दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे पर टला नहीं हादसों का सिलसिला, कोटा में गहरी खाई में गिरा श्रद्धालुओं से भरा वाहन
देश के सबसे आधुनिक और तेज गति वाले एक्सप्रेसवे में शुमार दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे एक बार फिर खून से सन गया। राजस्थान के कोटा जिले के सीमलिया थाना क्षेत्र के अंतर्गत शनिवार की सुबह एक ऐसा दर्दनाक सड़क हादसा हुआ जिसने कई परिवारों की खुशियों को पलभर में मातम में बदल दिया। मध्य प्रदेश से धार्मिक यात्रा पर निकले श्रद्धालुओं से भरी एक तेज रफ्तार ट्रैवलर गाड़ी अचानक अनियंत्रित हो गई और सड़क के किनारे बनी पुलिया की रेलिंग तोड़ते हुए करीब 20 फीट नीचे बरसाती नाले में जा गिरी। टक्कर इतनी भयानक थी कि वाहन का अगला हिस्सा पूरी तरह चकनाचूर हो गया और भीतर बैठे यात्रियों को संभलने का मौका तक नहीं मिला।
प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, हादसे की गूंज इतनी तेज थी कि आसपास के ग्रामीण तुरंत मदद के लिए दौड़ पड़े। शुरुआती जानकारी के अनुसार, इस वाहन में मध्य प्रदेश के बैतूल और भोपाल के रहने वाले श्रद्धालु सवार थे जो परिवार के साथ राजस्थान के प्रसिद्ध खाटूश्याम जी मंदिर में दर्शन करने जा रहे थे। रास्ते में सुबह के वक्त हुए इस भीषण हादसे ने हर किसी को झकझोर कर रख दिया है। घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस प्रशासन और राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) की राहत एवं बचाव टीमें तुरंत मौके पर पहुंच गईं।
अंधेरे और कीचड़ के बीच चलाना पड़ा रेस्क्यू ऑपरेशन, खिड़कियां तोड़कर बाहर निकाले गए फंसे यात्री
हादसा शनिवार तड़के सुबह करीब छह से सात बजे के बीच हुआ। जिस समय वाहन नाले में गिरा, वहां चारों तरफ सुबह का अंधेरा छाया हुआ था और नाले में पानी के साथ गहरा कीचड़ भी भरा हुआ था। अंधेरा और गहराई अधिक होने के कारण शुरुआती राहत और बचाव कार्यों में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ा। स्थानीय ग्रामीणों और पुलिसकर्मियों ने मिलकर भारी मशक्कत के बाद बचाव अभियान शुरू किया। वाहन के दरवाजे और खिड़कियां बुरी तरह फंस चुकी थीं, जिन्हें क्रेन और कटर की मदद से तोड़कर अंदर फंसे यात्रियों को बाहर निकाला गया।
दुर्भाग्यवश, इस भीषण दुर्घटना में आठ यात्रियों की मौके पर ही दर्दनाक मौत हो गई, जबकि सत्रह से अधिक लोग गंभीर रूप से घायल हो गए। कई यात्रियों के सिर में गंभीर चोटें आई हैं और कुछ के हाथ-पैर की हड्डियां भी टूट गई हैं। स्थानीय लोगों ने बताया कि वाहन के भीतर कई शव सीटों के बीच बुरी तरह फंस गए थे, जिन्हें निकालने के लिए बचाव दल को घंटों कड़ी मेहनत करनी पड़ी। घायलों को तुरंत एंबुलेंस के जरिए कोटा के नए मेडिकल कॉलेज अस्पताल और एमबीएस अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उनका इलाज जारी है।
प्रशासन और अस्पताल प्रशासन की तत्परता, घायलों के इलाज के लिए विशेष मेडिकल टीम तैनात
हादसे की गंभीरता को देखते हुए जिला प्रशासन पूरी तरह मुस्तैद नजर आया। कोटा के जिला कलेक्टर पीयूष सामरिया और कोटा रेंज के पुलिस महानिरीक्षक (IG) हरेंद्र महावर तुरंत एमबीएस अस्पताल पहुंचे और वहां भर्ती कराए गए घायलों की स्थिति का जायजा लिया। कलेक्टर ने मीडिया से बातचीत करते हुए इस दुर्घटना में आठ लोगों की मौत की आधिकारिक पुष्टि की है। अस्पताल प्रशासन के अनुसार, कई घायल यात्री बेहोशी की हालत में लाए गए थे, जिन्हें तुरंत ऑक्सीजन सपोर्ट और सीपीआर देकर स्थिर करने का प्रयास किया गया।
"दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे पर हुए इस दुखद सड़क हादसे में आठ लोगों की जान चली गई है। सभी घायलों को तुरंत अस्पतालों में भर्ती कराकर बेहतरीन चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। प्रशासनिक टीमें लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं और मृतकों के परिजनों से संपर्क साधा जा रहा है।" — पीयूष सामरिया, जिला कलेक्टर, कोटा
अस्पताल के डॉक्टरों ने बताया कि अधिकतर घायलों को सिर और शरीर के अंदरूनी हिस्सों में गहरी चोटें आई हैं क्योंकि वाहन जब नाले में गिरा तो यात्री सीटों के बीच आपस में टकरा गए थे। मृतकों और घायलों की पहचान सुनिश्चित कर ली गई है और उनके परिजनों को इस हृदयविदारक घटना की सूचना दे दी गई है। इस दुखद समाचार के बाद मृतकों के पैतृक गांवों में शोक की लहर दौड़ गई है।
ड्राइवर को झपकी आने की आशंका, एक्सप्रेसवे पर सुरक्षा और गति नियंत्रण को लेकर खड़े हुए गंभीर सवाल
प्राथमिक पुलिस जांच और चश्मदीदों के बयानों के आधार पर अंदेशा जताया जा रहा है कि यह हादसा ड्राइवर को सुबह के वक्त आई नींद की झपकी के कारण हुआ। लगातार लंबी दूरी तय करने के बाद सुबह के समय अक्सर ड्राइवरों को थकान और झपकी की समस्या हो जाती है, जिससे तेज रफ्तार वाहनों पर से नियंत्रण छूट जाता है। हालांकि, हादसे के वास्तविक कारणों की तकनीकी और फोरेंसिक जांच अभी जारी है। पुलिस और परिवहन विभाग इस बात की भी पड़ताल कर रहे हैं कि क्या वाहन तय गति सीमा से अधिक रफ्तार पर चल रहा था।
इस दुर्घटना ने एक बार फिर देश के एक्सप्रेसवे पर होने वाली तेज रफ्तार की घटनाओं और सुरक्षा मानकों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। वाहन चालकों की जरा सी लापरवाही और थकान किस तरह दर्जनों परिवारों की जिंदगीभर का दर्द दे सकती है, यह हादसा इसका जीता-जागता उदाहरण है। प्रशासन ने एक बार फिर लंबी यात्रा करने वाले वाहन चालकों से अपील की है कि वे सफर के दौरान पर्याप्त विश्राम करें और गति सीमा का कड़ाई से पालन करें ताकि ऐसी अमूल्य जिंदगियों को बचाया जा सके।












