द फ्रीलान्स (thefreelance.in) - स्पेशल इन्वेस्टिगेटिव डेस्क: पूर्वोत्तर के रणनीतिक रूप से बेहद संवेदनशील क्षेत्र, अरुणाचल प्रदेश से भारत-म्यांमार सीमा के पास एक बड़ी सुरक्षा चूक और उग्रवादी हमले की खबर सामने आ रही है। घने जंगलों और दुर्गम पहाड़ियों के बीच नियमित गश्त (पेट्रोलिंग) पर निकली असम राइफल्स की एक टुकड़ी को निशाना बनाकर उग्रवादियों ने घात लगाकर अचानक हमला बोल दिया। इस भीषण आतंकी व उग्रवादी गतिविधि में देश ने असम राइफल्स के एक बहादुर जवान को खो दिया है, जबकि चार अन्य जवान गंभीर रूप से घायल हैं।
दुर्गम जंगलों में घात लगाकर किया गया हमला
हमारी फील्ड रिपोर्ट और सुरक्षा बलों से मिले शुरुआती इनपुट्स के मुताबिक, यह घटना अरुणाचल प्रदेश के म्यांमार से सटे सीमावर्ती इलाके में हुई है। असम राइफल्स के जवान इलाके में सर्च और पेट्रोलिंग ऑपरेशन चला रहे थे। सीमावर्ती इलाकों का भौगोलिक ढांचा ऐसा है जहां घने जंगल, गहरी घाटियां और कठिन रास्ते हैं, जिसका फायदा अक्सर उग्रवादी संगठन उठाते हैं। उग्रवादियों ने सुनियोजित तरीके से घात लगाकर सुरक्षा बलों की टीम पर अचानक स्वचालित हथियारों से अंधाधुंध गोलीबारी शुरू कर दी।
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शहीद जवान को श्रद्धांजलि, घायलों का इलाज जारी
इस अचानक हुए हमले में असम राइफल्स के एक जवान ने मौके पर ही दम तोड़ दिया और वीरगति को प्राप्त हुए। वहीं, चार अन्य जवान गंभीर रूप से जख्मी हो गए हैं। घटना की सूचना मिलते ही सुरक्षा बलों के अतिरिक्त जवानों और त्वरित प्रतिक्रिया टीमों (QRT) को मौके पर भेजा गया। सभी घायलों को तुरंत सैन्य अस्पतालों में एयरलिफ्ट या जमीनी मार्ग से पहुंचाया गया है, जहां उनकी स्थिति पर डॉक्टरों की टीम लगातार नजर बनाए हुए है।
"पूर्वोत्तर की सीमाओं पर शांति भंग करने की हर नापाक साजिश का कड़ा जवाब दिया जाएगा। हमारे सुरक्षा बलों काौौर्य और बलिदान व्यर्थ नहीं जाएगा।" - शीर्ष सुरक्षा अधिकारी
सुरक्षा एजेंसियों की उच्चस्तरीय बैठक और कॉम्बिंग ऑपरेशन
घटना के तुरंत बाद सेना, असम राइफल्स और खुफिया एजेंसियों के शीर्ष अधिकारियों ने एक उच्चस्तरीय बैठक की है। पूरे सीमावर्ती क्षेत्र को सील कर दिया गया है और उग्रवादियों की धरपकड़ के लिए बड़े पैमाने पर 'कॉम्बिंग ऑपरेशन' (सर्च अभियान) चलाया जा रहा है। म्यांमार सीमा से लगे होने के कारण इस बात की भी आशंका जताई जा रही है कि हमले के बाद उग्रवादी सीमा पार करके म्यांमार के जंगलों में छिप सकते हैं। इस संबंध में सीमा सुरक्षा से जुड़े अधिकारियों के बीच समन्वय भी तेज कर दिया गया है।
पूर्वोत्तर में उग्रवाद का बदलता परिदृश्य और सुरक्षा चुनौतियां
पिछले कुछ वर्षों में भारत सरकार और सुरक्षा बलों की कड़ी कार्रवाई के कारण पूर्वोत्तर राज्यों में उग्रवाद की घटनाओं में काफी कमी आई थी। हालांकि, म्यांमार की मौजूदा आंतरिक स्थिति और सीमावर्ती इलाकों की संवेदनशीलता के चलते सुरक्षा बलों के लिए यह क्षेत्र अब भी एक बड़ी चुनौती बना हुआ है। म्यांमार सीमा पर सक्रिय विभिन्न उग्रवादी गुट अक्सर सुरक्षा बलों को नुकसान पहुंचाने की फिराक में रहते हैं। इस ताजा हमले ने एक बार फिर सीमा सुरक्षा और खुफिया तंत्र को और अधिक चाक-चौबंद करने की आवश्यकता को रेखांकित कर दिया है।








