नगालैंड की पृष्ठभूमि पर बनी फिल्म 'अंग' (Angh) ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक बहुत बड़ी उपलब्धि हासिल की है। फिल्म के निर्देशक थेजा रियो की यह फीचर डायरेक्टोरियल डेब्यू फिल्म है और इसने टोरंटो इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल (TIFF) 2026 की प्रतिष्ठित प्लेटफॉर्म प्रतियोगिता (Platform Competition) जीत ली है। रविवार को फिल्म को इस प्रतियोगिता का सर्वोच्च पुरस्कार मिला। इस शानदार जीत के साथ 'अंग' ने 2027 के ऑस्कर में इंटरनेशनल फीचर फिल्म कैटेगरी के लिए सीधे पात्रता का रास्ता हासिल कर लिया है।
इस साल TIFF की प्लेटफॉर्म प्रतियोगिता में चुनी गई 'अंग' इकलौती भारतीय फिल्म थी। प्लेटफॉर्म TIFF के प्रमुख प्रतिस्पर्धी सेक्शन में से एक है, जिसे खासतौर पर ऐसे निर्देशकों और फिल्मों के लिए जाना जाता है, जिनकी सिनेमाई भाषा अलग और कहानी कहने का अंदाज विशिष्ट हो। इस साल से प्लेटफॉर्म प्रतियोगिता के विजेता को एकेडमी अवॉर्ड्स की इंटरनेशनल फीचर फिल्म कैटेगरी में विचार के लिए ऑटोमैटिक क्वालिफिकेशन मिलता है, जिससे भारतीय स्वतंत्र सिनेमा के लिए नए द्वार खुल गए हैं।
1960 के दशक के नगालैंड की अनूठी दास्तान
'अंग' की कहानी 1960 के दशक के नगालैंड में सेट है। फिल्म एक उम्रदराज कोन्याक गांव के मुखिया और उसके बेटे के इर्द-गिर्द घूमती है। दोनों उन आखिरी लोगों में शामिल हैं, जो तेजी से बदलती दुनिया के बीच अपनी पुश्तैनी आस्था और जीवनशैली को बचाए रखने की कोशिश कर रहे हैं। थेजा रियो ने इस फीचर फिल्म को अपनी 2021 में आई इसी नाम की शॉर्ट फिल्म से आगे बढ़ाया है।
16mm पर शूट की गई इस फिल्म में स्थानीय स्वदेशी नगा कलाकारों के साथ बाफ्टा विजेता अभिनेता डगलस हेंशल भी नजर आते हैं। फिल्म परंपरा, आस्था, परिवार, स्मृति और बदलते सांस्कृतिक परिवेश जैसे गंभीर विषयों को केंद्र में रखती है। फिल्म का निर्माण नैंसी निसा बेसो और थेजा रियो ने मिलकर किया है।
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निर्देशक और निर्माताओं की जुबानी
फिल्म की जीत के बाद 31 वर्षीय निर्देशक थेजा रियो ने कहा कि यह उनके और फिल्म से जुड़े सभी लोगों के लिए बेहद खास पल है। उन्होंने माना कि किसी डेब्यू फिल्म को इस तरह की अंतरराष्ट्रीय पहचान मिलना दुर्लभ है। रियो के मुताबिक, उन्होंने 'अंग' को उस जगह, अपने लोगों और अपनी संस्कृति के प्रति गहरे प्यार के साथ बनाया है, जहां से वह खुद आते हैं।
फिल्म की निर्माता नैंसी निसा बेसो और एग्जीक्यूटिव प्रोड्यूसर गौरव ढींगरा ने भी इस सफलता पर खुशी जताई है। उनका मानना है कि नगालैंड में जन्मी और स्वदेशी फिल्मकारों द्वारा बनाई गई ऐसी फिल्म, जो एक क्षेत्रीय समुदाय की आवाज को दुनिया के बड़े पर्दे तक पहुंचाती है, भारतीय सिनेमा के लिए एक मील का पत्थर साबित होगी।
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