कॉकपिट के भीतर मौत का साया और वो खौफनाक चंद सेकंड
आसमान की बुलंदी पर उड़ रहे एक कमर्शियल विमान के भीतर जब अप्रत्याशित संकट मंडराता है, तो पायलट की सूझबूझ ही सैकड़ों यात्रियों की जिंदगी तय करती है। फ्लाईदुबई की एक उड़ान के दौरान कुछ ऐसा ही खौफनाक मंजर सामने आया था, जिसने पूरी दुनिया के उड्डयन जगत को झकझोर कर रख दिया था। इस खतरनाक घटना के कई हफ्ते बीत जाने के बाद, भारतीय कैप्टन स्मित मच्छार ने उन खौफनाक पलों को याद किया है जब उन्हें अपनी जिंदगी खत्म होती नजर आ रही थी। विमान के कॉकपिट के भीतर अचानक हुए इस हमले ने चालक दल और यात्रियों की सांसे रोक दी थीं।
घटना की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि विमान चंद सेकंड के भीतर आसमान से भारी गोता लगाते हुए हजारों फीट नीचे आ गया था। कैप्टन स्मित मच्छार इस अप्रत्याशित हमले में गंभीर रूप से घायल हो गए थे और फिलहाल संयुक्त अरब अमीरात के अबू धाबी में उनका इलाज चल रहा है। शारीरिक और मानसिक रूप से उस सदमे से उबरने की कोशिश कर रहे मच्छार ने हाल ही में मीडिया से बातचीत में उन डरावनी यादों को ताजा किया है। उन्होंने बताया कि उस वक्त कॉकपिट के अंदर क्या स्थिति बन गई थी और कैसे उन्होंने हर संभव तरीके से खुद को और यात्रियों को बचाने की जद्दोजहद की थी।
'मैं इस तरह नहीं मर सकता', खुद से कही थी ये बात
इंटरव्यू के दौरान जब कैप्टन स्मित मच्छार से पूछा गया कि क्या उन्हें उस दौरान लगा था कि वह जीवित नहीं बच पाएंगे, तो उन्होंने बेहद मार्मिक और हौसले से भरा जवाब दिया। उन्होंने बताया कि हालात इतने बेकाबू हो चुके थे कि किसी भी अनहोनी की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता था। कॉकपिट के फर्श पर मुंह के बल गिरे मच्छार के जेहन में एक ही बात गूंज रही थी कि उन्हें किसी भी कीमत पर हार नहीं माननी है।
उन्होंने उस पल को याद करते हुए कहा, 'मैं अब इस पूरी घटना से उबरने की कोशिश कर रहा हूं, लेकिन हां, एक पल ऐसा जरूर आया था जब मुझे अहसास हुआ और मैंने खुद से कहा- स्मित कुछ करो। तुम इस तरह नहीं मर सकते।' कैप्टन का यह बयान उनके भीतर के अटूट जज्बे और असाधारण संकट के समय उनकी मानसिक दृढ़ता को साफ तौर पर बयां करता है। उन्होंने महसूस किया कि यदि उस क्षण त्वरित कदम नहीं उठाया जाता, तो परिणाम बेहद भयानक हो सकते थे।
साथी पायलट की बहादुरी और यात्रियों की जान बचाने की जंग
हमले के बाद जब कैप्टन स्मित मच्छार गंभीर रूप से घायल होकर कॉकपिट के फर्श पर गिर गए थे, तब उनके दूसरे सह-पायलट ने असाधारण साहस का परिचय दिया। मच्छार ने अपने साथी की तारीफ करते हुए कहा कि उसने तुरंत विमान का नियंत्रण अपने हाथ में लिया और कठिन परिस्थितियों में भी विमान को गिरने से बचाया। उस साथी पायलट की बहादुरी की बदौलत ही सैकड़ों यात्रियों की जान बच सकी। मच्छार ने स्पष्ट किया कि उनके सहकर्मी का वह योगदान ऐसा है जिसे वह अपने जीवन के आखिरी क्षण तक याद रखेंगे।
आपको बता दें कि यह सनसनीखेज घटना 30 सितंबर को फ्लाईदुबई की उड़ान संख्या FZ-1073 में पेश आई थी। यह विमान दुबई से इजरायल के तेल अवीव शहर के लिए रवाना हुआ था और इसमें कुल 174 यात्री सवार थे। शुरुआती जांच और रिपोर्ट्स के अनुसार, ओमान के सह-पायलट हम्माम अल-हम्मामी ने कथित तौर पर विमान को दुर्घटनाग्रस्त करने के इरादे से कैप्टन पर हमला कर दिया था। इस दौरान विमान महज 30 सेकंड से भी कम समय में लगभग 14,000 फीट नीचे आ गया था, जिससे केबिन में हाहाकार मच गया था।
कॉकपिट का दरवाजा खुला और टल गया बड़ा हादसा
हमले के बाद विमान के भीतर अफरा-तफरी का माहौल बन गया था और यात्री अपनी जान की भीख मांगते हुए चीखने-चिल्लाने लगे थे। ऐसी विकट स्थिति में कॉकपिट के भीतर मचे संघर्ष के बाद आखिरकार दरवाजा खोला गया, जिसके बाद कुछ साहसी यात्रियों और अन्य क्रू मेंबर ने अंदर पहुंचकर हमलावर को-पायलट को किसी तरह काबू में किया। यदि समय रहते यात्रियों और सहकर्मियों ने यह कदम न उठाया होता, तो इस विमान हादसे में किसी भी मुसाफिर का बचना असंभव सा था।
"मेरे उस साथी ने विमान का नियंत्रण संभाला और सब कुछ संभाल लिया। उसकी बहादुरी काबिल-ए-तारीफ है। यह ऐसी बात है, जिसे मैं मरते दम तक अपने साथ रखूंगा।" — कैप्टन स्मित मच्छार, घायल भारतीय पायलट
घटना के तुरंत बाद विमान में मौजूद एक अन्य डॉक्टर और को-पायलट ने कैप्टन स्मित मच्छार को प्राथमिक उपचार देना शुरू किया। इसके बाद सूझबूझ दिखाते हुए विमान को सऊदी अरब के तबुक हवाई अड्डे पर सुरक्षित उतार लिया गया। इस घटना के बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कैप्टन मच्छार की बहादुरी की जमकर सराहना की गई। इजरायल के राष्ट्रपति इसहाक हर्जोग ने भी पत्र लिखकर कैप्टन मच्छार के अदम्य साहस को सलाम किया और यात्रियों की जान बचाने में उनके योगदान को सराहा। आज भी यह घटना उड्डयन इतिहास के सबसे डरावने और रोमांचक अध्यायों में गिनी जाती है, जहां सूझबूझ ने एक बड़ी आपदा को टाल दिया।












