दिल्ली के हस्पतालों के पल्मोनोलॉजी वार्ड्स की हवा इस वक्त किसी चेतावनी से कम नहीं है। 'द फ्रीलांस' की टीम ने जब राजधानी के वरिष्ठ फेफड़ा विशेषज्ञों से ग्राउंड पर बात की, तो आंकड़े डराने वाले सामने आए। हमारे फेफड़े हर दिन करीब 20 हजार बार सांस लेकर शरीर के हर कोने तक जीवनदायिनी ऑक्सीजन पहुंचाते हैं। इसी ऑक्सीजन से हमें चलने, दौड़ने, सोचने और जिंदा रहने की ताकत मिलती है। लेकिन, सिगरेट का हरेक कश इन फेफड़ों पर सीधे तौर पर एक नया रासायनिक हमला करता है। इसका असर भले ही पल भर में नजर न आए, लेकिन यह दीमक की तरह फेफड़ों की कार्यक्षमता और लचीलेपन को अंदर से खोखला कर देता है।
सिगरेट का कश और शरीर के भीतर जहर का तांडव
अपोलो स्पेक्ट्रा हॉस्पिटल, दिल्ली की सीनियर कंसल्टेंट पल्मोनोलॉजी, डॉ. प्रीतपाल कौर के मुताबिक, 'स्मोकर्स लंग्स' कोई आधिकारिक मेडिकल टर्म नहीं है, बल्कि यह उस फेफड़े की दयनीय स्थिति को बयां करने के लिए इस्तेमाल किया जाने वाला शब्द है जिस पर लंबे समय तक तंबाकू के धुएं ने क्रूर प्रहार किया हो। जब कोई व्यक्ति सिगरेट का एक कश भी खींचता है, तो उसके भीतर लगभग 7000 से अधिक टॉक्सिन्स और केमिकल सीधे लंग्स के रास्ते खून में घुल जाते हैं।
- कोशिकाओं पर सीधा वार: सिगरेट का धुआं फेफड़ों की एयरवेज़ और नाजुक कोशिकाओं को झुलसा देता है, जिससे सांस लेने की प्राकृतिक प्रक्रिया बाधित होती है।
- पूरे शरीर में जहर का प्रसार: लंग्स के जरिए ये हानिकारक केमिकल्स ब्लडस्ट्रीम में मिलकर दिल, दिमाग और अन्य अंगों तक पहुंचकर गंभीर बीमारियां पैदा करते हैं।
- पैसिव स्मोकिंग का खतरा: सिर्फ पीने वाला ही नहीं, बल्कि 'पैसिव स्मोकिंग' के जरिए आसपास मौजूद मासूम लोग भी इस जहरीले धुएं का शिकार बन रहे हैं।
- 'एक-दो सिगरेट' का भ्रम: हेल्थ एक्सपर्ट्स स्पष्ट करते हैं कि रोज सिर्फ 1-2 सिगरेट पीना भी बिल्कुल सेफ नहीं है, क्योंकि हर कश शरीर को केमिकल्स के संपर्क में लाता है।
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हेल्दी बनाम स्मोकर्स लंग्स और बचाव के 15 अचूक उपाय
हेल्दी लंग्स साफ, गुलाबी, लचीले और ऑक्सीजन सोखने में बेहद सक्षम होते हैं, जबकि स्मोकर्स लंग्स टार जमने से काले, कठोर और बेजान हो चुके होते हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के आंकड़ों के मुताबिक लंग्स कैंसर दुनिया में सबसे खतरनाक और तेजी से फैलने वाली बीमारियों में से एक है, और सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रविधि (CDC) की रिपोर्ट कहती है कि लंग्स कैंसर से होने वाली 10 में से 9 मौतें स्मोकिंग या पैसिव स्मोकिंग की वजह से होती हैं। इस जानलेवा लत से बचने और अपने फेफड़ों को सुरक्षित रखने के लिए धूम्रपान को जड़ से अलविदा कहना ही एकमात्र और सबसे असरदार रास्ता है।






