नई दिल्ली से 'द फ्रीलान्स' की विशेष फील्ड रिपोर्ट। संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) के 100 वर्ष पूरे होने के मौके पर आयोजित शताब्दी समारोह में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक ऐसा खुलासा किया जिसने हर भारतीय का सीना गर्व से चौड़ा कर दिया। विज्ञान भवन में आयोजित इस भव्य कार्यक्रम में देश की प्रशासनिक रीढ़ की हड्डी माने जाने वाले यूपीएससी के सफर को याद करते हुए पीएम मोदी ने वैश्विक पटल पर भारत की बढ़ती साख और यहां के नागरिकों के अदम्य साहस का एक अनूठा उदाहरण सामने रखा।
कैप्टन स्मित मच्छार और 9/11 की अनकही कहानी
समारोह को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत के कौशल और साहस के एक नए अध्याय का जिक्र किया। उन्होंने बताया कि किस प्रकार एक भारतीय नागरिक, कैप्टन स्मित मच्छार ने अपनी असाधारण सूझबूझ और बहादुरी के दम पर अमेरिका में 9/11 जैसी दिल दहला देने वाली घटना को होने से रोक दिया। पीएम ने इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के साथ हुई बातचीत का हवाला देते हुए बताया कि कैसे विदेशी धरती पर एक भारतीय ने अपनी जान की परवाह न करते हुए संकट को टाला। यह घटना न केवल व्यक्तिगत वीरता का प्रतीक है, बल्कि यह ग्लोबल स्टेज पर भारतीय युवाओं के ट्रेनिंग और उनके मजबूत नैतिक मूल्यों को भी दर्शाती है।
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जारी हुआ विशेष स्मारक डाक टिकट
इस ऐतिहासिक अवसर की गरिमा को बढ़ाते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने यूपीएससी के 100 गौरवशाली वर्षों के सफर को समर्पित एक विशेष स्मारक डाक टिकट भी जारी किया। यह डाक टिकट देश के सिविल सेवकों के उस योगदान का गवाह है जिन्होंने पिछले एक सदी में भारत के लोकतंत्र और नीति-निर्माण को आकार देने में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। इस दौरान यूपीएससी के पूर्व और वर्तमान कई वरिष्ठ अधिकारी और गणमान्य अतिथि मौजूद रहे।
'सरकार माई-बाप नहीं' – शासन के नए दौर का मंत्र
अपनी इस स्पीच के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने केवल प्रशासनिक इतिहास तक खुद को सीमित नहीं रखा, बल्कि आधुनिक भारत के गवर्नेंस मॉडल पर भी खुलकर बात की। उन्होंने आज के दौर की बदलती कार्यसंस्कृति पर जोर देते हुए कहा कि अब वह जमाना लद गया जब सरकार को जनता का 'माई-बाप' समझा जाता था। पीएम ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि आज के नए भारत का मंत्र 'नागरिक देवो भव' है। यानी नीतियां जनता के अधिकारों और उनकी सहूलियत को केंद्र में रखकर बनाई जा रही हैं, न कि ऊपर से थोपी जा रही हैं।
बदलते भारत की बदलती प्रशासनिक चुनौतियां
विशेषज्ञों का मानना है कि यूपीएससी शताब्दी समारोह का यह भाषण केवल अतीत के जश्न तक सीमित नहीं था, बल्कि यह आने वाले अमृत काल के लिए प्रशासनिक सुधारों का एक ब्लूप्रिंट भी था। जहां एक तरफ कैप्टन स्मित जैसे रियल-लाइफ हीरोज़ की कहानियां देश का मनोबल बढ़ाती हैं, वहीं दूसरी तरफ 'नागरिक देवो भव' का दृष्टिकोण नौकरशाही को जनता के प्रति और अधिक उत्तरदायी बनाने का संदेश देता है।
निष्कर्ष
यूपीएससी के 100 साल का यह पड़ाव इस बात का प्रमाण है कि भारत के संस्थान समय के साथ कितने परिपक्व हुए हैं। कैप्टन स्मित मच्छार के साहस और प्रधानमंत्री के दूरदर्शी बयानों ने यह साबित कर दिया है कि आज का भारतीय नागरिक वैश्विक चुनौतियों से निपटने में पूरी तरह सक्षम है और देश का प्रशासनिक ढांचा एक नए और जन-केंद्रित युग में प्रवेश कर चुका है।








