गुवाहाटी में सीजेपी नेताओं की गिरफ्तारी और रिहाई के बाद गरमाई सियासत
देश की राजनीति में इन दिनों कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) और पूर्वोत्तर के राज्यों के बीच समीकरण तेजी से बदल रहे हैं। हाल ही में असम की राजधानी गुवाहाटी से एक बड़ी खबर सामने आई, जहां पार्टी के सह-संयोजक आशुतोष रांका और उनके दर्जनों कार्यकर्ताओं को असम पुलिस ने अपनी हिरासत में ले लिया था। हालांकि, देर रात पुलिस ने सभी को रिहा कर दिया, लेकिन इस कार्रवाई के बाद राज्य में राजनीतिक पारा चढ़ गया है। रिहाई के बाद से ही सीजेपी और असम सरकार के बीच जुबानी जंग थमने का नाम नहीं ले रही है।
यह पूरा घटनाक्रम तब शुरू हुआ जब सीजेपी के नेता पूर्वोत्तर राज्यों के दौरे पर पहुंचे थे। पार्टी का मुख्य उद्देश्य देश के विभिन्न हिस्सों में सरकारी स्कूलों की बदहाल स्थिति को उजागर करना और युवाओं के मुद्दों को उठाना बताया जा रहा है। पार्टी नेताओं का दावा है कि वे स्थानीय स्तर पर लोगों से जुड़कर शिक्षा व्यवस्था की पोल खोल रहे हैं, जिससे सत्ताधारी दल असहज महसूस कर रहा है। इसी सिलसिले में गुवाहाटी में एक निजी बैठक आयोजित की गई थी, जिससे ठीक पहले पुलिस ने यह कार्रवाई की।
हिरासत से छूटने के बाद आशुतोष रांका ने खुलकर अपनी बात रखी और असम प्रशासन की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े किए। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि उनकी पार्टी जनता के हक की लड़ाई लड़ने से पीछे नहीं हटेगी और ऐसे कदमों से उनकी आवाज को दबाया नहीं जा सकता। रिहाई के तुरंत बाद उन्होंने अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर एक तस्वीर साझा कर विरोध का एक नया तरीका भी अपनाया, जिसने राजनीतिक गलियारों में चर्चाओं का बाजार गर्म कर दिया है।
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पुलिस की कार्रवाई को बताया गैर-कानूनी, आशुतोष रांका का तीखा पलटवार
हिरासत से बाहर आने के बाद मीडिया और सोशल मीडिया के जरिए आशुतोष रांका ने असम सरकार पर करारा प्रहार किया। उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिस प्रशासन ने पूरी तरह से मनमानी करते हुए उन्हें और उनके साथियों को गैर-कानूनी तरीके से हिरासत में लिया था। उनके मुताबिक, वे लोग किसी भी नियम का उल्लंघन नहीं कर रहे थे और एक शांतिपूर्ण बैठक में हिस्सा ले रहे थे, लेकिन पुलिस ने जानबूझकर माहौल खराब करने की कोशिश की।
आशुतोष रांका ने सोशल मीडिया पर अपनी एक डिनर की तस्वीर साझा करते हुए मुख्यमंत्री पर सीधा निशाना साधा। उन्होंने लिखा कि कॉकरोच अभी तो अपनी शुरुआत कर रहे हैं और वे पीछे हटने वाले नहीं हैं। सीजेपी नेताओं का कहना है कि वे लगातार देश के दूरदराज इलाकों और सरकारी स्कूलों की जमीनी हकीकत सामने ला रहे हैं, जो सरकार को रास नहीं आ रहा है।
"हिमंत बिस्वा सरमा, असम के कॉकरोच अभी तो बस शुरुआत कर रहे हैं! पुलिस के दम पर उछलने वाले लोग अक्सर डरपोक ही होते हैं।" — आशुतोष रांका, सह-संयोजक, सीजेपी
मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा और सीजेपी के बीच सोशल मीडिया पर वार-पलटवार
इस पूरे घटनाक्रम के दौरान असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा और सीजेपी नेताओं के बीच सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर तीखी बहस देखने को मिली। मुख्यमंत्री की तरफ से एक सरकारी स्कूल का वीडियो साझा किए जाने के बाद मामले ने एक अलग ही मोड़ ले लिया। सीजेपी नेताओं ने उस वीडियो पर प्रतिक्रिया देते हुए राज्य के अन्य स्कूलों की स्थिति पर सवाल उठाए और सरकार से सुधार की मांग की।
बहस तब और बढ़ गई जब सीएम सरमा के एक तंजिया पोस्ट पर आशुतोष रांका ने आक्रामक तेवर दिखाते हुए जवाब दिया। इस ऑनलाइन जंग में सीजेपी के संस्थापक अभिजीत दीपके भी कूद पड़े। उन्होंने साल 2014 की एक पुरानी मीडिया रिपोर्ट का हवाला देते हुए पुराने घोटालों का जिक्र किया और वर्तमान राजनीतिक समीकरणों पर कड़े सवाल खड़े किए। इस तरह की तीखी बयानबाजी ने इस विवाद को राष्ट्रीय स्तर पर सुर्खियों में ला दिया है।
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रदर्शन की तैयारी और पूर्वोत्तर का एजेंडा
सिर्फ असम के स्थानीय मुद्दे ही नहीं, बल्कि सीजेपी ने राष्ट्रीय स्तर पर भी अपने तेवर कड़े कर लिए हैं। पार्टी के नेताओं ने साफ कर दिया है कि वे आगामी 2 अक्टूबर को मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ होने वाले प्रदर्शन की तैयारियों में जुटे हैं। उनका आरोप है कि मतदाता सूचियों से बड़े पैमाने पर नाम हटाए जाने से देश के करोड़ों नागरिकों के अधिकारों का हनन हुआ है।
सीजेपी के मुताबिक, वे पूर्वोत्तर के सभी राज्यों में अपनी पहुंच बढ़ाने की योजना बना रहे हैं और वहां के युवाओं तथा छात्रों का उन्हें अच्छा समर्थन मिल रहा है। पार्टी नेताओं का कहना है कि वे क्षेत्रीय मुद्दों को प्रमुखता से उठाएंगे और निर्वाचन आयोग से लेकर तमाम सरकारी तंत्रों में पारदर्शिता की मांग करेंगे। असम में हुई इस हालिया घटना के बाद पार्टी का यह अभियान और अधिक आक्रामक होने के संकेत मिल रहे हैं।
निष्कर्ष: आगे क्या होगा राजनीतिक रुख?
असम पुलिस द्वारा सीजेपी नेताओं को हिरासत में लेने और फिर रिहा करने की यह घटना आने वाले दिनों में और तूल पकड़ सकती है। एक तरफ जहां विपक्षी और नए राजनीतिक दल इसे दमनकारी नीति बता रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ प्रशासनिक और राजनीतिक स्तर पर भी जवाब-तलब का दौर जारी है। यह देखना दिलचस्प होगा कि सीजेपी का यह पूर्वोत्तर दौरा और मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ प्रस्तावित आंदोलन आने वाले समय में राजनीति में क्या नए रंग लेकर आता है।








