नई दिल्ली: देश की राजधानी के राजनीतिक गलियारों में एक बार फिर सरगर्मी तेज हो गई है। 'द फ्रीलान्स' के ऑन-द-ग्राउंड संवाददाताओं द्वारा जुटाई गई जानकारी के अनुसार, कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के राष्ट्रीय अध्यक्ष अभिजीत दीपके ने मुख्य चुनाव आयुक्त/शीर्ष अधिकारी ज्ञानेश कुमार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। जंतर-मंतर पर होने वाले इस प्रदर्शन और उसके बाद के राजनीतिक घटनाक्रम ने राष्ट्रीय मीडिया का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है।
कौन हैं अभिजीत दीपके और क्या है पूरा विवाद?
हालिया राजनीतिक घटनाक्रम में कॉकरोच जनता पार्टी ने आक्रामक रुख अपनाते हुए प्रशासनिक व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। पार्टी प्रमुख अभिजीत दीपके ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि यदि ज्ञानेश कुमार अपने पद से इस्तीफा नहीं देते हैं, तो उनका यह विरोध प्रदर्शन थमने वाला नहीं है। मुंबई और अन्य महानगरों में सीजेपी के कार्यकर्ताओं द्वारा विरोध प्रदर्शन की योजना बनाई गई थी, जिसे स्थानीय प्रशासन और पुलिस द्वारा अनुमति न मिलने के बाद विवाद और गहरा गया है।
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कॉकरोच जनता पार्टी की तीन प्रमुख मांगें और 48 घंटे का अल्टीमेटम
जमीनी स्तर पर हमारी इन्वेस्टिगेटिव टीम को मिले दस्तावेजों और बयानों के मुताबिक, सीजेपी ने सिर्फ इस्तीफे की मांग ही नहीं रखी है, बल्कि उनके एजेंडे में तीन सूत्रीय मुख्य मांगें शामिल हैं। पार्टी ने प्रशासन को 48 घंटे का कड़ा अल्टीमेटम देते हुए कहा है कि यदि इन मांगों पर सकारात्मक रुख नहीं अपनाया गया, तो आंदोलन को और अधिक तीव्र किया जाएगा। इन मांगों में प्रशासनिक पारदर्शिता और चुनावी सुधारों से जुड़े मुद्दे प्रमुख बताए जा रहे हैं।
मुंबई में प्रदर्शन की अनुमति न मिलने पर 'जेल भरो' का शंखनाद
जब मुंबई पुलिस ने सीजेपी के प्रस्तावित मार्च और प्रोटेस्ट को अनुमति देने से इनकार कर दिया, तो अभिजीत दीपके ने सीधे तौर पर प्रशासन को चुनौती देते हुए गांधी जयंती (2 अक्टूबर) के दिन से 'जेल भरो आंदोलन' शुरू करने का बड़ा ऐलान कर दिया। दीपके का कहना है कि लोकतांत्रिक देश में विरोध जताने के अधिकार को दबाया जा रहा है, जिसे वे किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं करेंगे। कार्यकर्ताओं को अब देश के अलग-अलग हिस्सों से दिल्ली के जंतर-मंतर और अन्य तय ठिकानों पर जुटने का आह्वान किया गया है।
भविष्य का असर और सुरक्षा एजेंसियों की पैनी नजर
इस पूरे घटनाक्रम पर खुफिया एजेंसियों और दिल्ली पुलिस की पैनी नजर है। जंतर-मंतर पर सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है ताकि किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटा जा सके। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि यह आंदोलन व्यापक रूप लेता है, तो आने वाले दिनों में यह सरकार और विपक्ष के बीच एक नया राजनीतिक मुद्दा बन सकता है। 'द फ्रीलान्स' इस खबर के हर एक पहलू पर ग्राउंड जीरो से लगातार नजर बनाए रखेगा।








