अंतरराष्ट्रीय खेल मंच पर भारत का नाम रोशन करने वाले स्क्वैश खिलाड़ी अभय सिंह के लिए एशियन गेम्स 2026 का सफर ऐतिहासिक उपलब्धियों के साथ संपन्न हुआ। हालांकि, इस महामुकाबले के अंतिम चरण में उन्हें स्वर्ण पदक से चूकना पड़ा, लेकिन उनका यह प्रदर्शन भारतीय खेल इतिहास में स्वर्णिम अक्षरों में दर्ज हो चुका है। फाइनल मुकाबले में उनके सामने मलेशिया के धुरंधर खिलाड़ी एनजी ईन यो की चुनौती थी, जिन्होंने अपनी बेहतरीन लय और अनुभव के दम पर मैच को अपने पाले में कर लिया।
खिताबी भिड़ंत से पहले अभय सिंह ने पूरे टूर्नामेंट में गजब की फुर्ती और मानसिक मजबूती का परिचय दिया था। उन्होंने एक के बाद एक कड़े मुकाबलों में जीत दर्ज करते हुए फाइनल तक की दूरी तय की थी। इस सफलता ने देश के खेल प्रेमियों में एक नई उम्मीद जगा दी थी कि भारत स्क्वैश की दुनिया में अपनी धाक और अधिक मजबूत कर रहा है।
फाइनल मुकाबले में मलेशियाई खिलाड़ी का कड़ा इम्तिहान
रविवार को खेले गए पुरुष सिंगल्स के स्वर्ण पदक मुकाबले में मलेशिया के एनजी ईन यो ने शुरुआत से ही आक्रामक रुख अपनाया। उन्होंने कोर्ट के हर कोने का बेहतरीन इस्तेमाल करते हुए अभय सिंह पर दबाव बनाए रखा। पहला गेम बेहद रोमांचक रहा, जिसमें दोनों खिलाड़ियों के बीच एक-एक अंक के लिए कड़ा संघर्ष देखने को मिला। हालांकि, अंतिम पलों में मलेशियाई खिलाड़ी ने बाजी मारते हुए पहला गेम 11-9 से अपने नाम कर लिया।
पहला गेम गंवाने के बाद भारतीय खिलाड़ी पर मनोवैज्ञानिक दबाव बढ़ गया था। दूसरे गेम में एनजी ईन यो ने अपनी रणनीतिक बढ़त को और मजबूत किया और अभय को संभलने का मौका नहीं दिया। इस सेट में मलेशियाई खिलाड़ी ने 11-5 के अंतर से जीत दर्ज कर मैच पर अपनी पकड़ पूरी तरह मजबूत कर ली। खेल के हर विभाग में मलेशियाई खिलाड़ी की निरंतरता भारी पड़ रही थी, जिससे उबरना भारतीय खिलाड़ी के लिए मुश्किल साबित हो रहा था।
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तीसरे गेम में वापसी की कोशिश रही नाकाम
मुकाबले के तीसरे और अंतिम गेम में अभय सिंह ने अपनी रणनीति में बदलाव किया और आक्रामक खेल दिखाते हुए वापसी के संकेत दिए। उन्होंने कुछ बेहतरीन शॉट्स खेले और मलेशियाई खिलाड़ी को गलतियां करने पर मजबूर किया। एक समय ऐसा लगा कि अभय मैच का रुख मोड़ने में कामयाब हो जाएंगे, लेकिन अनुभवहीनता और कुछ मामूली गलतियों के चलते वह अपनी इस लय को अंत तक बरकरार नहीं रख सके।
मलेशियाई खिलाड़ी ने दबाव के क्षणों में संयम बनाए रखा और तीसरे गेम को भी 11-5 से जीतकर मैच अपने नाम कर लिया। इस हार के साथ ही अभय का स्वर्ण पदक जीतने का सपना टूट गया, लेकिन रजत पदक हासिल कर उन्होंने अपनी क्षमता का लोहा एक बार फिर मनवा लिया। मैच समाप्ति के बाद मलेशियाई खिलाड़ी की आंखों में जीत की खुशी के आंसू साफ झलक रहे थे, जो इस मुकाबले के महत्व को बयां कर रहे थे।
"एशियन गेम्स के फाइनल तक पहुंचना और देश के लिए पदक जीतना मेरे लिए गर्व का क्षण है। स्वर्ण से चूकने का मलाल जरूर है, लेकिन यह सफर भविष्य के लिए मुझे और अधिक मेहनत करने की प्रेरणा देता है।"
— अभय सिंह, भारतीय स्क्वैश खिलाड़ी
भारतीय स्क्वैश के लिए ऐतिहासिक रहा यह अभियान
यह टूर्नामेंट भारतीय स्क्वैश के लिहाज से बेहद खास और यादगार रहा है। अभय सिंह ने जिस तरह से दिग्गजों को पछाड़ते हुए फाइनल में जगह बनाई, उसने यह साबित कर दिया कि भारतीय खिलाड़ी अब वैश्विक स्तर पर किसी भी चुनौती का सामना करने के लिए पूरी तरह तैयार हैं। इस रजत पदक के साथ उन्होंने देश में स्क्वैश के खेल को एक नई पहचान दी है और आने वाली पीढ़ी के खिलाड़ियों के लिए प्रेरणास्त्रोत बन गए हैं।
खेल विशेषज्ञों का मानना है कि इस स्तर के मुकाबलों से मिलने वाला अनुभव अभय सिंह के आगामी करियर में बेहद मददगार साबित होगा। उनकी यह सफलता इस बात का प्रमाण है कि कड़ी मेहनत और लगन से भारत के युवा खिलाड़ी किसी भी खेल अनुशासन में दुनिया की बड़ी ताकतों को कड़ी टक्कर दे सकते हैं।








