वाशिंगटन डीसी से हमारे स्पेशल इन्वेस्टिगेशन डेस्क की खास रिपोर्ट के मुताबिक दुनिया को सुरक्षा देने का दावा करने वाले एक अमेरिकी जासूस ने ही देश के साथ बहुत बड़ा धोखा किया है। आरोपी ने अपनी गुप्त एजेंसी की पहुंच का गलत फायदा उठाकर अरबों रुपये की अवैध कमाई की और ऐशो-आराम की जिंदगी जी रहा था। जांच एजेंसियों को इस शातिर शख्स के बारे में तब पता चला जब इसके बैंक खातों में अचानक करोड़ों रुपयों का भारी लेनदेन सामने आया।
शुरुआती पड़ताल में सामने आया है कि इस जासूस ने फर्जी दस्तावेजों और गुप्त प्रोजेक्ट्स के नाम पर सरकार और निजी कंपनियों से भारी रकम वसूली थी। पकड़े जाने के डर से बचने के लिए उसने काले धन को ऐसी जगहों पर लगाया जहां से उसे आसानी से छुपाया जा सके। इस शातिर दिमाग शख्स ने अपनी काली कमाई का बड़ा हिस्सा सीधे सोने की बड़ी-बड़ी ईंटें खरीदने में इस्तेमाल किया ताकि जरूरत पड़ने पर उन्हें आसानी से खपाया जा सके।
सोने की ईंटों और महंगी गाड़ियों का जखीरा
जब अमेरिकी संघीय जांच ब्यूरो यानी एफबीआई की टीम ने इस अमेरिकी जासूस के आलीशान घर पर अचानक छापा मारा तो वहां का नजारा देखकर अधिकारी भी हैरान रह गए। घर के गुप्त तहखानों से भारी मात्रा में सोने की ईंटें बरामद की गईं जिनकी बाजार में कीमत करोड़ों रुपये से भी ज्यादा आंकी गई है। इसके अलावा घर के बड़े गैराज में दुनिया की सबसे महंगी और तेज रफ्तार सुपर कारें लाइन से खड़ी पाई गईं।
जांच अधिकारियों के अनुसार आरोपी को घड़ियों का बहुत शौक था और उसने दुनिया के सबसे बड़े ब्रांड्स की दुर्लभ और बेशकीमती घड़ियां जमा कर रखी थीं। इन घड़ियों की कीमत इतनी ज्यादा थी कि एक घड़ी के दाम में एक आम आदमी आसानी से कई बड़े मकान खरीद सकता है। इन सभी लग्जरी सामानों को देखकर साफ अंदाजा लगाया जा सकता है कि इस जासूस ने कितने बड़े पैमाने पर देश के साथ गद्दारी और धोखाधड़ी की थी।
कैसे रची गई इस अरबों रुपये के घोटाले की साजिश
खुफिया दस्तावेजों की छानबीन से पता चलता है कि यह पूरा खेल कई सालों से बहुत ही शातिर तरीके से खेला जा रहा था। आरोपी ने अपनी नौकरी के रसूख का इस्तेमाल करके बड़े अधिकारियों को अपने पाले में मिलाया हुआ था और हर गुप्त डील से अपना मोटा कमीशन बनाता था। जब कभी भी जांच की कोई हल्की सी भी आंच आती थी तो वह अपने संपर्कों की मदद से फाइलों को दबा देता था।
लेकिन अपराध की दुनिया में कोई भी चोर कितना भी चालाक क्यों न हो, एक न एक दिन कानून के लंबे हाथों से बच नहीं पाता है। इस बार भी कुछ ऐसा ही हुआ जब एक छोटे से सुराग ने इस पूरे सिंडिकेट की पोल खोलकर रख दी और केंद्रीय एजेंसियों ने जाल बिछाकर इसे दबोच लिया। अब इस जासूस से लगातार पूछताछ की जा रही है ताकि इसके बाकी साथियों और काले धन के गुप्त ठिकानों का भी पूरा कच्चा-चिट्ठा बाहर निकाला जा सके।
कानूनी शिकंजा और आगे की सख्त कार्रवाई
इस बड़ी घटना के सामने आने के बाद अमेरिकी खुफिया विभाग में भी हड़कंप मच गया है और महकमे के भीतर सुरक्षा तंत्र की कड़ी समीक्षा की जा रही है। अदालत ने आरोपी की जमानत अर्जी को सीधे तौर पर खारिज कर दिया है और उसे कड़ी सुरक्षा वाली जेल में भेज दिया गया है। सरकारी वकील का कहना है कि इस तरह के अपराध देश की सुरक्षा के साथ सीधा खिलवाड़ हैं इसलिए आरोपी को कम से कम उम्रकैद की सजा दिलाई जाएगी।
द फ्रीलान्स की टीम इस हाई-प्रोफाइल मामले पर लगातार नजर बनाए हुए है और जैसे ही जांच से जुड़ी कोई नई आधिकारिक जानकारी सामने आएगी, हम सबसे पहले अपने पाठकों तक पहुंचाएंगे। यह मामला पूरी दुनिया के सुरक्षा तंत्रों के लिए एक बड़ा सबक है कि कैसे अंदर बैठे लोग ही देश को अंदर से दीमक की तरह खोखला कर रहे हैं।







