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देशपढ़ने में समय: 3 मिनट

एक कालीन और तीन पीढ़ियां: बच्चन परिवार के इन चेहरों को धागों से उकेरने में लग गए 6 महीने, हुनर देख हैरान हुए लोग

उत्तर प्रदेश के हस्तशिल्प और कालीन नगरी में एक ऐसा अनोखा कालीन तैयार किया गया है, जिस पर बच्चन परिवार की तीन पीढ़ियों के चेहरे उकेरे गए हैं। इस शानदार कलाकृति को बनाने में बुनकरों को छह महीने का कड़ा परिश्रम करना पड़ा है।
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नेशनल डेस्क, द फ्रीलांस
राष्ट्रीय संपादकीय ब्यूरो•7 अक्टूबर 2026 • अपडेटेड•48
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एक कालीन और तीन पीढ़ियां: बच्चन परिवार के इन चेहरों को धागों से उकेरने में लग गए 6 महीने, हुनर देख हैरान हुए लोग
📷 एक कालीन और तीन पीढ़ियां: बच्चन परिवार के इन चेहरों को धागों से उकेरने में लग गए 6 महीने, हुनर देख हैरान हुए लोग — मुख्य घटनाक्रमफोटो साभार: रॉयटर्स / एजेंसीज़ / सोशल मीडिया

खबर की बड़ी बातें (Key Highlights)

  • हरिवंश राय बच्चन, अमिताभ बच्चन और अभिषेक बच्चन की तस्वीर एक ही कालीन पर उकेरी गई है।
  • इसे तैयार करने में शुद्ध ऊन (प्योर वूल) का इस्तेमाल किया गया है और इसमें करीब 1 लाख रुपये की लागत आई है।
  • अंतर्राष्ट्रीय एक्सपो में इस अनूठी कलाकृति ने विदेशी खरीदारों का भी खूब ध्यान खींचा है।

भारत की सांस्कृतिक और पारंपरिक कला का दायरा सिर्फ कागजों या कैनवास तक सीमित नहीं है, बल्कि धागों और कला की बारीकियों से भी इतिहास रचा जाता है। इन दिनों उत्तर प्रदेश के एक प्रसिद्ध कालीन एक्सपो में एक ऐसी नायाब कलाकृति चर्चा का विषय बनी हुई है, जिसे देखकर हर कोई मंत्रमुग्ध हो रहा है। इस अनोखे कालीन पर किसी आम डिजाइन की बजाय भारतीय सिनेमा और साहित्य के दिग्गजों यानी बच्चन परिवार की तीन पीढ़ियों के चेहरों को बेहद खूबी के साथ उकेरा गया है।

एक फ्रेम में साहित्य और सिनेमा के तीन दिग्गज

इस विशेष कालीन की बनावट कुछ ऐसी है कि पहली नजर में यह एक सामान्य कालीन लग सकता है, लेकिन जैसे ही कोई इसके करीब जाता है, इस पर एक के बाद एक तीन चेहरे उभरने लगते हैं। इस कलाकृति में सबसे पहले महान कवि हरिवंश राय बच्चन का चेहरा नजर आता है, जिसके बाद सदी के महानायक अमिताभ बच्चन और फिर अभिनेता अभिषेक बच्चन के चेहरे दिखाई देते हैं। एक ही कालीन पर तीन पीढ़ियों की इस कहानी को उतारना किसी चुनौती से कम नहीं था, जिसे स्थानीय बुनकरों ने अपनी उम्दा कलाकारी से संभव कर दिखाया है।

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छह महीने की मेहनत और एक लाख रुपये की लागत

इस नायाब कालीन को तैयार करने में ग्लोबल ओवरसीज कंपनी के बुनकरों को लगभग छह महीने का समय लगा है। कंपनी के निर्यातक के अनुसार, यह कालीन पूरी तरह हैंडनॉटेड (हाथ से गांठें लगाकर) है और इसमें पूरी तरह शुद्ध ऊन (प्योर वूल) का इस्तेमाल किया गया है। इसे बनाने में करीब एक लाख रुपये की लागत आई है। हालांकि, फिलहाल इस शानदार कलाकृति को व्यावसायिक बिक्री के लिए नहीं रखा गया है, बल्कि इसे एक्सपो में केवल शोकेस और भारतीय कारीगरी का प्रदर्शन करने के लिए प्रदर्शित किया गया है।

विदेशी खरीदार भी हुए कायल

इस एक्सपो में केवल देश ही नहीं बल्कि विदेशी खरीदार भी पहुंचे, जिनमें ईरानी खरीदार भी शामिल थे। अमिताभ बच्चन की इस अनूठी तस्वीर को देखकर विदेशी खरीदारों को उनकी मशहूर फिल्म 'शोले' की यादें ताजा हो गईं। भदोही के बुनकरों ने साबित कर दिया है कि उनके धागों में केवल फर्श सजाने की क्षमता नहीं है, बल्कि वे इतिहास, भावनाएं और पूरी पीढ़ियों की कहानी को जीवंत कर सकते हैं।

डिस्क्लेमर एवं साभार

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर वायरल इस वीडियो के दावों की सत्यता की 'The Freelance' स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं करता है। यह वीडियो सोशल मीडिया पर व्यापक चर्चा का विषय बना हुआ है। वीडियो साभार: संबंधित सोशल मीडिया हैंडल / क्रिएटर।

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