भारतीय मनोरंजन उद्योग में कई चेहरे आते हैं, लेकिन जो अपनी जड़ों को संभाले रखकर खुद को हर चुनौती में ढाल लेते हैं, वही लंबे समय तक टिकते हैं। अभिनेत्री श्रिया सरन की फिल्मी यात्रा इसी संकल्प की मिसाल है। हरिद्वार के शांत परिवेश से निकलकर दिल्ली के प्रतिष्ठित लेडी श्रीराम कॉलेज (LSR) और फिर हैदराबाद की फिल्म सिटी तक का उनका यह सफर किसी फिल्मी पटकथा जैसा ही दिलचस्प और प्रेरणादायक है। 'द फ्रीलांस' की इस विशेष पड़ताल में जानिए कैसे एक साधारण कॉलेज छात्रा ने अपनी शर्तों पर सिनेमा की दुनिया में अपनी खास पहचान दर्ज कराई।
पढ़ाई की सख्त शर्त और तेलुगु सिनेमा की अनजानी भाषा
श्रिया के परिवार का दूर-दूर तक सिनेमाई दुनिया से कोई नाता नहीं था। उनके पिता एक इंजीनियर और माँ रसायन विज्ञान (केमिस्ट्री) की शिक्षिका थीं। जब कथक नृत्य की पृष्ठभूमि के चलते उन्हें म्यूजिक वीडियो 'थिरकती क्यों हवा' का मौका मिला, तो परिवार ने एक्टिंग को करियर बनाने के बजाय पढ़ाई पूरी करने को प्राथमिकता दी।
- माता-पिता की शर्त: श्रिया को पहली तेलुगु फिल्म 'इष्टम' का ऑफर महज 17 साल की उम्र में मिला। माता-पिता ने साफ कर दिया कि वह अभिनय भले ही करें, लेकिन कॉलेज की पढ़ाई किसी भी कीमत पर अधूरी नहीं रहनी चाहिए।
- हैदराबाद में भाषा की दीवार: दिल्ली से हैदराबाद पहुँचकर शूटिंग के दौरान श्रिया के सामने सबसे बड़ी चुनौती तेलुगु भाषा की थी। शुरुआती दिनों में जब वह डायलॉग बोलने में अटकीं, तो निर्देशक ने कहा कि अगर सही न बोला तो दिल्ली वापस जाना पड़ेगा। पढ़ाई और अभिनय दोनों को बचाने के जुनून में श्रिया ने बिना रुके डायलॉग पूरे किए।
बॉलीवुड में असफलता का स्वीकारनामा और 'सुपरस्टारडम' का दौर
तेलुगु में 'संतोषम' (2002) जैसी हिट देने के बाद श्रिया ने साउथ सिनेमा में तेजी से पहचान बनाई। हालांकि, जब उन्होंने बॉलीवुड की तरफ रुख किया, तो सफर आसान नहीं रहा। 'तुझे मेरी कसम', 'शुक्रिया' और 'मिशन इस्तांबुल' जैसी फिल्में बॉक्स ऑफिस पर वह कमाल नहीं दिखा सकीं, जिसकी उम्मीद थी।
- खुद ली नाकामी की जिम्मेदारी: श्रिया ने हिंदी फिल्मों में असफल होने पर उद्योग या भाग्य को दोष देने के बजाय खुलकर स्वीकार किया कि स्क्रिप्ट चयन में उनसे गलतियां हुईं। इस ईमानदारी ने उन्हें अन्य अभिनेत्रियों से अलग खड़ा किया।
- सफलता का नया अध्याय: रजनीकांत के साथ फिल्म 'शिवाजी: द बॉस' ने श्रिया को पैन-इंडिया स्टार बना दिया। इसके बाद अजय देवगन के साथ 'दृश्यम' फ्रेंचाइजी और एसएस राजामौली की विश्वस्तरीय फिल्म 'आरआरआर' में उनके अभिनय ने साबित कर दिया कि सही विषय और प्रतिबद्धता से ही कोई कलाकार अमर बनता है।
आज श्रिया सरन केवल एक अभिनेत्री नहीं हैं, बल्कि उन तमाम महत्वाकांक्षी युवाओं के लिए एक प्रेरणा हैं जो बिना किसी गॉडफादर के अपनी प्रतिभा, कड़ी मेहनत और अनुशासन के बल पर सिनेमा के कैनवास पर अपनी अलग छाप छोड़ना चाहते हैं।









