देश के सरकारी अस्पतालों की सुरक्षा व्यवस्था और बुनियादी ढांचे पर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। ताजा मामला तेलंगाना के आदिलाबाद जिले का है, जहां एक सरकारी मेडिकल कॉलेज से जुड़े अस्पताल के नवजात शिशु देखभाल इकाई (SNCU) में भीषण आग लग गई। इस दर्दनाक हादसे में अब तक तीन मासूम बच्चों की जान चली गई है, जबकि कई अन्य बच्चों की हालत नाजुक बनी हुई है। इस घटना के बाद से पूरे इलाके में शोक और आक्रोश का माहौल है, और पीड़ित परिवार न्याय की गुहार लगा रहे हैं।
अचानक एसी में धमाके के साथ फैली आग और धुआं
यह भयावह घटना सोमवार देर रात करीब 11:40 बजे की है, जब आदिलाबाद स्थित राजीव गांधी इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज यानी RIMS के स्पेशल न्यूबॉर्न केयर यूनिट में अचानक तेज धमाका हुआ। शुरुआती जांच के अनुसार, वार्ड में लगे एयर कंडीशनर (AC) यूनिट में तकनीकी खराबी या शॉर्ट सर्किट के कारण यह हादसा हुआ। एसी फटते ही वार्ड के भीतर भारी मात्रा में काला और जहरीला धुआं तेजी से फैल गया। चूंकि यह नवजात शिशुओं का आईसीयू वार्ड था, इसलिए वहां मौजूद बच्चे पहले से ही बेहद नाजुक स्थिति में थे और वे इस जहरीले धुएं से तुरंत प्रभावित हो गए।
धुआं फैलते ही अस्पताल के भीतर चीख-पुकार मच गई। ड्यूटी पर मौजूद नर्सों और वार्ड स्टाफ ने अपनी जान जोखिम में डालकर बच्चों को बचाने का प्रयास किया। आनन-फानन में अस्पताल प्रशासन ने पुलिस और दमकल विभाग को इसकी सूचना दी। दमकल की गाड़ियों ने मौके पर पहुंचकर काफी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया और उसे अस्पताल के अन्य वार्डों तक फैलने से रोक लिया, अन्यथा एक बड़ा नरसंहार हो सकता था।
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वार्ड में मौजूद थे 24 से ज्यादा नवजात, तुरंत शुरू हुआ रेस्क्यू ऑपरेशन
हादसे के वक्त SNCU वार्ड के भीतर कुल 24 नवजात शिशु भर्ती थे। इनमें से कई बच्चे समय से पहले जन्मे (प्रीमैच्योर) थे और उनका वजन बेहद कम था। धुएं के गुबार के बीच अस्पताल स्टाफ, पुलिस और स्थानीय लोगों की मदद से युद्ध स्तर पर रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया गया। बच्चों को एक-एक करके सुरक्षित बाहर निकाला गया और तुरंत वेंटिलेटर तथा अन्य आपातकालीन चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराने की कोशिश की गई।
हालाँकि, रेस्क्यू के दौरान ही कुछ बच्चों की स्थिति बेहद गंभीर हो गई। धुएं की चपेट में आने और दम घुटने जैसी स्थिति के कारण एक 26 हफ्ते के प्रीमैच्योर बच्चे की मौके पर ही मौत हो गई थी। इसके बाद गंभीर हालत में बच्चों को आदिलाबाद से निकालकर निजामाबाद और अन्य बड़े सुपर स्पेशियलिटी अस्पतालों के लिए रेफर किया गया, ताकि उनकी जान बचाई जा सके।
इलाज के दौरान दो और बच्चों ने توड़ा दम, मरने वालों की संख्या बढ़कर हुई तीन
प्रशासन और डॉक्टरों के तमाम प्रयासों के बावजूद हादसों का यह सिलसिला थमा नहीं। आदिलाबाद से दूसरे अस्पतालों में शिफ्ट किए गए बच्चों में से एक 5 दिन के नवजात समेत दो अन्य बच्चों की भी इलाज के दौरान मौत हो गई। इनमें से एक बच्चे की मौत निजामाबाद के अस्पताल में उपचार के दौरान हुई। इस तरह इस दर्दनाक अग्निकांड में मरने वाले मासूमों की कुल संख्या बढ़कर तीन हो गई है।
अस्पताल सूत्रों के मुताबिक, जिन बच्चों को दूसरे केंद्रों पर भेजा गया है, उनकी हालत पर लगातार बाल रोग विशेषज्ञों (पीडियाट्रिशियंस) की एक विशेष टीम नजर रख रही है। उन्हें ऑक्सीजन सपोर्ट और अन्य जरूरी मेडिकल ट्रीटमेंट दिया जा रहा है, ताकि किसी अन्य बच्चे की जान पर संकट न आए।
जिला प्रशासन और पुलिस अधिकारियों ने लिया जायजा, उच्चस्तरीय जांच के आदेश
घटना की सूचना मिलते ही जिला कलेक्टर राजर्षि शाह और पुलिस अधीक्षक अखिल महाजन ने देर रात ही अस्पताल का दौरा किया। उन्होंने मौके पर पहुंचकर राहत और बचाव कार्यों की व्यक्तिगत रूप से निगरानी की। अधिकारियों ने अस्पताल के भीतर हुए नुकसान का जायजा लिया और इस बात की पड़ताल के निर्देश दिए कि आखिर आग लगने की असली वजह क्या थी और क्या इसमें किसी तरह की प्रशासनिक या तकनीकी लापरवाही शामिल थी या नहीं।
"यह बेहद दुखद और दुर्भाग्यपूर्ण घटना है। आग लगने की सही वजह का पता लगाने और यह सुनिश्चित करने के लिए विस्तृत जांच की जा रही है कि क्या किसी स्तर पर कोई लापरवाही हुई थी। फिलहाल हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता अन्य अस्पतालों में शिफ्ट किए गए सभी बच्चों का बेहतर और सुरक्षित इलाज मुहैया कराना है।"— राजर्षि शाह, जिला कलेक्टर, आदिलाबाद
कलेक्टर ने स्पष्ट किया है कि जांच रिपोर्ट आने के बाद यदि कोई भी अधिकारी या कर्मचारी दोषी पाया जाता है, तो उसके खिलाफ सख्त से सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। सरकार की ओर से पीड़ित परिवारों को हरसंभव सहायता देने का आश्वासन भी दिया गया है।
अस्पतालों की सुरक्षा और मेंटेनेंस पर फिर उठे गंभीर सवाल
इस हादसे ने देश भर के सरकारी अस्पतालों में फायर सेफ्टी और इलेक्ट्रिकल मेंटेनेंस की पोल खोलकर रख दी है। सवाल यह उठता है कि क्या सरकारी अस्पतालों में लगे एयर कंडीशनर और बिजली के उपकरणों की नियमित जांच नहीं होती है? नवजात शिशुओं जैसे अति संवेदनशील वार्डों में सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम क्यों नहीं थे? आम जनता और अभिभावक अब इन व्यवस्थाओं पर कड़ा रोष व्यक्त कर रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि अस्पतालों को अपनी आंतरिक सुरक्षा प्रणालियों को लेकर अत्यधिक सतर्क होना चाहिए, ताकि भविष्य में ऐसे मासूमों की जिंदगियों के साथ खिलवाड़ न हो सके।







