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लाइफस्टाइलपढ़ने में समय: 3 मिनट

वीडियो: मेले में गुब्बारे बेचने वाले ने खोला कमाई और खर्च का पूरा गणित, बताया कैसे चलता है इनका सिस्टम

सोशल मीडिया पर मेले में गुब्बारे बेचने वाले एक शख्स का वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें उसने अपनी कमाई और मेले के अंदर दुकान लगाने के कड़े नियमों का खुलासा किया है। ब्रजमोहन नाम के इस शख्स ने बताया कि कैसे उसे भारी कमीशन से बचने के लिए मेले के बाहर अपनी दुकान लगानी पड़ती है।
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लाइफस्टाइल एवं स्वास्थ्य डेस्क, द फ्रीलांस
स्वास्थ्य व वेलनेस डेस्क•16 अक्टूबर 2026 • अपडेटेड•49
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वीडियो: मेले में गुब्बारे बेचने वाले ने खोला कमाई और खर्च का पूरा गणित, बताया कैसे चलता है इनका सिस्टम
📷 वीडियो: मेले में गुब्बारे बेचने वाले ने खोला कमाई और खर्च का पूरा गणित, बताया कैसे चलता है इनका सिस्टम — मुख्य घटनाक्रमफोटो साभार: रॉयटर्स / एजेंसीज़ / सोशल मीडिया

खबर की बड़ी बातें (Key Highlights)

  • मेले के अंदर गुब्बारा बेचने के लिए देना पड़ता है भारी कमीशन, एक दिन का किराया 1500 रुपये तक होता है।
  • उत्तर प्रदेश के संभल के रहने वाले ब्रजमोहन अलग-अलग शहरों में लगने वाले मेलों में घूम-घूमकर गुब्बारे बेचते हैं।
  • बाहर दुकान लगाने के लिए भी स्थानीय स्तर पर 300 से 500 रुपये तक चुकाने होते हैं, जिससे रोजाना 1000 से 2000 रुपये तक की कमाई हो जाती है।

इन दिनों नवरात्रि, दशहरा और रामलीला के अवसर पर देश के अलग-अलग हिस्सों में बड़े मेलों का आयोजन किया जा रहा है। इन मेलों में झूले, खिलौने, चाट-पकौड़े और तरह-तरह की दुकानें सजी होती हैं। इनके बीच मेले में घूम-घूमकर गुब्बारे बेचने वाले लोग भी नजर आते हैं। जब ये गुब्बारे वाले हमसे एक बैलून खरीदने की रिक्वेस्ट करते हैं, तो कई बार हम उन्हें नजरअंदाज कर आगे बढ़ जाते हैं। हमें लगता है कि यह बहुत आसान काम है, लेकिन असलियत इससे काफी अलग होती है।

मेले के बाहर और अंदर का कड़वा सच

मेले में भीड़ देखकर ऐसा लगता है कि गुब्बारे बेचने वालों की बंपर कमाई होती होगी, लेकिन मेला ग्राउंड के अंदर प्रवेश करना या वहां दुकान लगाना बिल्कुल भी आसान नहीं होता। इसके लिए इन्हें भारी-भरकम रकम चुकानी पड़ती है। अगर कोई वेंडर मेला परिसर के अंदर दुकान लगाए, तो उसे भारी कमीशन देना पड़ता है। यही वजह है कि कई वेंडर मेला ग्राउंड के बाहर ही अपनी अस्थायी दुकानें सजाते हैं। हालांकि, बाहर भी स्थानीय स्तर पर पुलिस, मेला ऑर्गेनाइजर या बाजार समिति को 300 से 500 रुपये देने होते हैं।

नोएडा स्टेडियम में लगे रामलीला मेले के बाहर मिले ब्रजमोहन नाम के एक गुब्बारा विक्रेता ने अपनी जिंदगी का पूरा गणित समझाया। मूलरूप से संभल के रहने वाले ब्रजमोहन ने बताया कि वह सालभर सिर्फ मेलों में ही काम करते हैं। मेरठ, बुलंदशहर, अलीगढ़, दिल्ली और नोएडा जैसे शहरों में जहां भी मेला लगता है, वह वहां पहुंच जाते हैं। उन्होंने बताया कि स्टेडियम के अंदर गुब्बारा बेचने के लिए एक दिन का 1500 रुपये कमीशन मांगा जाता है, जो उनकी क्षमता से बाहर है। इसलिए वे बाहर ही मात्र 300 रुपये देकर सड़क किनारे दुकान लगाते हैं।

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दिनभर की मेहनत और रोजाना की कमाई

ब्रजमोहन दिनभर गुब्बारों में हवा भरने और उन्हें सजाने का काम करते हैं। इसके बाद शाम होते ही जब मेला परवान चढ़ता है, तो वे रात 10-11 बजे तक गुब्बारे और छोटे-मोटे खिलौने बेचते हैं। वे एक जोड़ा गुब्बारा 50 रुपये में बेचते हैं। उनकी रोजाना की कमाई 1000 से 1500 रुपये तक होती है, और कभी-कभी अच्छे दिन पर यह आंकड़ा 2000 से 2500 रुपये तक पहुंच जाता है।

अगली बार जब आप किसी मेले के गेट पर आएं और कोई गुब्बारे वाला आपसे एक बैलून खरीदने का आग्रह करे, तो उसकी इस लंबी जद्दोजहद और मेहनत को जरूर याद रखें। वे सिर्फ पैसे कमाने के लिए ही नहीं, बल्कि अपनी आजीविका चलाने के लिए इन तमाम औपचारिकताओं से गुजरते हैं।

डिस्क्लेमर एवं साभार

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर वायरल इस वीडियो के दावों की सत्यता की 'The Freelance' स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं करता है। यह वीडियो सोशल मीडिया पर व्यापक चर्चा का विषय बना हुआ है। वीडियो साभार: संबंधित सोशल मीडिया हैंडल / क्रिएटर।

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