धरती पर आज भी ऐसे कई समुदाय और जनजातियां मौजूद हैं, जो आधुनिकता की दौड़ से कोसों दूर अपनी प्राचीन पाषाणकालीन परंपराओं के साथ जीवन बिता रही हैं। इनमें से कुछ समूह बाहरी दुनिया और अन्य कल्चर से मेल-जोल बढ़ाने से पूरी तरह कतराते हैं। ऐसा ही एक बेहद हैरान करने वाला समुदाय इंडोनेशिया के पापुआ के घने जंगलों में निवास करता है, जो जमीन पर घर न बनाकर अपनी पूरी जिंदगी पेड़ों की ऊंचाइयों पर बिता देता है।
पापुआ के घने जंगलों में पेड़ों पर बसती है अनोखी दुनिया
पापुआ के इस रहस्यमयी समुदाय का नाम 'कोरोवाई जनजाति' (Korowai Tribe) है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस आदिवासी समाज में आज भी कुछ-कुछ पुरानी परंपराएं और आदिम रिवाज जिंदा हैं। इनकी सबसे बड़ी और अनोखी खासियत यह है कि ये जमीन पर घर बनाकर नहीं रहते, बल्कि जमीन से 15 से 20 मीटर ऊंचे पेड़ों पर मजबूत फूस के घर बनाते हैं और पूरा परिवार वहीं सुरक्षित जीवन व्यतीत करता है।
हजारों सालों से चली आ रही इस जीवनशैली के कारण कोरोवाई जनजाति को 'वृक्षवासी' या पेड़ों पर रहने वाले लोग भी कहा जाता है। ये पापुआ की सबसे अनूठी स्वदेशी जनजातियों में से एक हैं, जिन्होंने अपनी इस जीवनशैली से पूरी दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींचे रखा है। ये आज भी आधुनिक इंसानों की पहुंच से बिल्कुल दूर घने जंगलों में रहते हैं।
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जमीन पर रहने से क्यों डरते हैं ये लोग?
कोरोवाई लोगों के पेड़ों पर घर बनाने के पीछे कई खास और चौंकाने वाली वजहें हैं। इनमें सबसे बड़ा कारण जहरीले सांपों और अन्य खतरनाक जंगली जानवरों के हमलों से खुद को बचाना है। इसके अलावा, इस समुदाय में यह गहरी मान्यता है कि बुरी आत्माएं जमीन पर निवास करती हैं। बुरी आत्माओं के डर और सजगता के चलते वे ऊंचाई को अपना ठिकाना बनाते हैं।
इनके ये अनूठे घर जंगल में आसानी से मिलने वाली प्राकृतिक सामग्रियों जैसे लकड़ी, बेंत और साबूदाना के पत्तों से बनाए जाते हैं। पेड़ों पर मजबूत और टिकाऊ संरचनाएं खड़ी करने में ये लोग बेहद कुशल होते हैं। पेड़ों पर रहने से इन्हें फल और छोटे जानवरों को ढूंढने में भी आसानी होती है, जिससे इनकी दैनिक जीवन की जरूरतें पूरी होती हैं।
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