होम/देश/महंगाई के इस दौर में बैंक सखियों का बड़ा ऐलान: मानदेय 20 हजार करने और नौकरी पक्की करने की उठी मांग
देशपढ़ने में समय: 6 मिनट

महंगाई के इस दौर में बैंक सखियों का बड़ा ऐलान: मानदेय 20 हजार करने और नौकरी पक्की करने की उठी मांग

राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत काम करने वाली बैंक सखियों ने मानदेय बढ़ाने और अपनी नौकरी को स्थायी करने की मांग उठाई है। उन्होंने प्रशासन को ज्ञापन सौंपकर कम वेतन और सुविधाओं के अभाव में आ रही दिक्कतों से अवगत कराया है।
The Freelance ब्यूरो
TheFreelance ब्यूरो
25 सितंबर 2026 • अपडेटेड
🌐Read in English →
शेयर करें:
महंगाई के इस दौर में बैंक सखियों का बड़ा ऐलान: मानदेय 20 हजार करने और नौकरी पक्की करने की उठी मांग
📷 महंगाई के इस दौर में बैंक सखियों का बड़ा ऐलान: मानदेय 20 हजार करने और नौकरी पक्की करने की उठी मांग — मुख्य घटनाक्रमफोटो साभार: रॉयटर्स / एजेंसीज़ / सोशल मीडिया

खबर की बड़ी बातें (Key Highlights)

  • बैंक सखियों ने मानदेय बढ़ाकर 20 हजार रुपये प्रतिमाह करने की मांग की है।
  • स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं को बैंकिंग सेवाओं से जोड़ती हैं बैंक सखियां।
  • बैंक कर्मचारियों की तरह आवश्यक सुविधाएं और सुरक्षा बीमा देने की भी उठी मांग।
  • ब्लॉक स्तर पर नए संगठन का गठन कर विनय शाक्य को अध्यक्ष चुना गया।

ग्रामीण बैंकिंग व्यवस्था की रीढ़ हैं बैंक सखियां

देश के ग्रामीण इलाकों में आर्थिक सशक्तिकरण और वित्तीय समावेश को बढ़ावा देने में बैंक सखियों की भूमिका बेहद अहम होती है। गांव-गांव तक बैंकिंग सुविधाओं को पहुंचाने और जरूरतमंदों को वित्तीय योजनाओं से जोड़ने का जिम्मा उठाने वाली इन महिला कार्यकर्ताओं ने अब अपने अधिकारों के लिए आवाज बुलंद करना शुरू कर दिया है। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (NRLM) के दायरे में काम करने वाली बैंक सखियों का कहना है कि वे जमीनी स्तर पर दिन-रात मेहनत करती हैं, लेकिन इसके बावजूद उन्हें जो आर्थिक लाभ मिलना चाहिए, वह बेहद कम है।

हाल ही में स्थानीय प्रशासनिक अधिकारियों को एक विस्तृत ज्ञापन सौंपा गया है, जिसमें उनकी कई प्रमुख और पुरानी मांगों को पूरा करने की गुहार लगाई गई है। बैंक सखियों का स्पष्ट कहना है कि महंगाई के इस दौर में मौजूदा आय से परिवार का गुजारा चलाना और खुद की आजीविका चलाना बेहद कठिन होता जा रहा है। ऐसे में सरकार और संबंधित विभागों को उनकी समस्याओं पर गंभीरता से विचार करना चाहिए ताकि वे बिना किसी आर्थिक तनाव के अपना काम जारी रख सकें।

विज्ञापन • ADVERTISEMENT

संबंधित खबरें

न्याय के मंदिर में तमाशा: कचहरी परिसर में भिड़े पति-पत्नी, सरेआम हाथापाई का वीडियो हुआ वायरल

न्याय के मंदिर में तमाशा: कचहरी परिसर में भिड़े पति-पत्नी, सरेआम हाथापाई का वीडियो हुआ वायरल

किसानों की आर्थिक तंगी दूर करने के लिए बड़ा कदम: छह लाख तक का कर्ज मात्र छह प्रतिशत ब्याज पर, जानिए किसे मिलेगा सीधा लाभ

किसानों की आर्थिक तंगी दूर करने के लिए बड़ा कदम: छह लाख तक का कर्ज मात्र छह प्रतिशत ब्याज पर, जानिए किसे मिलेगा सीधा लाभ

हर घर नल योजना का कमाल: दूरदराज से पानी ढोने की मजबूरी खत्म, ग्रामीण महिलाओं का जीवन हुआ आसान

हर घर नल योजना का कमाल: दूरदराज से पानी ढोने की मजबूरी खत्म, ग्रामीण महिलाओं का जीवन हुआ आसान

यूपी एमएलसी चुनाव के लिए बीजेपी का मास्टरप्लान: लोकसभा और विधानसभा की तर्ज पर उतरेगी पार्टी, कार्यकर्ताओं को मिले कड़े निर्देश

यूपी एमएलसी चुनाव के लिए बीजेपी का मास्टरप्लान: लोकसभा और विधानसभा की तर्ज पर उतरेगी पार्टी, कार्यकर्ताओं को मिले कड़े निर्देश

सफेदपोश दुनिया का काला सच: क्या वाकई आसानी से मिल जाता है भरोसा या ग्लैमर इंडस्ट्री में हर तरफ है शक का पहरा?

सफेदपोश दुनिया का काला सच: क्या वाकई आसानी से मिल जाता है भरोसा या ग्लैमर इंडस्ट्री में हर तरफ है शक का पहरा?

प्रकृति का अजब करिश्मा: जिस सांप से कांपता है मेंढक, उसी की पीठ पर बैठकर की सवारी, वीडियो वायरल

प्रकृति का अजब करिश्मा: जिस सांप से कांपता है मेंढक, उसी की पीठ पर बैठकर की सवारी, वीडियो वायरल

महज 2 करोड़ में बनी इस फिल्म ने तोड़े सारे रिकॉर्ड: लागत से 180 गुना कमाई, 100 करोड़ की OTT डील पर आया बड़ा बयान

महज 2 करोड़ में बनी इस फिल्म ने तोड़े सारे रिकॉर्ड: लागत से 180 गुना कमाई, 100 करोड़ की OTT डील पर आया बड़ा बयान

शिक्षकों की भर्ती में स्थानीय निकायों का दखल क्यों है अनुचित? विशेषज्ञों ने उठाए बड़े सवाल

शिक्षकों की भर्ती में स्थानीय निकायों का दखल क्यों है अनुचित? विशेषज्ञों ने उठाए बड़े सवाल

मानदेय बढ़ाने और नौकरी स्थायी करने की प्रमुख मांग

सौंपे गए ज्ञापन में बैंक सखियों की तरफ से पांच सूत्रीय मांगें प्रमुखता से रखी गई हैं। इनमें सबसे अहम मांग उनके मानदेय को बढ़ाकर 20 हजार रुपये प्रतिमाह करने की है। इसके साथ ही उन्होंने अपनी सेवाओं को स्थायी करने और बैंक कर्मचारियों की तर्ज पर अन्य सभी आवश्यक सुविधाएं मुहैया कराने की भी पुरजोर मांग उठाई है। बैंक सखियों का तर्क है कि वे बैंकों के रोजाना के कामकाज, क्रेडिट लिंकेज, समूहों के गठन और रिकवरी जैसी जटिल प्रक्रियाओं में पूरी निष्ठा से सहयोग करती हैं, लेकिन उसके एवज में मिलने वाला मेहनताना उनकी मेहनत के आगे बहुत कम है।

महिला कार्यकर्ताओं ने इस बात पर भी जोर दिया कि उन्हें फील्ड में काम करने के दौरान कई तरह की चुनौतियों का सामना करना पड़ता है, इसलिए उनकी आर्थिक सुरक्षा का भी पूरा इंतजाम होना चाहिए। उन्होंने सरकार से मांग की है कि उनका जीवन बीमा और दुर्घटना बीमा अनिवार्य रूप से कराया जाए ताकि किसी भी अनहोनी की स्थिति में उनके आश्रितों को संबल मिल सके।

संगठन का गठन और एकजुटता की हुंकार

अपनी इन तमाम जायज मांगों को मजबूती से आगे बढ़ाने और प्रशासनिक स्तर पर पैरवी करने के लिए बैंक सखियों ने ब्लॉक स्तर पर एक नए संगठन का गठन किया है। संगठन के माध्यम से सभी महिलाओं ने एकजुट होकर अपनी आवाज को बुलंद करने का संकल्प लिया है। हाल ही में हुई बैठक के दौरान सर्वसम्मति से पदाधिकारियों का चुनाव किया गया, जिसमें विनय शाक्य को संगठन का अध्यक्ष चुना गया। इसके अलावा अनुराधा देवी को सचिव और अल्का देवी को कोषाध्यक्ष की जिम्मेदारी सौंपी गई है।

नवनिर्वाचित पदाधिकारियों का कहना है कि यदि उनकी मांगों पर जल्द ही सकारात्मक रुख नहीं अपनाया गया, तो वे अपने आंदोलन को और अधिक व्यापक बनाने के लिए बाध्य होंगी। इस बैठक में पिंकी देवी, मीनू दुबे और सीमा समेत दर्जनों बैंक सखियां उपस्थित रहीं, जिन्होंने एकजुट होकर हस्ताक्षरयुक्त ज्ञापन प्रशासनिक अधिकारियों को सौंपा और अपनी समस्याओं के शीघ्र समाधान की उम्मीद जताई।

"हम ग्रामीण अंचलों में बैंक और जनता के बीच एक मजबूत सेतु का काम करती हैं। बावजूद इसके, हमारी आर्थिक स्थिति बेहद दयनीय है। सरकार को हमारी मेहनत का सम्मान करते हुए मानदेय में उचित वृद्धि करनी चाहिए और हमें जरूरी सुरक्षा कवच प्रदान करना चाहिए ताकि हम पूरी ईमानदारी से अपनी सेवाएं दे सकें।" — विनय शाक्य, अध्यक्ष, बैंक सखी संगठन

वित्तीय समावेश में बैंक सखियों का योगदान

देश के ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों में वित्तीय साक्षरता और बैंकिंग सेवाओं की पहुंच को आसान बनाने में बैंक सखियों का योगदान किसी से छिपा नहीं है। खासकर ग्रामीण महिलाओं को बैंकों की औपचारिक कार्यप्रणाली से जोड़ने, उनके बचत खाते खुलवाने और सरकारी योजनाओं का लाभ सीधे उनके खातों तक पहुंचाने में ये महिलाएं अग्रिम पंक्ति की योद्धा की तरह काम करती हैं। स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से महिलाओं को स्वरोजगार के लिए लोन दिलाने और समय पर उसकी रिकवरी करवाने में भी इनका सहयोग प्रशासनिक मशीनरी के लिए बेहद मददगार साबित होता है।

विशेषज्ञों का भी मानना है कि यदि जमीनी स्तर पर काम करने वाले इन कार्यकर्ताओं को वित्तीय रूप से मजबूत और संतुष्ट नहीं रखा गया, तो ग्रामीण विकास योजनाओं के क्रियान्वयन की गति धीमी हो सकती है। यही वजह है कि बैंक सखियों द्वारा उठाई जा रही ये मांगें केवल उनके व्यक्तिगत हितों से जुड़ी नहीं हैं, बल्कि यह ग्रामीण अर्थव्यवस्था के सुचारू संचालन से भी सीधा ताल्लुक रखती हैं।

प्रशासनिक प्रतिक्रिया और आगे की राह

बैंक सखियों की तरफ से ज्ञापन मिलने के बाद प्रशासनिक अधिकारियों ने उनकी बातों को ध्यानपूर्वक सुना है और उच्च स्तर पर इस मामले को भेजने का आश्वासन भी दिया है। हालांकि, अभी तक सरकार या संबंधित विभाग की ओर से कोई आधिकारिक आदेश जारी नहीं किया गया है, लेकिन इस ज्ञापन के बाद से विभागीय गलियारों में चर्चाएं तेज हो गई हैं। बैंक सखियों ने स्पष्ट कर दिया है कि वे अपनी मांगों को लेकर चुप बैठने वाली नहीं हैं और यदि समय रहते उनकी समस्याओं का समाधान नहीं हुआ, तो वे अपनी आवाज को और बुलंद करेंगी।

आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि सरकार इन महिला कार्यकर्ताओं की मांगों पर क्या रुख अपनाती है और उनके मानदेय तथा सुरक्षा को लेकर क्या ठोस कदम उठाए जाते हैं। फिलहाल, इस पूरे घटनाक्रम ने ग्रामीण इलाकों में काम करने वाले मानदेय कर्मियों के अधिकारों और उनकी आर्थिक सुरक्षा को लेकर एक बार फिर से एक बड़ी बहस छेड़ दी है।

द फ्रीलांस पत्रकारिता नीति (Editorial Commitment):हम निष्पक्ष, सटीक और तथ्यात्मक पत्रकारिता के लिए प्रतिबद्ध हैं। यह समाचार रिपोर्ट विभिन्न प्रमाणित समाचार एजेंसियों, आधिकारिक बयानों और स्थानीय संवाददाताओं से प्राप्त इनपुट के आधार पर तैयार की गई है।
विज्ञापन एवं अनुशंसित सामग्री • RECOMMENDED

संबंधित खबरें (Related Articles)

न्याय के मंदिर में तमाशा: कचहरी परिसर में भिड़े पति-पत्नी, सरेआम हाथापाई का वीडियो हुआ वायरलNATIONAL

न्याय के मंदिर में तमाशा: कचहरी परिसर में भिड़े पति-पत्नी, सरेआम हाथापाई का वीडियो हुआ वायरल

25 सित॰
किसानों की आर्थिक तंगी दूर करने के लिए बड़ा कदम: छह लाख तक का कर्ज मात्र छह प्रतिशत ब्याज पर, जानिए किसे मिलेगा सीधा लाभNATIONAL

किसानों की आर्थिक तंगी दूर करने के लिए बड़ा कदम: छह लाख तक का कर्ज मात्र छह प्रतिशत ब्याज पर, जानिए किसे मिलेगा सीधा लाभ

25 सित॰
हर घर नल योजना का कमाल: दूरदराज से पानी ढोने की मजबूरी खत्म, ग्रामीण महिलाओं का जीवन हुआ आसानNATIONAL

हर घर नल योजना का कमाल: दूरदराज से पानी ढोने की मजबूरी खत्म, ग्रामीण महिलाओं का जीवन हुआ आसान

25 सित॰
यूपी एमएलसी चुनाव के लिए बीजेपी का मास्टरप्लान: लोकसभा और विधानसभा की तर्ज पर उतरेगी पार्टी, कार्यकर्ताओं को मिले कड़े निर्देशNATIONAL

यूपी एमएलसी चुनाव के लिए बीजेपी का मास्टरप्लान: लोकसभा और विधानसभा की तर्ज पर उतरेगी पार्टी, कार्यकर्ताओं को मिले कड़े निर्देश

25 सित॰
सफेदपोश दुनिया का काला सच: क्या वाकई आसानी से मिल जाता है भरोसा या ग्लैमर इंडस्ट्री में हर तरफ है शक का पहरा?NATIONAL

सफेदपोश दुनिया का काला सच: क्या वाकई आसानी से मिल जाता है भरोसा या ग्लैमर इंडस्ट्री में हर तरफ है शक का पहरा?

25 सित॰
प्रकृति का अजब करिश्मा: जिस सांप से कांपता है मेंढक, उसी की पीठ पर बैठकर की सवारी, वीडियो वायरलNATIONAL

प्रकृति का अजब करिश्मा: जिस सांप से कांपता है मेंढक, उसी की पीठ पर बैठकर की सवारी, वीडियो वायरल

25 सित॰
महज 2 करोड़ में बनी इस फिल्म ने तोड़े सारे रिकॉर्ड: लागत से 180 गुना कमाई, 100 करोड़ की OTT डील पर आया बड़ा बयानNATIONAL

महज 2 करोड़ में बनी इस फिल्म ने तोड़े सारे रिकॉर्ड: लागत से 180 गुना कमाई, 100 करोड़ की OTT डील पर आया बड़ा बयान

25 सित॰
शिक्षकों की भर्ती में स्थानीय निकायों का दखल क्यों है अनुचित? विशेषज्ञों ने उठाए बड़े सवालNATIONAL

शिक्षकों की भर्ती में स्थानीय निकायों का दखल क्यों है अनुचित? विशेषज्ञों ने उठाए बड़े सवाल

25 सित॰