नई दिल्ली/मुंबई: 'द फ्रीलांस' की ऑन-ग्राउंड पड़ताल के मुताबिक, कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के बैनر तले मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ देशव्यापी विरोध प्रदर्शनों के तूल पकड़ने के बाद अब बॉलीवुड गलियारों में भी बयानबाजी तेज हो गई है। दिल्ली के जंतर-मंतर से लेकर मुंबई के अगस्त क्रांति मैदान तक हुए इन उग्र प्रदर्शनों, मतदाता सूची में गड़बड़ी के दावों और पुलिस के साथ हुई झड़पों के बीच वरिष्ठ अभिनेता अनुपम खेर खुलकर सामने आए हैं। इंस्टाग्राम पर जारी अपने एक विस्तृत वीडियो संदेश में खेर ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि लोकतंत्र में सरकार से सवाल पूछने और विरोध दर्ज कराने का हक हर नागरिक को है, लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनके परिवार के खिलाफ अभद्र भाषा का प्रयोग तथा महिला पुलिसकर्मियों से बदसलूकी कतई बर्दाश्त नहीं की जा सकती।
विरोध की स्वतंत्रता और गरिमा की सीमाएं
- गाली-गलौज से नहीं बनती बात: अनुपम खेर ने साफ किया कि वैचारिक असहमति और विरोध का अपना स्थान है, लेकिन प्रधानमंत्री जैसे संवैधानिक पद की गरिमा को ठेس पहुंचाना और व्यक्तिगत गालियों का सहारा लेना अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का हनन है।
- महिला पुलिसकर्मियों से बदसलूकी पर नाराजगी: प्रदर्शन के दौरान सुरक्षा बलों और खासकर महिला पुलिसकर्मियों के साथ किए गए उकसावे वाले व्यवहार पर उन्होंने तीखा एतराज जताया।
- कानूनी सबूतों की मांग: चुनाव आयोग पर वोट चोरी और धांधली के आरोप लगाने वालों को आड़े हाथों लेते हुए उन्होंने दो-ूक शब्दों में कहा कि हवा में आरोप लगाने के बजाय संवैधानिक और कानूनी मंचों पर ठोस सबूत पेश किए जाने चाहिए।
अपने संघर्ष के दिनों को याद करते हुए और दादाजी की सीख 'भीगा हुआ आदमी बारिश से नहीं डरता' का हवाला देते हुए खेर ने ट्रोल्स को भी करारा जवाब दिया। उन्होंने कहा कि वे पिछले 12 वर्षों से प्रधानमंत्री मोदी के कार्यों के साक्षी रहे हैं और देश के करोड़ों नागरिकों की इस आस्था का सम्मान होना चाहिए। 'द फ्रीलांस' की इस रिपोर्ट से यह स्पष्ट है कि CJP के इस विवादित आंदोलन के बाद राजनीतिक और सिनेमाई हलकों में ध्रुवीकरण और गहराता जा रहा है, जहाँ एक तरफ कुछ कलाकार प्रदर्शनकारियों के समर्थन में खड़े हैं, वहीं दूसरी तरफ राष्ट्रवादी खेमा खुलकर सरकार के पक्ष में उतर आया है।







