उत्तर कोरिया और दक्षिण कोरिया के बीच सरहद पर फिर भड़का तनाव
कोरियाई प्रायद्वीप में शांति की उम्मीदों को एक बार फिर बड़ा झटका लगा है। उत्तर कोरिया के सर्वोच्च नेता किम जोंग उन की बहन और देश की एक प्रमुख ताकतवर नेता किम यो जोंग ने दक्षिण कोरिया को खुली धमकी दी है। इस ताजा विवाद की जड़ दोनों देशों के बीच स्थित डिमिलिटराइज्ड जोन यानी डीएमजेड (DMZ) में हुए कुछ संदिग्ध धमाके हैं, जिनमें दक्षिण कोरियाई सेना के तीन जवान घायल हो गए थे। इस घटना के बाद से दोनों पड़ोसी देशों की सेनाएं हाई अलर्ट पर हैं और कूटनीतिक स्तर पर बयानबाजी का दौर तेज हो गया है।
सियोल की ओर से लगातार यह दावा किया जा रहा है कि सीमावर्ती इलाके में उत्तर कोरियाई सैनिकों ने सुनियोजित तरीके से लैंड माइन्स यानी बारूदी सुरंगें बिछाई हैं। दक्षिण कोरियाई ज्वाइंट चीफ्स ऑफ स्टाफ और रक्षा मंत्रालय का कहना है कि संयुक्त राष्ट्र कमान के साथ शुरुआती जांच में यह बात सामने आई है कि ये धमाके उत्तर कोरियाई हरकतों का नतीजा हो सकते हैं। हालांकि, प्योंगयांग ने इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए इसे एक सोची-समझी साजिश करार दिया है और स्पष्ट शब्दों में कह दिया है कि उत्तर कोरियाई सेना अपनी संप्रभुता के तहत सरहद पर किलेबंदी का काम कर रही है, जिसमें किसी भी प्रकार का बाहरी हस्तक्षेप बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
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किम यो जोंग का कड़ा तेवर: 'अगर गोली चली तो तुरंत होगा पलटवार'
उत्तर कोरिया की सत्ता के शीर्ष गलियारों में मजबूत पकड़ रखने वाली किम यो जोंग ने दक्षिण कोरियाई नेतृत्व को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि सियोल बेवजह के आरोप लगाकर तनाव को हवा दे रहा है। उन्होंने साफ कर दिया कि उत्तर कोरियाई सैनिक अंतरराष्ट्रीय सीमा का उल्लंघन नहीं कर रहे हैं, बल्कि वे अपने देश की रक्षा और सीमा सुरक्षा को पुख्ता करने के लिए निर्माण कार्य में जुटे हैं। किम यो जोंग ने अपनी चेतावनी में कहा कि यदि दक्षिण कोरियाई सेना ने सीमा पर गश्त या निर्माण कार्यों में लगे उत्तर कोरियाई जवानों पर जरा भी गोलीबारी की या चेतावनी दी, तो वहां तैनात सैन्य टुकड़ियां बिना किसी देरी के बेहद आक्रामक और कड़ी जवाबी कार्रवाई करेंगी।
जानकारों का मानना है कि किम यो जोंग के ये तीखे तेवर दोनों देशों के बीच दशकों पुराने शीत युद्ध के जख्मों को एक बार फिर हरा कर सकते हैं। दक्षिण कोरियाई रक्षा मंत्री कांग शिन-चुल ने संसद में दिए गए अपने एक बयान में पहले ही यह स्पष्ट कर दिया था कि यदि आधिकारिक जांच में उत्तर कोरिया की सीधी संलिप्तता साबित होती है, तो सियोल चुप नहीं बैठेगा और इस हरकत का माकूल जवाब देगा। रक्षा मंत्री ने यह भी कहा कि सरकार और सेना पूरी पारदर्शिता के साथ इस पूरे मामले की तह तक जाने का प्रयास कर रही है ताकि जनता के सामने सच आ सके।
"सेना का इस घटना से जुड़े किसी भी तथ्य को छिपाने का कोई इरादा नहीं है। जैसे ही संयुक्त जांच के अंतिम नतीजे सामने आएंगे, हम पारदर्शी तरीके से पूरी जनता और अंतरराष्ट्रीय समुदाय को इसकी जानकारी देंगे। यदि उत्तर कोरियाई बारूदी सुरंगों से यह हादसा हुआ है, तो सियोल अपनी रक्षा के लिए आनुपातिक कदम उठाने से पीछे नहीं हटेगा।" — कांग शिन-चुल, रक्षा मंत्री, दक्षिण कोरिया
डिमीलिटराइज्ड जोन में कैसे हुआ था वह रहस्यमयी धमाका?
यह पूरा विवाद 21 सितंबर को उस वक्त शुरू हुआ जब डिमिलिटराइज्ड जोन के पश्चिमी हिस्से में एक के बाद एक दो शक्तिशाली धमाके हुए। ये विस्फोट उस समय हुए जब दक्षिण कोरियाई सेना के अधिकारी घने जंगलों वाले दुर्गम इलाके में गश्ती मार्ग को साफ करने और संभावित खतरों की जांच के लिए रास्ता तैयार कर रहे थे। इस दुर्घटना में दक्षिण कोरियाई सेना के दो अधिकारी गंभीर रूप से घायल हो गए, जबकि एक अन्य जवान को मामूली चोटें आईं। घटना के तुरंत बाद दक्षिण कोरियाई सीमा सुरक्षा बलों ने इलाके को घेर लिया और गहन छानबीन शुरू कर दी।
दक्षिण कोरियाई सैन्य विशेषज्ञों के अनुसार, घटनास्थल से जो अवशेष और सुराग मिले हैं, उनमें टीएनटी और सिंथेटिक सामग्री के अंश पाए गए हैं। सेना का शुरुआती आकलन है कि ये निशान उत्तर कोरिया द्वारा बनाई जाने वाली एंटी-पर्सनल बारूदी सुरंगों की डिजाइन से काफी हद तक मेल खाते हैं। हालांकि, कुछ रक्षा विश्लेषकों का यह भी कहना है कि घटनास्थल पर मिले उपकरणों की सटीक प्रकृति का पता लगाना अभी भी पूरी तरह आसान नहीं है, क्योंकि जंगलों की कठिन भौगोलिक स्थिति के कारण जांच टीमों को तकनीकी बाधाओं का सामना करना पड़ रहा है।
दक्षिण कोरियाई राष्ट्रपति ली जे-म्युंग का सख्त रुख और पारदर्शी जांच के आदेश
सीमा पर बढ़ते तनाव और घरेलू राजनीतिक दबाव के बीच दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति ली जे-म्युंग ने इस पूरे मामले पर गंभीर रुख अपनाया है। राष्ट्रपति ने देश की राजधानी सोल में हुई एक उच्चस्तरीय कैबिनेट बैठक के दौरान सैन्य अधिकारियों को निर्देश दिए कि इस पूरे वाकये की निष्पक्ष और पारदर्शी जांच की जाए। राष्ट्रपति ली ने स्पष्ट किया कि संयुक्त राष्ट्र कमान (UNC) के साथ मिलकर इस बात का पुख्ता पता लगाया जाना चाहिए कि वास्तव में जमीन पर क्या हुआ था और इसके पीछे किसकी लापरवाही या साजिश थी।
विपक्षी दलों की ओर से सरकार पर यह आरोप लगाए जा रहे थे कि इस गंभीर सुरक्षा चूक को दबाने की कोशिश की जा रही है, जिसे राष्ट्रपति कार्यालय ने पूरी तरह खारिज कर दिया। राष्ट्रपति ने घायल हुए सैनिकों और उनके परिजनों के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त करते हुए भरोसा दिलाया कि देश की संप्रभुता और सैनिकों की सुरक्षा से किसी भी कीमत पर समझौता नहीं किया जाएगा। जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ रही है, कोरियाई प्रायद्वीप पर कूटनीतिक और सैन्य स्तर पर तनाव का पारा लगातार चढ़ता जा रहा है, जिससे अंतरराष्ट्रीय समुदाय की निगाहें भी इस संवेदनशील इलाके पर टिकी हुई हैं।








