, बल्कि डिजिटल गलियारों और पीआर एजेंसियों के बीच भी लड़ी जा रही है। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि मेकर्स की दोबारा रिलीज की यह रणनीति इस फिल्म को कोई राहत दिला पाती है या नहीं।







