रेलवे कर्मचारियों के लिए ऐतिहासिक बदलाव, यूनिफाइड पेंशन स्कीम का नया खाका तैयार
भारतीय रेलवे में अपनी सेवाएं दे रहे लाखों सरकारी कर्मचारियों के लिए एक बेहद राहत भरी और बड़ी खबर सामने आई है। रेल मंत्रालय ने लंबे समय से प्रतीक्षित यूनिफाइड पेंशन स्कीम यानी यूपीएस को लेकर अपना आधिकारिक और विस्तृत फ्रेमवर्क जारी कर दिया है। रेलवे बोर्ड की तरफ से 'रेलवे सेवा (राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली के तहत एकीकृत पेंशन योजना का कार्यान्वयन) नियम, 2026' को भारत के राजपत्र में विधिवत प्रकाशित कर दिया गया है।
यह नया नियम उन तमाम नियमित रेलकर्मियों पर सीधे तौर पर लागू होगा जो 1 जनवरी 2004 या उसके बाद रेलवे सेवा से जुड़े हैं और वर्तमान समय में नेशनल पेंशन सिस्टम का हिस्सा बने हुए हैं। इस नई अधिसूचना के आने के बाद से पेंशन निर्धारण, स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति और स्कीम बदलने से जुड़े तमाम असमंजस पूरी तरह से साफ हो गए हैं, जिससे कर्मचारियों में खुशी की लहर है।
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दस साल की नौकरी पर निश्चित पेंशन और बीस साल पर वीआरएस का अधिकार
रेलवे के नए और संशोधित फ्रेमवर्क के मुताबिक, यदि कोई रेल कर्मचारी न्यूनतम 10 साल की नियमित सेवा का कार्यकाल सफलतापूपवर्क पूरा कर लेता है, तो वह हर महीने कम से कम 10,000 रुपये की न्यूनतम सुनिश्चित पेंशन पाने का पात्र बन जाएगा। यह प्रावधान उन कर्मचारियों के लिए बहुत बड़ा सहारा है जो किसी कारणवश लंबी सेवा नहीं कर पाते हैं।
वहीं दूसरी ओर, जो कर्मचारी 25 साल की पूरी सेवा का कार्यकाल बिना किसी बाधा के पूरा करेंगे, उन्हें उनके रिटायरमेंट से ठीक पहले के पिछले 12 महीनों के औसत बेसिक वेतन का पूरा 50 प्रतिशत हिस्सा पेंशन के रूप में मिलेगा। इसके साथ ही, कर्मचारियों के पास यह भी सुविधा होगी कि वे 25 साल का इंतजार किए बिना 20 साल की नौकरी पूरी होने पर स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति यानी वीआरएस का रास्ता चुन सकते हैं। हालांकि, वीआरएस लेने की स्थिति में पेंशन का वास्तविक भुगतान तुरंत नहीं शुरू होकर कर्मचारी की सामान्य रिटायरमेंट की तय तारीख से ही शुरू होगा।
योगदान का नया ढांचा और सैलरी से कटने वाली राशि का गणित
नया पेंशन ढांचा पूरी तरह से 'डिफाइंड कंट्रीब्यूशन' यानी एक निश्चित योगदान के सिद्धांत पर काम करेगा। इस व्यवस्था के तहत पैसों का निवेश और प्रबंधन दो अलग-अलग हिस्सों में बंटा होगा। कर्मचारियों को यह समझने की जरूरत है कि उनका मासिक योगदान किस तरह से उनके भविष्य को सुरक्षित करेगा।
विशेषज्ञों के अनुसार, यह योजना कर्मचारियों को बाजार के जोखिमों से बचाते हुए एक निश्चित रिटर्न का भरोसा देती है। सरकार और कर्मचारी दोनों के स्तर पर तय किए गए अनुपात के आधार पर यह पूरा फंड संचालित होगा, जिससे रिटायरमेंट के बाद आर्थिक तंगी का सामना नहीं करना पड़ेगा।
योजना बदलने के लिए मिलता है सिर्फ एक बार 'यू-टर्न' का मौका
इस पूरे फ्रेमवर्क में सबसे अनोखा और ध्यान खींचने वाला नियम स्कीम में बदलाव यानी स्विच करने को लेकर है। यदि कोई रेलकर्मी एनपीएस यानी नेशनल पेंशन सिस्टम से निकलकर यूपीएस यानी यूनिफाइड पेंशन स्कीम का दामन थामता है, तो उसे अपनी पूरी कामकाजी जिंदगी के दौरान दोबारा एनपीएस में लौटने का सिर्फ एक ही मौका मिलेगा।
लेकिन इस यू-टर्न या वापसी के लिए अधिकारियों ने एक बेहद सख्त समय सीमा तय कर दी है। कर्मचारी को अपनी रिटायरमेंट की उम्र पूरी होने से कम से कम 12 महीने पहले या फिर अपनी मर्जी से वीआरएस लेने की तय तारीख से 3 महीने पहले ही यह बड़ा फैसला लेना होगा। इस निर्धारित समय सीमा के गुजर जाने के बाद किसी भी स्थिति में विकल्प बदलने की अनुमति नहीं दी जाएगी।
कर्मचारी की असामयिक मृत्यु पर परिवार को मिलने वाली वित्तीय सुरक्षा
यदि दुर्भाग्यवश किसी सेवारत कर्मचारी की असमयिक मृत्यु हो जाती है, तो उसके परिवार को गहरे वित्तीय संकट से बचाने के लिए बहुत पुख्ता और संवेदनशील इंतजाम किए गए हैं। मंजूर किए गए नए नियमों के मुताबिक, मृत कर्मचारी के पात्र जीवनसाथी को हर महीने 60 फीसदी फैमिली पेंशन दी जाएगी। इसके साथ ही इस पारिवारिक पेंशन पर महंगाई राहत का लाभ भी मिलेगा।
"कर्मचारियों के कल्याण को सर्वोपरि रखते हुए रेलवे बोर्ड ने पेंशन नियमों में स्पष्टता लाई है, ताकि हर सेवारत परिवार को भविष्य में किसी प्रकार की अनिश्चितता का सामना न करना पड़े।"— वरिष्ठ रेल मंत्रालय अधिकारी
पैसों के अंतिम निपटारे के नियम के तहत, सरकार की तरफ से किया गया योगदान और उस पर मिलने वाला पूरा रिटर्न सरकारी खाते में चला जाएगा। हालांकि, कर्मचारी के अपने खुद के 10 प्रतिशत योगदान से बची हुई पूरी रकम उसके कानूनी जीवनसाथी को एकमुश्त यानी लंप-सम तौर पर सौंप दी जाएगी।




