ईरान के साथ जारी संघर्ष के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति का बड़ा बयान
मिडिल-ईस्ट में पिछले कई महीनों से जारी भीषण तनाव के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बड़ा बयान दिया है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि वह ईरान के खिलाफ किसी भी स्थिति में परमाणु हथियारों का इस्तेमाल नहीं करेंगे। इसके साथ ही उन्होंने ईरान की धरती पर अमेरिकी सैनिकों को पैदल उतारने की संभावना को भी पूरी तरह से खारिज कर दिया है। ट्रंप का यह बयान ऐसे समय में सामने आया है जब दोनों देशों के बीच तनातनी लगातार बढ़ती जा रही है और अमेरिकी सैन्य रणनीतिकार नए विकल्पों पर विचार कर रहे हैं।
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, अमेरिकी राष्ट्रपति ने न्यूजमैक्स को दिए एक साक्षात्कार में कहा कि अमेरिका को ईरान के खिलाफ परमाणु शक्ति का सहारा लेने की कोई आवश्यकता नहीं है। उनके मुताबिक, अमेरिका के पास पारंपरिक हथियारों का ऐसा जखीरा मौजूद है जो बड़े पैमाने पर तबाही मचाने में सक्षम है। जब उनसे यह पूछा गया कि क्या युद्ध के मैदान में अमेरिकी सैनिकों को जमीन पर भेजा जाएगा, तो उन्होंने साफ किया कि फिलहाल ऐसा कोई इरादा नहीं है और उन्हें निकट भविष्य में ऐसा होता हुआ नहीं दिखाई देता है।
पिकैक्स माउंटेन और परमाणु ठिकानों पर अमेरिकी सेना की नजर
भले ही राष्ट्रपति ट्रंप ने परमाणु हथियारों के इस्तेमाल से इनकार कर दिया हो, लेकिन पेंटागन और अमेरिकी सैन्य योजनाकार ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई के नए और आक्रामक विकल्प तैयार करने में जुटे हैं। सीएनएन की एक रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिकी सेना ईरान के ऊर्जा बुनियादी ढांचे और परमाणु केंद्रों पर हमले की योजना को अंतिम रूप दे रही है। इन प्रस्तावित निशानों में ईरान का अत्यधिक सुरक्षित माना जाने वाला पिकैक्स माउंटेन भी शामिल है, जहां कथित तौर पर गुप्त रूप से परमाणु गतिविधियां संचालित की जा रही हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि पिछले कुछ महीनों की बमबारी के बाद भी ईरान के परमाणु कार्यक्रम को पूरी तरह से रोका नहीं जा सका है। ईरानी परमाणु सुविधाएं पहाड़ों के भीतर गहराई में स्थित हैं, जिससे उन्हें साधारण हमलों से नुकसान पहुंचाना बेहद कठिन रहा है। यही वजह है कि अमेरिकी प्रशासन अब पहाड़ों को भेदने वाले और अधिक शक्तिशाली पारंपरिक हथियारों के इस्तेमाल पर विचार कर रहा है ताकि तेहरान को परमाणु हथियार हासिल करने से रोका जा सके।
क्या है 'मदर ऑफ ऑल बॉम्ब्स' और कितनी है इसकी ताकत
इस पूरी सैन्य रणनीति के केंद्र में अमेरिका का सबसे बड़ा गैर-परमाणु बम है, जिसे आधिकारिक तौर पर GBU-43/B मैसिव ऑर्डनेंस एयर ब्लास्ट (MOAB) कहा जाता है। आम बोलचाल की भाषा में इसे 'मदर ऑफ ऑल बॉम्ब्स' के नाम से जाना जाता है। इस विशालकाय पारंपरिक बम का वजन करीब 21,600 पाउंड यानी लगभग 10 टन है। इसमें भारी मात्रा में विस्फोटक सामग्री भरी होती है, जो जमीन से कुछ ऊपर हवा में विस्फोट कर के विशाल क्षेत्र को नेस्तनाबूद कर सकती है।
हालांकि, सैन्य जानकारों और रक्षा विश्लेषकों के मन में इस बात को लेकर संशय बना हुआ है कि क्या यह बम पहाड़ों की गहरी परतों और चट्टानों के नीचे छिपे ठिकानों को नष्ट करने में सक्षम है या नहीं। अमेरिकी अधिकारियों ने स्वीकार किया है कि MOAB मुख्य रूप से सतह पर भारी तबाही मचाने के लिए डिजाइन किया गया है, और ग्रेनाइट की मजबूत परतों के नीचे दबी गुप्त परमाणु सुविधाओं को भेदने के मामले में इसकी क्षमता सीमित हो सकती है।
"नहीं, मैं परमाणु हथियारों का इस्तेमाल नहीं करूंगा। हमें इसकी बिल्कुल भी जरूरत नहीं है। मदर ऑफ ऑल बॉम्ब्स कोई परमाणु हथियार नहीं है, यह एक बेहद शक्तिशाली पारंपरिक बम है जो बड़े इलाके को साफ कर सकता है।" — डोनाल्ड ट्रंप, अमेरिकी राष्ट्रपति
राजनीतिक दबाव और मध्यावधि चुनावों की पृष्ठभूमि
इस पूरे घटनाक्रम के पीछे अमेरिकी राजनीति और आगामी मध्यावधि चुनावों का भी बड़ा हाथ माना जा रहा है। अमेरिका में नवंबर की शुरुआत में मध्यावधि चुनाव होने वाले हैं, और राष्ट्रपति ट्रंप की लोकप्रियता पर भी घरेलू स्तर पर दबाव देखा जा रहा है। कई रिपब्लिकन नेताओं और रणनीतिकारों को इस बात का डर सता रहा है कि मध्य पूर्व का यह लंबा और खर्चीला युद्ध अमेरिकी मतदाताओं के बीच अलोकप्रिय साबित हो सकता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि अमेरिकी प्रशासन के भीतर एक वर्ग ऐसा भी है जो बिना किसी बड़े जमीनी युद्ध में उलझे, केवल हवाई हमलों के जरिए अपनी ताकत का प्रदर्शन करना चाहता है। यह तरीका ट्रंप प्रशासन को ईरान के खिलाफ आक्रामक रुख दिखाने का मौका भी देगा और साथ ही उन्हें इस संघर्ष से सम्मानजनक तरीके से बाहर निकलने का रास्ता भी प्रदान कर सकता है।
युद्ध के कूटनीतिक और क्षेत्रीय परिणाम
ईरान और अमेरिका के बीच जारी इस तनातनी का असर केवल दोनों देशों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका सीधा प्रभाव पूरे मध्य पूर्व क्षेत्र की अर्थव्यवस्था और सुरक्षा पर पड़ रहा है। ईरान ने अपनी रक्षा तैयारियों को और अधिक मजबूत कर लिया है और खाड़ी देशों के समुद्री मार्गों पर अपनी गश्त बढ़ा दी है। होर्मुज, फारस और ओमान की खाड़ी जैसे रणनीतिक जलमार्गों पर लगातार तनाव बना हुआ है, जहां से दुनिया भर का एक बड़ा हिस्सा तेल आपूर्ति प्राप्त करता है।
दूसरी ओर, तेहरान का स्पष्ट रुख है कि वह किसी भी बाहरी दबाव के आगे झुकने को तैयार नहीं है। ईरान का दावा है कि उसका परमाणु कार्यक्रम पूरी तरह से शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए है, जबकि पश्चिमी देश इसे परमाणु हथियार बनाने की कोशिश करार देते हैं। बहरहाल, अमेरिका द्वारा नए हमलों की योजना बनाए जाने से क्षेत्र में शांति की उम्मीदें फिलहाल धुंधली पड़ती नजर आ रही हैं और आने वाले दिनों में यह संकट और अधिक गंभीर हो सकता है।







