विज्ञापन • ADVERTISEMENT
होम/अंतर्राष्ट्रीय/फ्रांस की सड़कों पर बेकाबू हुआ छात्रों का उग्र आंदोलन: 15 साल के लड़के ने महिला के मुंह में लगाई आग, गृहयुद्ध जैसे हालात
अंतर्राष्ट्रीयपढ़ने में समय: 6 मिनट

फ्रांस की सड़कों पर बेकाबू हुआ छात्रों का उग्र आंदोलन: 15 साल के लड़के ने महिला के मुंह में लगाई आग, गृहयुद्ध जैसे हालात

फ्रांस में शिक्षा व्यवस्था और बजट कटौती के खिलाफ शुरू हुआ स्कूली छात्रों का प्रदर्शन अब हिंसक दंगों में बदल चुका है। पेरिस समेत कई शहरों में आगजनी और तोड़फोड़ के बीच एक 15 साल के लड़के द्वारा महिला के मुंह में आग लगाने की खौफनाक घटना सामने आई है, जिससे पूरे देश में सनसनी फैल गई है।
✍️
नेशनल डेस्क, द फ्रीलांस
राष्ट्रीय संपादकीय ब्यूरो•4 अक्टूबर 2026 • अपडेटेड•18
🌐Read in English →
शेयर करें:
फ्रांस की सड़कों पर बेकाबू हुआ छात्रों का उग्र आंदोलन: 15 साल के लड़के ने महिला के मुंह में लगाई आग, गृहयुद्ध जैसे हालात
📷 फ्रांस की सड़कों पर बेकाबू हुआ छात्रों का उग्र आंदोलन: 15 साल के लड़के ने महिला के मुंह में लगाई आग, गृहयुद्ध जैसे हालात — मुख्य घटनाक्रमफोटो साभार: रॉयटर्स / एजेंसीज़ / सोशल मीडिया

खबर की बड़ी बातें (Key Highlights)

  • फ्रांस में शिक्षा व्यवस्था और बजट में कटौती के खिलाफ छात्रों और शिक्षकों का देशव्यापी उग्र प्रदर्शन जारी है।
  • पेरिस और मार्सिले समेत कई प्रमुख शहरों में हिंसक झड़पें, वाहनों में आगजनी और तोड़फोड़ की घटनाएं सामने आई हैं।
  • एक खौफनाक घटना में 15 वर्षीय उपद्रवी ने एक महिला के चेहरे पर आग झोंक दी, जिससे वह बुरी तरह झुलस गई।
  • हिंसा और अराजकता के बीच सरकार ने सुरक्षा कड़ी कर दी है और हजारों की संख्या में उपद्रवियों को गिरफ्तार किया गया है।

फ्रांस में शिक्षा व्यवस्था के खिलाफ भड़का छात्रों का भारी आक्रोश

यूरोपीय देश फ्रांस इन दिनों गंभीर आंतरिक संकट और जबरदस्त उबाल के दौर से गुजर रहा है। देश की राजधानी पेरिस से लेकर मार्सिले, स्ट्रासबर्ग और लिले जैसे बड़े शहरों तक स्कूली छात्रों का गुस्सा सड़कों पर फूट पड़ा है। स्कूलों में खराब बुनियादी ढांचे, कक्षाओं की कमी, शिक्षकों के रिक्त पदों और हाल ही में घोषित सरकारी बजट में शिक्षा पर खर्च घटाए जाने के विरोध में शुरू हुआ यह आंदोलन अब पूरी तरह से हिंसक दंगों में तब्दील हो चुका है। स्थिति इतनी बिगड़ चुकी है कि कई इलाकों में गृहयुद्ध जैसे हालात पैदा हो गए हैं और आम जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हुआ है।

छात्रों का कहना है कि लंबे समय से उनकी बुनियादी मांगों को नजरअंदाज किया जा रहा है। कक्षाओं में बैठने के लिए पर्याप्त बेंच और कुर्सियां नहीं हैं, कंप्यूटर लैब और तकनीकी संसाधन खराब पड़े हैं तथा शिक्षकों की भारी कमी के कारण पढ़ाई लगातार बाधित हो रही है। इस बीच सरकार द्वारा शिक्षा बजट में उम्मीद के मुताबिक बढ़ोतरी न करने और महंगाई दर से भी कम फंड आवंटित करने के फैसले ने आग में घी का काम किया है। इसके बाद से ही पूरे देश के हाई स्कूलों में विरोध प्रदर्शनों का एक अंतहीन सिलसिला शुरू हो गया, जो अब प्रशासन के नियंत्रण से पूरी तरह बाहर होता नजर आ रहा है।

विज्ञापन • ADVERTISEMENT

प्रदर्शन की आड़ में उपद्रवियों का तांडव और खौफनाक वारदातें

शांतिपूर्ण तरीके से शुरू हुआ छात्रों का यह आंदोलन देखते ही देखते असामाजिक तत्वों और दंगाइयों के हाथों की कठपुतली बन गया। प्रदर्शनों की आड़ में उपद्रवियों ने सार्वजनिक संपत्तियों को निशाना बनाना शुरू कर दिया। फ्रांस के कई शहरों में सड़कों पर खड़ी गाड़ियों को आग के हवाले कर दिया गया, दुकानों में तोड़फोड़ की गई और पुलिसकर्मियों पर पथराव किया गया। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए सुरक्षा बलों को लगातार आंसू गैस के गोले छोड़ने पड़ रहे हैं और भारी तादाद में पुलिस बल तैनात करना पड़ा है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, अब तक हजारों की संख्या में उपद्रवियों को हिरासत में लिया जा चुका है।

इस अराजकता के माहौल के बीच एक ऐसी भयावह घटना सामने आई जिसने मानवता को झकझोर कर रख दिया है। सोशल मीडिया और समाचार चैनलों पर वायरल हो रहे एक खौफनाक वीडियो में देखा जा सकता है कि किस तरह उपद्रवियों ने आतंक का तांडव मचाया। रिपोर्ट के अनुसार, एक 15 साल के कम उम्र के लड़के ने एक महिला के मुंह के पास सीधे तौर पर आग की लपटें छोड़ दीं। यह महिला कथित तौर पर उपद्रवियों से शांति बनाए रखने और इस तरह की हरकतों से बाज आने की अपील कर रही थी। लेकिन भीड़ में शामिल नकाबपोश लड़कों ने उसकी एक नहीं सुनी और उसे बस स्टॉप की तरफ धकेलते हुए उसके चेहरे पर ज्वलनशील पदार्थ से आग लगा दी। गनीमत यह रही कि महिला ने अपने हाथों और शॉपिंग बैग से अपना बचाव करने की कोशिश की, जिससे उसकी जान तो बच गई, लेकिन उसका चेहरा और शरीर झुलस गया।

स्कूलों पर हमले और प्रिंसिपलों को निशाना बनाने की घिनौनी साजिश

छात्र आंदोलन की इस आड़ में सिर्फ आम लोग ही नहीं, बल्कि शिक्षण संस्थानों के प्रमुख भी सुरक्षित नहीं रहे हैं। रॉयटर्स और अन्य प्रमुख समाचार एजेंसियों की रिपोर्ट्स के अनुसार, मार्सिले के विक्टर ह्यूगो हाई स्कूल के प्रिंसिपल पर पेट्रोल छिड़क कर उन्हें जिंदा जलाने की अत्यंत गंभीर और कायराना कोशिश की गई। इस क्रूर हमले में प्रिंसिपल गंभीर रूप से घायल हो गए और उनका अस्पताल में आईसीयू में इलाज चल रहा है। इसके अलावा रूएन और पेटिट-क्वेविली जैसे शहरों में भी स्कूलों के प्रिंसिपलों पर हमले की घटनाएं सामने आईं, जिनमें कई अन्य लोग जख्मी हुए हैं।

इन घटनाओं के बाद शिक्षकों और स्कूल प्रशासनों में भी भारी दहशत का माहौल है। शिक्षकों का कहना है कि स्कूलों में काम करने की स्थिति लगातार बदतर होती जा रही है और सुरक्षा के कोई पुख्ता इंतजाम नहीं हैं। हालांकि, शिक्षकों के संघों ने छात्रों की मांगों का समर्थन करते हुए आने वाले दिनों में और तेज हड़ताल करने की चेतावनी दी है, जिससे सरकार की मुश्किलें और अधिक बढ़ गई हैं।

सरकार और प्रशासन की प्रतिक्रिया, राजनीतिक दलों पर लग रहे गंभीर आरोप

बढ़ते दंगों और हिंसक वारदतों पर फ्रांस सरकार ने बेहद सख्त रुख अपनाया है। देश के गृह मंत्री लॉरेंट नुनेज़ ने सार्वजनिक रूप से इन घटनाओं की कड़ी निंदा करते हुए इसे अस्वीकार्य हिंसा का माहौल करार दिया है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में चेतावनी दी है कि कानून व्यवस्था से खिलवाड़ करने वाले किसी भी शख्स को बख्शा नहीं जाएगा और पुलिस सख्ती से निपटेगी। वहीं, शिक्षा मंत्री एडुआर्ड गेफ्रे का कहना है कि उनकी सरकार के एजेंडे में शिक्षा हमेशा सर्वोच्च प्राथमिकता रही है, लेकिन सीमित संसाधनों और जनसांख्यिकी कारणों से बजट में आंशिक फेरबदल करना पड़ा है।

दूसरी ओर, इस पूरे घटनाक्रम को लेकर देश में राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हो गई है। कई विपक्षी दलों और विश्लेषकों का यह मानना है कि मासूम छात्रों के कंधों का इस्तेमाल करके कुछ राजनीतिक दल और चरमपंथी संगठन अपनी रोटियां सेक रहे हैं। वामपंथी दलों और उग्रवादी संगठनों पर यह गंभीर आरोप लगाए जा रहे हैं कि वे युवाओं को भड़काकर फ्रांस में जानबूझकर अस्थिरता पैदा कर रहे हैं ताकि राजनीतिक लाभ उठाया जा सके।

"यह विरोध प्रदर्शन अब अपनी तय सीमाओं को पार कर चुका है। स्कूलों की समस्याओं के समाधान की आड़ में जो अराजकता और हिंसा फैलाई जा रही है, वह देश की सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा है। दोषियों के खिलाफ सख्त से सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।" — लॉरेंट नुनेज़, गृह मंत्री, फ्रांस

आगामी दिनों में और गहरा सकता है संकट

फ्रांस में वर्तमान हालात बेहद नाजुक बने हुए हैं। एक तरफ जहां छात्र और शिक्षक अपनी खराब होती कार्य दशाओं और सुविधाओं की मांग पर अड़े हुए हैं, वहीं दूसरी तरफ कट्टरपंथी उपद्रवियों और पुलिस के बीच संघर्ष रुकने का नाम नहीं ले रहा है। देश के विभिन्न हिस्सों में शैक्षणिक संस्थान बंद चल रहे हैं और बच्चों की पढ़ाई का भारी नुकसान हो रहा है। विश्लेषकों का मानना है कि यदि सरकार ने जल्द ही कोई ठोस और सर्वमान्य समाधान नहीं निकाला, तो यह छात्र आंदोलन आने वाले दिनों में और अधिक विकराल रूप धारण कर सकता है, जिससे इमैनुएल मैक्रों सरकार की राजनीतिक परेशानियां और बढ़ जाएंगी।

प्रायोजित • SPONSORED
❤️
100% पाठक समर्थित मीडिया

निष्पक्ष व निडर पत्रकारिता को आपका साथ चाहिए

द फ्रीलांस बिना किसी कॉर्पोरेट या राजनीतिक दबाव के जनसरोकार की खबरें आप तक पहुँचाता है। आपका छोटा सा योगदान भी हमारी स्वतंत्रता की ताकत है।

संबंधित खबरें

यूक्रेन पर रूस का भीषण मिसाइल और ड्रोन हमला, राष्ट्रपति पुतिन के जन्मदिन पर हुए हमलों में 4 बच्चों समेत 19 की मौत

यूक्रेन पर रूस का भीषण मिसाइल और ड्रोन हमला, राष्ट्रपति पुतिन के जन्मदिन पर हुए हमलों में 4 बच्चों समेत 19 की मौत

रूस और यूक्रेन के बीच भीषण जंग तेज, ड्रोन हमलों और मिसाइलों से दोनों देशों में भारी तबाही

रूस और यूक्रेन के बीच भीषण जंग तेज, ड्रोन हमलों और मिसाइलों से दोनों देशों में भारी तबाही

मैं डींग नहीं मार रहा, किसी..., नोबेल के लिए भारत-पाकिस्तान का ट्रंप ने फिर लिया नाम

मैं डींग नहीं मार रहा, किसी..., नोबेल के लिए भारत-पाकिस्तान का ट्रंप ने फिर लिया नाम

ट्रंप ने नहीं लिया भारत का नाम, पर नोबेल तो मांग ही लिया; कमेटी को खूब सुनाया

ट्रंप ने नहीं लिया भारत का नाम, पर नोबेल तो मांग ही लिया; कमेटी को खूब सुनाया

देशभर में पुलिस की नई भूमिका: एक तरफ परीक्षा की सख्ती तो दूसरी तरफ इंसानी मदद की नई मिसाल

देशभर में पुलिस की नई भूमिका: एक तरफ परीक्षा की सख्ती तो दूसरी तरफ इंसानी मदद की नई मिसाल

दक्षिण कोरिया में बच्चों के लिए आ रहे हैं सादे स्मार्टफोन, भारत में भी बढ़ी चर्चा

दक्षिण कोरिया में बच्चों के लिए आ रहे हैं सादे स्मार्टफोन, भारत में भी बढ़ी चर्चा

तमिलनाडु के थूथुकुडी में पिछले 24 घंटों में घटी बड़ी घटनाएं, अदालती फैसले से लेकर राजनीतिक प्रदर्शन तक

तमिलनाडु के थूथुकुडी में पिछले 24 घंटों में घटी बड़ी घटनाएं, अदालती फैसले से लेकर राजनीतिक प्रदर्शन तक

भारतीय क्रिकेट चयन समिति के मुखिया अजीत आगरकर पर टिकी हैं सबकी निगाहें

भारतीय क्रिकेट चयन समिति के मुखिया अजीत आगरकर पर टिकी हैं सबकी निगाहें

✍️

नेशनल डेस्क, द फ्रीलांस

सत्यापित संपादकीय डेस्क

राजनीतिक, नीतिगत एवं राष्ट्रीय सरोकार रिपोर्टिंग टीम

द फ्रीलांस की राष्ट्रीय संपादकीय डेस्क देश की राजनीति, संसद, नीतिगत फैसलों, केंद्रीय योजनाओं और जनसरोकार से जुड़े बड़े मुद्दों पर 24/7 निष्पक्ष, तथ्यपरक और खोजी रिपोर्टिंग करती है। यह टीम दोहरे तथ्य-सत्यापन के कठोर सिद्धांतों का पालन करती है। हम निष्पक्ष, सटीक और तथ्यात्मक पत्रकारिता के लिए प्रतिबद्ध हैं। यह समाचार रिपोर्ट विभिन्न प्रमाणित समाचार एजेंसियों, आधिकारिक बयानों और स्थानीय संवाददाताओं से प्राप्त इनपुट के आधार पर तैयार की जाती है।

विज्ञापन • ADVERTISEMENT

संबंधित विजुअल स्टोरीज (Web Stories)

TAP TO VIEW

‘#franceprotests #studentriots #parisnews #internationalnews #thefreelance #worldnews #educationcrisis’ व अंतर्राष्ट्रीय से जुड़ी अन्य बड़ी खबरें

यूक्रेन पर रूस का भीषण मिसाइल और ड्रोन हमला, राष्ट्रपति पुतिन के जन्मदिन पर हुए हमलों में 4 बच्चों समेत 19 की मौतINTERNATIONAL

यूक्रेन पर रूस का भीषण मिसाइल और ड्रोन हमला, राष्ट्रपति पुतिन के जन्मदिन पर हुए हमलों में 4 बच्चों समेत 19 की मौत

7 अक्टू॰20
रूस और यूक्रेन के बीच भीषण जंग तेज, ड्रोन हमलों और मिसाइलों से दोनों देशों में भारी तबाहीINTERNATIONAL

रूस और यूक्रेन के बीच भीषण जंग तेज, ड्रोन हमलों और मिसाइलों से दोनों देशों में भारी तबाही

7 अक्टू॰51
मैं डींग नहीं मार रहा, किसी..., नोबेल के लिए भारत-पाकिस्तान का ट्रंप ने फिर लिया नामINTERNATIONAL

मैं डींग नहीं मार रहा, किसी..., नोबेल के लिए भारत-पाकिस्तान का ट्रंप ने फिर लिया नाम

8 अक्टू॰38
ट्रंप ने नहीं लिया भारत का नाम, पर नोबेल तो मांग ही लिया; कमेटी को खूब सुनायाINTERNATIONAL

ट्रंप ने नहीं लिया भारत का नाम, पर नोबेल तो मांग ही लिया; कमेटी को खूब सुनाया

8 अक्टू॰38
देशभर में पुलिस की नई भूमिका: एक तरफ परीक्षा की सख्ती तो दूसरी तरफ इंसानी मदद की नई मिसालNATIONAL

देशभर में पुलिस की नई भूमिका: एक तरफ परीक्षा की सख्ती तो दूसरी तरफ इंसानी मदद की नई मिसाल

8 अक्टू॰48
दक्षिण कोरिया में बच्चों के लिए आ रहे हैं सादे स्मार्टफोन, भारत में भी बढ़ी चर्चाTECH-AUTO

दक्षिण कोरिया में बच्चों के लिए आ रहे हैं सादे स्मार्टफोन, भारत में भी बढ़ी चर्चा

8 अक्टू॰44
तमिलनाडु के थूथुकुडी में पिछले 24 घंटों में घटी बड़ी घटनाएं, अदालती फैसले से लेकर राजनीतिक प्रदर्शन तकNATIONAL

तमिलनाडु के थूथुकुडी में पिछले 24 घंटों में घटी बड़ी घटनाएं, अदालती फैसले से लेकर राजनीतिक प्रदर्शन तक

8 अक्टू॰33
भारतीय क्रिकेट चयन समिति के मुखिया अजीत आगरकर पर टिकी हैं सबकी निगाहेंSPORTS

भारतीय क्रिकेट चयन समिति के मुखिया अजीत आगरकर पर टिकी हैं सबकी निगाहें

8 अक्टू॰43
विज्ञापन • ADVERTISEMENT