नई दिल्ली/ग्राउंड ब्यूरो — भारतीय शेयर बाजार में आज जबरदस्त बिकवाली देखने को मिली, जिससे निवेशकों में अफरा-तफरी मच गई। बंबई स्टॉक एक्सचेंज का प्रमुख सूचकांक सेंसेक्स 1147 अंकों की भारी गिरावट के साथ बंद हुआ। वहीं नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी भी लुढ़ककर 22200 के स्तर पर आ गया। कारोबार के दौरान मेटल और हेल्थकेयर सेक्टर के शेयरों में सबसे ज्यादा भगदड़ मची। बाजार के अचानक इस तरह गिरने से छोटे और खुदरा निवेशकों को तगड़ा झटका लगा है। पिछले कुछ हफ्तों से बाजार की चाल लगातार कमजोर बनी हुई है जिससे लोगों की गाढ़ी कमाई खतरे में पड़ गई है।
विश्लेषकों के मुताबिक बाजार में यह गिरावट कोई एक दिन की घटना नहीं है बल्कि पिछले आठ हफ्तों से जारी मंदी का ही परिणाम है। आंकड़ों पर नजर डालें तो पिछले आठ हफ्तों में लगातार बाजार नीचे की तरफ ही फिसला है। इस लंबी गिरावट के दौर में निवेशकों के कुल 8 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा स्वाहा हो चुके हैं। आज के कारोबार में सेंसेक्स का 950 से 1100 अंक तक टूटना और निफ्टी का डेढ़ फीसदी से ज्यादा नीचे आना इस बात का सबूत है कि बाजार पर बिकवाल पूरी तरह हावी हैं। ऐसे हालात में पिछले पच्चीस सालों के ऐतिहासिक आंकड़ों की भी चर्चा होने लगी है जब बाजार में ऐसी लंबी मंदी आई थी।
बाजार में अचानक आई इस बड़ी गिरावट के पांच मुख्य कारण
बाजार के जानकारों का मानना है कि इस भयंकर गिरावट के पीछे कई बड़े कारण हैं। पहला बड़ा कारण वैश्विक बाजारों से मिल रहे कमजोर संकेत और विदेशी निवेशकों द्वारा लगातार पैसा निकालना है। दूसरा कारण कंपनियों के तिमाही नतीजे उम्मीद के मुताबिक न रहना है। तीसरा कारण महंगाई के आंकड़े और ब्याज दरों को लेकर अनिश्चितता बनी रहना है। चौथा कारण बड़े सेक्टरों जैसे मेटल और फार्मा में मुनाफावसूली होना है। पांचवां और आखिरी कारण तकनीकी चार्ट्स पर बाजार का बेहद कमजोर स्थिति में पहुंच जाना है। इन सभी वजहों से निवेशकों का भरोसा डगमगा गया है और वे अपने शेयर बेचने लगे हैं।
बाजार की इस स्थिति पर जब हमने दलाल स्ट्रीट के कुछ स्थानीय कारोबारियों से बात की तो उन्होंने बताया कि छोटे निवेशकों को इस समय बहुत संभलकर चलने की जरूरत है। बाजार में डर का माहौल साफ देखा जा सकता है और लोग समझ नहीं पा रहे हैं कि अपने पोर्टफोलियो को कैसे बचाएं। ताश के पत्तों की तरह बिखर रहे शेयरों के कारण कई मजबूत कंपनियों के भाव भी धड़ाम हो गए हैं। जानकारों का कहना है कि जब तक वैश्विक स्तर पर हालात सामान्य नहीं होते और विदेशी निवेशक दोबारा पैसा लगाना शुरू नहीं करते, तब तक बाजार में ऐसी ही उठापटक बनी रह सकती है।
लगातार आठ हफ्तों की मंदी और निवेशकों की बढ़ती चिंता
पिछले आठ हफ्तों से बाजार का लगातार गिरना इस बात का संकेत है कि मंदी के बादल पूरी तरह मंडराने लगे हैं। इतिहास गवाह है कि पच्चीस साल पहले भी ऐसा दौर आया था जब बाजार लगातार कई हफ्तों तक फिसलता चला गया था। आज की तारीख में सेंसेक्स और निफ्टी दोनों ही निवेशकों की उम्मीदों पर खरे नहीं उतर पा रहे हैं। जिन लोगों ने लॉन्ग टर्म के लिए निवेश किया था, वे भी अब अपने घटते पोर्टफोलियो को देखकर घबरा रहे हैं। हालांकि कुछ एक्सपर्ट्स का यह भी कहना है कि लंबी अवधि के निवेशकों के लिए यह गिरावट अच्छे शेयरों को सस्ते भाव पर खरीदने का मौका भी साबित हो सकती है।
गांव और छोटे शहरों से लेकर बड़े महानगरों तक के छोटे निवेशकों के मन में अब एक ही सवाल है कि बाजार कबसंभलेगा। वित्तीय सलाहकार लोगों को सलाह दे रहे हैं कि वे panic selling यानी डरकर अपने शेयर औने-पौने दामों पर न बेचें। बाजार के इस कठिन समय में धैर्य रखना ही सबसे बड़ा हथियार है। द फ्रीलान्स की टीम लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए है और आने वाले दिनों में यह देखेगी कि क्या बाजार इस निचले स्तर से संभलने की कोई कोशिश करता है या मंदी का यह दौर अभी और लंबा खिंचेगा।
आगे कैसी रहेगी चाल और क्या है जानकारों की सलाह
आने वाले सत्रों में निवेशकों की नजरें रिजर्व बैंक के कदमों और वैश्विक आर्थिक गतिविधियों पर टिकी रहेंगी। जब तक बाजार में कोई बड़ा सकारात्मक ट्रिगर नहीं आता, तब तक बड़ी तेजी की उम्मीद करना बेमानी होगा। निवेशकों को चाहिए कि वे किसी भी अफवाह पर ध्यान न दें और केवल मजबूत फंडामेंटल वाली कंपनियों के शेयरों पर ही भरोसा रखें। द फ्रीलान्स की ग्राउंड पड़ताल बताती है कि बाजार की यह आंधी अभी कुछ दिन और डरा सकती है, इसलिए जोखिम भरे दांव लगाने से फिलहाल बचना ही समझदारी है।



