होम/देश/एशियन गेम्स 2026 में इतिहास रचने से चूके अभय सिंह, फाइनल मुकाबले में मलेशियाई खिलाड़ी से मिली हार
देशपढ़ने में समय: 4 मिनट

एशियन गेम्स 2026 में इतिहास रचने से चूके अभय सिंह, फाइनल मुकाबले में मलेशियाई खिलाड़ी से मिली हार

एशियन गेम्स 2026 के पुरुष स्क्वैश सिंगल्स फाइनल में भारत के अभय सिंह को मलेशियाई खिलाड़ी एनजी ईन यो के हाथों शिकस्त का सामना करना पड़ा। इस खिताबी मुकाबले में हार के साथ ही अभय का स्वर्ण पदक जीतने का सपना अधूरा रह गया और उन्हें रजत पदक से संतोष करना पड़ा। हालांकि, इस शानदार अभियान के जरिए उन्होंने देश के लिए एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर गौरव हासिल किया है।
✍️
नेशनल डेस्क, द फ्रीलांस
राष्ट्रीय संपादकीय ब्यूरो•27 सितंबर 2026 • अपडेटेड
🌐Read in English →
शेयर करें:
एशियन गेम्स 2026 में इतिहास रचने से चूके अभय सिंह, फाइनल मुकाबले में मलेशियाई खिलाड़ी से मिली हार
📷 एशियन गेम्स 2026 में इतिहास रचने से चूके अभय सिंह, फाइनल मुकाबले में मलेशियाई खिलाड़ी से मिली हार — मुख्य घटनाक्रमफोटो साभार: रॉयटर्स / एजेंसीज़ / सोशल मीडिया

खबर की बड़ी बातें (Key Highlights)

  • अभय सिंह ने एशियन गेम्स 2026 के पुरुष सिंगल्स वर्ग में शानदार प्रदर्शन करते हुए रजत पदक अपने नाम किया।
  • स्वर्ण पदक के लिए हुए कड़े मुकाबले में उन्हें मलेशिया के अनुभवी खिलाड़ी एनजी ईन यो ने सीधे तीन सेटों में हराया।
  • टूर्नामेंट के दौरान अभय का सफर बेहद प्रेरणादायक रहा, जिन्होंने फाइनल तक का सफर तय कर भारतीय स्क्वैश का मान बढ़ाया।

अंतरराष्ट्रीय खेल मंच पर भारत का नाम रोशन करने वाले स्क्वैश खिलाड़ी अभय सिंह के लिए एशियन गेम्स 2026 का सफर ऐतिहासिक उपलब्धियों के साथ संपन्न हुआ। हालांकि, इस महामुकाबले के अंतिम चरण में उन्हें स्वर्ण पदक से चूकना पड़ा, लेकिन उनका यह प्रदर्शन भारतीय खेल इतिहास में स्वर्णिम अक्षरों में दर्ज हो चुका है। फाइनल मुकाबले में उनके सामने मलेशिया के धुरंधर खिलाड़ी एनजी ईन यो की चुनौती थी, जिन्होंने अपनी बेहतरीन लय और अनुभव के दम पर मैच को अपने पाले में कर लिया।

खिताबी भिड़ंत से पहले अभय सिंह ने पूरे टूर्नामेंट में गजब की फुर्ती और मानसिक मजबूती का परिचय दिया था। उन्होंने एक के बाद एक कड़े मुकाबलों में जीत दर्ज करते हुए फाइनल तक की दूरी तय की थी। इस सफलता ने देश के खेल प्रेमियों में एक नई उम्मीद जगा दी थी कि भारत स्क्वैश की दुनिया में अपनी धाक और अधिक मजबूत कर रहा है।

फाइनल मुकाबले में मलेशियाई खिलाड़ी का कड़ा इम्तिहान

रविवार को खेले गए पुरुष सिंगल्स के स्वर्ण पदक मुकाबले में मलेशिया के एनजी ईन यो ने शुरुआत से ही आक्रामक रुख अपनाया। उन्होंने कोर्ट के हर कोने का बेहतरीन इस्तेमाल करते हुए अभय सिंह पर दबाव बनाए रखा। पहला गेम बेहद रोमांचक रहा, जिसमें दोनों खिलाड़ियों के बीच एक-एक अंक के लिए कड़ा संघर्ष देखने को मिला। हालांकि, अंतिम पलों में मलेशियाई खिलाड़ी ने बाजी मारते हुए पहला गेम 11-9 से अपने नाम कर लिया।

पहला गेम गंवाने के बाद भारतीय खिलाड़ी पर मनोवैज्ञानिक दबाव बढ़ गया था। दूसरे गेम में एनजी ईन यो ने अपनी रणनीतिक बढ़त को और मजबूत किया और अभय को संभलने का मौका नहीं दिया। इस सेट में मलेशियाई खिलाड़ी ने 11-5 के अंतर से जीत दर्ज कर मैच पर अपनी पकड़ पूरी तरह मजबूत कर ली। खेल के हर विभाग में मलेशियाई खिलाड़ी की निरंतरता भारी पड़ रही थी, जिससे उबरना भारतीय खिलाड़ी के लिए मुश्किल साबित हो रहा था।

संबंधित खबरें

महधोनी जैसा कूल अंदाज और विराट जैसे तेवर: कौन हैं 18 साल की अनाहत सिंह, जिन्होंने खेल जगत में मचाई धूम

महधोनी जैसा कूल अंदाज और विराट जैसे तेवर: कौन हैं 18 साल की अनाहत सिंह, जिन्होंने खेल जगत में मचाई धूम

चुनावी बिसात पर सियासी दलों का दांव: नशा तस्करी और बेअदबी के मुद्दों पर गरमाई राजनीति

चुनावी बिसात पर सियासी दलों का दांव: नशा तस्करी और बेअदबी के मुद्दों पर गरमाई राजनीति

वायरल वीडियो मामले में पुलिस का बड़ा खुलासा आज: धार्मिक स्थल की मर्यादा पर सवाल, बढ़ाई गई सुरक्षा

वायरल वीडियो मामले में पुलिस का बड़ा खुलासा आज: धार्मिक स्थल की मर्यादा पर सवाल, बढ़ाई गई सुरक्षा

मोबाइल प्रीपेड यूजर्स के लिए बड़ा राहत भरा फैसला: अब 30 दिन वाले प्लान से बचेगी जेब, जानिए पूरी डिटेल

मोबाइल प्रीपेड यूजर्स के लिए बड़ा राहत भरा फैसला: अब 30 दिन वाले प्लान से बचेगी जेब, जानिए पूरी डिटेल

बेटियां बोझ नहीं, परिवार की शान: शिक्षा से लेकर खेल के मैदान तक लहरा रहा परचम, बुढ़ापे की बनीं असली लाठी

बेटियां बोझ नहीं, परिवार की शान: शिक्षा से लेकर खेल के मैदान तक लहरा रहा परचम, बुढ़ापे की बनीं असली लाठी

खेत और किसानी बचाने के लिए बड़ा शंखनाद: पंजाब में हुए ऐतिहासिक सम्मेलन में किसान संगठनों की एकजुटता का ऐलान

खेत और किसानी बचाने के लिए बड़ा शंखनाद: पंजाब में हुए ऐतिहासिक सम्मेलन में किसान संगठनों की एकजुटता का ऐलान

विकास से कोसों दूर उत्तर प्रदेश की यह वीरान बस्ती: 12 साल से सड़क और जल निकासी को तरस रहे दो सौ परिवार, जनप्रतिनिधियों पर उठे गंभीर सवाल

विकास से कोसों दूर उत्तर प्रदेश की यह वीरान बस्ती: 12 साल से सड़क और जल निकासी को तरस रहे दो सौ परिवार, जनप्रतिनिधियों पर उठे गंभीर सवाल

भोजपुरी सिनेमा का अनसुना सच: भाषा की जानकारी न होने के बावजूद कैसे बनीं पॉपुलर?

भोजपुरी सिनेमा का अनसुना सच: भाषा की जानकारी न होने के बावजूद कैसे बनीं पॉपुलर?

तीसरे गेम में वापसी की कोशिश रही नाकाम

मुकाबले के तीसरे और अंतिम गेम में अभय सिंह ने अपनी रणनीति में बदलाव किया और आक्रामक खेल दिखाते हुए वापसी के संकेत दिए। उन्होंने कुछ बेहतरीन शॉट्स खेले और मलेशियाई खिलाड़ी को गलतियां करने पर मजबूर किया। एक समय ऐसा लगा कि अभय मैच का रुख मोड़ने में कामयाब हो जाएंगे, लेकिन अनुभवहीनता और कुछ मामूली गलतियों के चलते वह अपनी इस लय को अंत तक बरकरार नहीं रख सके।

मलेशियाई खिलाड़ी ने दबाव के क्षणों में संयम बनाए रखा और तीसरे गेम को भी 11-5 से जीतकर मैच अपने नाम कर लिया। इस हार के साथ ही अभय का स्वर्ण पदक जीतने का सपना टूट गया, लेकिन रजत पदक हासिल कर उन्होंने अपनी क्षमता का लोहा एक बार फिर मनवा लिया। मैच समाप्ति के बाद मलेशियाई खिलाड़ी की आंखों में जीत की खुशी के आंसू साफ झलक रहे थे, जो इस मुकाबले के महत्व को बयां कर रहे थे।

"एशियन गेम्स के फाइनल तक पहुंचना और देश के लिए पदक जीतना मेरे लिए गर्व का क्षण है। स्वर्ण से चूकने का मलाल जरूर है, लेकिन यह सफर भविष्य के लिए मुझे और अधिक मेहनत करने की प्रेरणा देता है।"

— अभय सिंह, भारतीय स्क्वैश खिलाड़ी

भारतीय स्क्वैश के लिए ऐतिहासिक रहा यह अभियान

यह टूर्नामेंट भारतीय स्क्वैश के लिहाज से बेहद खास और यादगार रहा है। अभय सिंह ने जिस तरह से दिग्गजों को पछाड़ते हुए फाइनल में जगह बनाई, उसने यह साबित कर दिया कि भारतीय खिलाड़ी अब वैश्विक स्तर पर किसी भी चुनौती का सामना करने के लिए पूरी तरह तैयार हैं। इस रजत पदक के साथ उन्होंने देश में स्क्वैश के खेल को एक नई पहचान दी है और आने वाली पीढ़ी के खिलाड़ियों के लिए प्रेरणास्त्रोत बन गए हैं।

खेल विशेषज्ञों का मानना है कि इस स्तर के मुकाबलों से मिलने वाला अनुभव अभय सिंह के आगामी करियर में बेहद मददगार साबित होगा। उनकी यह सफलता इस बात का प्रमाण है कि कड़ी मेहनत और लगन से भारत के युवा खिलाड़ी किसी भी खेल अनुशासन में दुनिया की बड़ी ताकतों को कड़ी टक्कर दे सकते हैं।

द फ्रीलांस पत्रकारिता नीति (Editorial Commitment):हम निष्पक्ष, सटीक और तथ्यात्मक पत्रकारिता के लिए प्रतिबद्ध हैं। यह समाचार रिपोर्ट विभिन्न प्रमाणित समाचार एजेंसियों, आधिकारिक बयानों और स्थानीय संवाददाताओं से प्राप्त इनपुट के आधार पर तैयार की गई है।
✍️

नेशनल डेस्क, द फ्रीलांस

सत्यापित संपादकीय डेस्क

राजनीतिक, नीतिगत एवं राष्ट्रीय सरोकार रिपोर्टिंग टीम

द फ्रीलांस की राष्ट्रीय संपादकीय डेस्क देश की राजनीति, संसद, नीतिगत फैसलों, केंद्रीय योजनाओं और जनसरोकार से जुड़े बड़े मुद्दों पर 24/7 निष्पक्ष, तथ्यपरक और खोजी रिपोर्टिंग करती है। यह टीम दोहरे तथ्य-सत्यापन के कठोर सिद्धांतों का पालन करती है।

संबंधित खबरें (Related Articles)

महधोनी जैसा कूल अंदाज और विराट जैसे तेवर: कौन हैं 18 साल की अनाहत सिंह, जिन्होंने खेल जगत में मचाई धूमNATIONAL

महधोनी जैसा कूल अंदाज और विराट जैसे तेवर: कौन हैं 18 साल की अनाहत सिंह, जिन्होंने खेल जगत में मचाई धूम

27 सित॰
चुनावी बिसात पर सियासी दलों का दांव: नशा तस्करी और बेअदबी के मुद्दों पर गरमाई राजनीतिNATIONAL

चुनावी बिसात पर सियासी दलों का दांव: नशा तस्करी और बेअदबी के मुद्दों पर गरमाई राजनीति

27 सित॰
वायरल वीडियो मामले में पुलिस का बड़ा खुलासा आज: धार्मिक स्थल की मर्यादा पर सवाल, बढ़ाई गई सुरक्षाNATIONAL

वायरल वीडियो मामले में पुलिस का बड़ा खुलासा आज: धार्मिक स्थल की मर्यादा पर सवाल, बढ़ाई गई सुरक्षा

27 सित॰
मोबाइल प्रीपेड यूजर्स के लिए बड़ा राहत भरा फैसला: अब 30 दिन वाले प्लान से बचेगी जेब, जानिए पूरी डिटेलNATIONAL

मोबाइल प्रीपेड यूजर्स के लिए बड़ा राहत भरा फैसला: अब 30 दिन वाले प्लान से बचेगी जेब, जानिए पूरी डिटेल

27 सित॰
बेटियां बोझ नहीं, परिवार की शान: शिक्षा से लेकर खेल के मैदान तक लहरा रहा परचम, बुढ़ापे की बनीं असली लाठीNATIONAL

बेटियां बोझ नहीं, परिवार की शान: शिक्षा से लेकर खेल के मैदान तक लहरा रहा परचम, बुढ़ापे की बनीं असली लाठी

27 सित॰
खेत और किसानी बचाने के लिए बड़ा शंखनाद: पंजाब में हुए ऐतिहासिक सम्मेलन में किसान संगठनों की एकजुटता का ऐलानNATIONAL

खेत और किसानी बचाने के लिए बड़ा शंखनाद: पंजाब में हुए ऐतिहासिक सम्मेलन में किसान संगठनों की एकजुटता का ऐलान

27 सित॰
विकास से कोसों दूर उत्तर प्रदेश की यह वीरान बस्ती: 12 साल से सड़क और जल निकासी को तरस रहे दो सौ परिवार, जनप्रतिनिधियों पर उठे गंभीर सवालNATIONAL

विकास से कोसों दूर उत्तर प्रदेश की यह वीरान बस्ती: 12 साल से सड़क और जल निकासी को तरस रहे दो सौ परिवार, जनप्रतिनिधियों पर उठे गंभीर सवाल

27 सित॰
भोजपुरी सिनेमा का अनसुना सच: भाषा की जानकारी न होने के बावजूद कैसे बनीं पॉपुलर?NATIONAL

भोजपुरी सिनेमा का अनसुना सच: भाषा की जानकारी न होने के बावजूद कैसे बनीं पॉपुलर?

27 सित॰