मौसम का मिजाज बदलते ही क्यों बढ़ जाती है अस्थमा मरीजों की परेशानी?
जैसे ही मौसम करवट बदलता है, वातावरण में कई तरह के बदलाव देखने को मिलते हैं। ठंडी हवाओं का चलना, तापमान में उतार-चढ़ाव और नमी का स्तर कम-ज्यादा होना आम बात हो जाती है। इस दौरान सबसे ज्यादा परेशानी उन लोगों को उठानी पड़ती है जो अस्थमा या सांस से जुड़ी किसी अन्य बीमारी से जूझ रहे होते हैं। वायुमंडल में मौजूद धूल के कण, गाड़ियों का धुआं, परागकण यानी पोलेन और बढ़ता एयर पॉल्यूशन हवा में तैरते रहते हैं। जब सांस के मरीज इस दूषित हवा में सांस लेते हैं, तो उनके श्वास मार्ग सिकुड़ जाते हैं और उन्हें घुटन महसूस होने लगती है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस बदलते मौसम में शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता यानी इम्युनिटी भी थोड़ी कमजोर हो सकती है, जिसका सीधा असर श्वसन तंत्र पर पड़ता है। ऐसे में सिर्फ दवाओं पर निर्भर रहने के बजाय अपनी जीवनशैली और खानपान पर विशेष ध्यान देना बहुत जरूरी हो जाता है। यदि आप समय रहते सतर्क हो जाएं और अपने आसपास के वातावरण को शुद्ध रखें, तो इस मौसम के दुष्प्रभावों से काफी हद तक बचा जा सकता है।
सांस की तकलीफ से जूझ रहे लोगों को इस बात की हमेशा गांठ बांध लेनी चाहिए कि छोटी सी लापरवाही भी बड़े खतरे को बुलावा दे सकती है। इसलिए सुबह और शाम के वक्त जब हवा में ठंडक ज्यादा होती है, तब घर से बाहर निकलते वक्त चेहरे को ढककर रखें और डॉक्टर द्वारा दी गई सलाह का सख्ती से पालन करें।
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कलरफुल फल और हरी सब्जियां बनाएंगे आपके फेफड़ों को मजबूत
अस्थमा रोगियों के लिए रंग-बिरंगे फल और ताजी हरी सब्जियां किसी वरदान से कम नहीं हैं। इनमें भरपूर मात्रा में विटामिन सी, विटामिन ई और शक्तिशाली एंटीऑक्सीडेंट्स पाए जाते हैं, जो शरीर की कोशिकाओं को स्वस्थ रखने में मदद करते हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, जो लोग अपने रोजाना के भोजन में फलों और सब्जियों का सेवन अच्छी मात्रा में करते हैं, वे अपनी बीमारी पर बेहतर तरीके से नियंत्रण रख पाते हैं। आप अपनी डाइट में रोजाना सेब, संतरा, केला और पपीता जैसे आसानी से मिलने वाले फल शामिल कर सकते हैं।
इसके साथ ही, गाजर, पालक, ब्रोकली, टमाटर और अन्य पत्तेदार हरी सब्जियों को भी अपने मेनू का हिस्सा बनाएं। इन सभी चीजों में प्राकृतिक पोषक तत्व होते हैं जो श्वसन नली की सूजन को कम करने में मददगार साबित होते हैं। इन खाद्य पदार्थों को आप सलाद, सूप या सब्जी के रूप में खा सकते हैं। जितना अधिक प्राकृतिक और ताजा भोजन आप खाएंगे, आपके फेफड़े उतने ही मजबूत बनेंगे और मौसमी बदलावों से लड़ने की उनकी क्षमता बढ़ेगी।
बच्चों और बुजुर्गों, जो अस्थमा से पीड़ित हैं, उन्हें विशेष रूप से जंक फूड से दूर रखकर ऐसे पौष्टिक आहार दिए जाने चाहिए। फलों और सब्जियों का नियमित सेवन न केवल अस्थमा को नियंत्रित करता है, बल्कि पूरे शरीर को ऊर्जावान भी बनाए रखता है।
फाइबर से भरपूर दालें और ड्राई फ्रूट्स देंगे शरीर को अंदरूनी ताकत
फाइबर युक्त चीजें पाचन तंत्र के साथ-साथ सांस के मरीजों के लिए भी बहुत गुणकारी मानी जाती हैं। अपने रोजमर्रा के भोजन में विभिन्न प्रकार की दालें, छोले, राजमा और अन्य फलियों को शामिल करना चाहिए। इन चीजों में फाइबर के साथ-साथ उच्च गुणवत्ता वाला प्रोटीन, जरूरी विटामिंस और मिनरल्स भी प्रचुर मात्रा में मिलते हैं। इसके अलावा, बादाम, अखरोट और सूरजमुखी या कद्दू के बीजों को सीमित मात्रा में अपनी डाइट का हिस्सा बनाया जा सकता है। ये नट्स और सीड्स शरीर को अंदर से मजबूत बनाते हैं।
जो लोग मांसाहारी हैं, वे अपने भोजन में मछली को भी जगह दे सकते हैं। ऑयली फिश जैसे सैल्मन, सार्डिन और मैकरल में ओमेगा-3 फैटी एसिड्स पाए जाते हैं, जो सूजनरोधी गुणों से भरपूर होते हैं। हालांकि, यह भी ध्यान रखना जरूरी है कि अस्थमा के इलाज के लिए केवल फिश ऑयल सप्लीमेंट्स पर पूरी तरह निर्भर नहीं हुआ जा सकता।
"बदलते मौसम में अस्थमा रोगियों को अपने खानपान पर विशेष ध्यान देना चाहिए। फाइबर, विटामिंस और एंटीऑक्सीडेंट्स से भरपूर डाइट फेफड़ों की कार्यप्रणाली को बेहतर बनाने में मदद करती है, लेकिन यह किसी भी सूरत में डॉक्टर की दवाइयों का विकल्प नहीं हो सकती।"— डॉ. अग्रवाल, वरिष्ठ चिकित्सक, यशोदा अस्पताल, गाजियाबाद
किन चीजों से करना चाहिए परहेज और किन बातों का रखें खास ख्याल
स्वस्थ आहार लेने के साथ-साथ यह जानना भी उतना ही जरूरी है कि किन चीजों से आपको दूरी बनानी है। बहुत ज्यादा फास्ट फूड, तली-भुनी और मसालेदार चीजें, प्रोसेस्ड मीट, अत्यधिक चीनी और सैचुरेटेड फैट से भरपूर खाद्य पदार्थों का सेवन आपके स्वास्थ्य के लिए हानिकारक साबित हो सकता है। ऐसी चीजें शरीर में सूजन और सुस्ती बढ़ाती हैं, जिससे सांस की तकलीफ और गंभीर हो सकती है। इसलिए अपनी डेली डाइट से इन अनहेल्दी चीजों को धीरे-धीरे बाहर कर देना ही बुद्धिमानी है।
इसके अलावा, अस्थमा के मरीजों को अपने डॉक्टर की सलाह के अनुसार हमेशा अपना इन्हेलर अपने पास रखना चाहिए। जरा सी भी लापरवाही या सांस फूलने की समस्या, लगातार खांसी या गंभीर अटैक के लक्षण दिखाई देने पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना बेहद जरूरी है। याद रखें कि सही डाइट और समय पर ली गई दवाइयां ही आपको स्वस्थ और सुरक्षित रख सकती हैं।







