नई दिल्ली से ग्राउंड रिपोर्ट — भारत और भूटान के बीच कूटनीतिक रिश्ते हमेशा से बेहद मजबूत और भरोसेमंद रहे हैं। इसी कड़ी में भूटान के प्रधानमंत्री की ओर से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लेकर एक बड़ा बयान सामने आया है। वैश्विक राजनीति में भारतीय नेतृत्व के बढ़ते प्रभाव और पड़ोसी देशों के साथ मजबूत होते रिश्तों के बीच यह बयान काफी अहम माना जा रहा है। दोनों देशों के शीर्ष नेताओं के बीच आपसी समझ और सहयोग ने द्विपक्षीय साझेदारी को एक नई ऊंचाइयों पर पहुंचाया है।
कूटनीतिक गलियारों में इस बात की चर्चा जोरों पर है कि कैसे भारत अपने पड़ोसी देशों के साथ अपने संबंधों को प्राथमिकता देता है। भूटान के प्रधानमंत्री ने भारत के साथ दोस्ती को लेकर कई सकारात्मक बातें कहीं हैं, जो दोनों देशों की जनता के बीच आपसी विश्वास को और ज्यादा पुख्ता करती हैं। भारत ने हमेशा से भूटान के आर्थिक और बुनियादी ढांचे के विकास में खुलकर मदद की है, जिसे वहां की सरकार और जनता ने हमेशा सराहा है।
वैश्विक मंच पर बढ़ रहा है भारत का कूटनीतिक दायरा
केवल भूटान ही नहीं, बल्कि दुनिया के कई अन्य बड़े देशों के नेता भी भारतीय प्रधानमंत्री की कार्यशैली और नीतियों की तारीफ कर चुके हैं। अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी हाल ही में पीएम मोदी की जमकर तारीफ की है। उन्होंने भारतीय प्रधानमंत्री को एक बेहतरीन व्यक्ति बताते हुए कहा है कि वे देश के लिए बहुत शानदार काम कर रहे हैं। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत के इस बढ़ते रसूख से देश की छवि एक मजबूत और आत्मनिर्भर राष्ट्र के रूप में उभर रही है।
दूसरी ओर, भारत के पड़ोसी इलाकों में कूटनीतिक मोर्चे पर उथल-पुथल भी देखने को मिल रही है। श्रीलंका और ईरान से जुड़े मामलों में अमेरिका की कड़ी चेतावनियों के बीच दक्षिण एशिया की राजनीति में तनाव का माहौल बना हुआ है। ऐसे में भारत की यह कोशिश हमेशा से रही है कि वह अपने पड़ोस में शांति और स्थिरता बनाए रखे, ताकि क्षेत्रीय विकास बाधित न हो और सभी देश मिलकर आगे बढ़ सकें।
घरेलू मोर्चे और कूटनीति के बीच संतुलन
एक तरफ जहां अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत के कूटनीतिक संबंध मजबूत हो रहे हैं, वहीं घरेलू स्तर पर भी कई मुद्दों पर तीखी राजनीतिक बयानबाजी जारी है। दिल्ली में बुनियादी विकास और परियोजनाओं को लेकर स्थानीय राजनीति गरमाई हुई है। बारापुला फेज-3 प्रोजेक्ट पर लग रहे लंबे ट्रैफिक जाम को लेकर राजनीतिक दलों के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर चल रहा है। पूर्व और वर्तमान नेताओं के बीच इस बात को लेकर बहस छिड़ी हुई है कि इस समस्या का स्थायी समाधान कैसे निकाला जाए।
द फ्रीलान्स की जमीनी पड़ताल यह बताती है कि एक तरफ जहां भारत कूटनीति के मोर्चे पर वैश्विक स्तर पर नए आयाम छू रहा है, वहीं दूसरी ओर आम नागरिकों की रोजमर्रा की समस्याएं भी स्थानीय राजनीति का मुख्य केंद्र बनी हुई हैं। अंतरराष्ट्रीय संबंधों की चमक के बीच जमीनी स्तर पर प्रशासनिक कसावट लाना सरकार के लिए एक बड़ी चुनौती बना हुआ है, जिस पर हर नागरिक की पैनी नजर है।
पड़ोसी देशों के साथ कूटनीतिक भविष्य की रूपरेखा
भूटान के साथ मजबूत होते संबंध इस बात का प्रमाण हैं कि भारत की 'नेबरहुड फर्स्ट' नीति जमीन पर असर दिखा रही है। आर्थिक सहयोग, ऊर्जा साझेदारी और सुरक्षा के मुद्दों पर दोनों देश मिलकर काम कर रहे हैं। आने वाले दिनों में इन रिश्तों के और अधिक प्रगाढ़ होने की पूरी उम्मीद है, जिससे पूरे दक्षिण एशियाई क्षेत्र में स्थिरता और शांति को बढ़ावा मिलेगा।


