नई दिल्ली/ग्राउंड ब्यूरो — देश की राजनीति में एक बार फिर से जुबानी जंग बहुत तेज हो गई है। कांग्रेस नेता राहुल गांधी के बयानों और तीखे हमलों के बाद सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी पूरी तरह सतर्क मोड में आ गई है। पार्टी ने विपक्षी दल के हर एक आरोप का सधा हुआ और करारा जवाब देने की पूरी रणनीति तैयार कर ली है। इसी कड़ी में पिछले बारह घंटों के भीतर राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली से लेकर कई जगहों पर पार्टी के वरिष्ठ नेताओं ने मोर्चा संभाल लिया है। इस दौरान ताबड़तोड़ प्रेस कॉन्फ्रेंस का दौर चला और सरकार के बड़े मंत्रियों ने मीडिया के सामने आकर स्थिति स्पष्ट की।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि आने वाले दिनों के सियासी समीकरणों को देखते हुए बीजेपी अब किसी भी आरोप को बिना जवाब दिए नहीं छोड़ना चाहती है। पिछले बारह घंटों के इस छोटे से समय अंतराल में चार अलग-अलग प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित की गईं। इन बैठकों में पार्टी के प्रमुख प्रवक्ताओं और नेताओं ने राहुल गांधी के बयानों को आधारहीन बताया और आंकड़ों के जरिए उन पर जनता को भ्रमित करने का गंभीर आरोप लगाया। मंत्रियों ने यह भी कहा कि विपक्ष के पास कोई ठोस मुद्दा नहीं बचा है इसलिए वे केवल बयानबाजी की राजनीति कर रहे हैं।
चुनाव आयोग की प्रतिक्रिया और एसआईआर विवाद
इस बीच राजनीति के साथ-साथ प्रशासनिक मोर्चे पर भी बड़े घटनाक्रम तेजी से सामने आ रहे हैं। चुनाव आयोग ने भी विपक्ष के उन तमाम आरोपों पर अपना आधिकारिक जवाब दे दिया है जिनमें वोटर लिस्ट से भारी संख्या में नाम काटने की बात कही जा रही थी। विपक्षी दलों ने एसआईआर प्रक्रिया के दौरान तेरह करोड़ वोट काटने का गंभीर आरोप लगाया था। चुनाव आयोग की तरफ से आए स्पष्टीकरण के बाद अब इस पूरे मामले पर नई बहस शुरू हो गई है। आयोग का कहना है कि पूरी प्रक्रिया पारदर्शी तरीके से नियमों के तहत ही पूरी की जा रही है।
दूसरी तरफ मतदाता सूची में नाम जुड़वाने की प्रक्रिया को और अधिक आसान बनाने के लिए नियमों में जरूरी बदलाव भी किए गए हैं। नए नियमों के अनुसार अब मतदाता बनने के लिए फॉर्म संख्या छह के साथ अलग से कोई घोषणा पत्र देने की अनिवार्यता पूरी तरह खत्म कर दी गई है। इससे आम नागरिकों को नए वोट के लिए आवेदन करने में बहुत बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है। चुनाव आयोग के इस कदम को प्रशासनिक सुधार की दिशा में एक अहम फैसला माना जा रहा है ताकि युवा और नए मतदाता बिना किसी कागजी परेशानी के अपनी सूची में नाम दर्ज करवा सकें।
सड़कों पर विरोध प्रदर्शन और राजनीतिक सरगर्मी
राजधानी दिल्ली और देश के दूसरे हिस्सों में राजनीतिक दलों के बीच वाकयुद्ध के साथ-साथ जमीनी स्तर पर भी प्रदर्शनों का दौर जारी है। हाल ही में विभिन्न मुद्दों को लेकर वामपंथी छात्र संगठनों और युवाओं ने सड़कों पर उतरकर अपना कड़ा विरोध दर्ज कराया है। विरोध प्रदर्शन के दौरान पुतले दहन किए गए और प्रशासन तथा सत्तापक्ष के खिलाफ जमकर नारेबाजी भी की गई। सुरक्षा बलों ने कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए इन प्रदर्शनों के दौरान पूरी मुस्तैदी दिखाई और स्थिति को नियंत्रण में रखा।
राजनीतिक गलियारों में इन दिनों ज्योतिषीय और सामाजिक चर्चाएं भी खूब चल रही हैं। आने वाले महीनों और वर्षों के लिए विभिन्न राशियों पर ग्रहों की चाल के प्रभावों का आकलन भी सार्वजनिक चर्चा का हिस्सा बन रहा है। लोग अपनी व्यक्तिगत और सामाजिक जिंदगी से जुड़ी भविष्यवाणियों को लेकर भी खासे उत्सुक नजर आ रहे हैं। हालांकि मुख्यधारा की राजनीति में इस समय केवल और केवल सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच चल रही तनातनी का ही सबसे ज्यादा असर दिखाई दे रहा है।
द फ्रीलान्स की ग्राउंड पड़ताल और आगे की राजनीतिक चाल
द फ्रीलान्स की जमीनी पड़ताल बताती है कि आने वाले समय में चुनावी राज्यों और राष्ट्रीय स्तर पर राजनीतिक टकराव और ज्यादा तीखा होने वाला है। बीजेपी की तरफ से इतनी कम समय में मंत्रियों और बड़े नेताओं को मैदान में उतारना यह साफ इशारा करता है कि पार्टी किसी भी मोर्चे पर विपक्ष को बढ़त नहीं देना चाहती है। राहुल गांधी की तरफ से उठाए जा रहे हर एक सवाल का दस्तावेजी और राजनीतिक दोनों स्तरों पर जवाब तैयार किया जा रहा है।
आम जनता के बीच भी इस सियासी घमासान को लेकर मिली-जुली प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है। एक तरफ जहां सियासी दल अपने-अपने पाले को मजबूत करने में जुटे हैं, वहीं आम नागरिक अपनी रोजमर्रा की जरूरतों और प्रशासनिक बदलावों पर ज्यादा ध्यान दे रहे हैं। चुनाव आयोग के नए नियमों और राजनीतिक दलों की इन बैठकों के बीच यह साफ है कि देश का राजनीतिक पारा आने वाले दिनों में और अधिक चढ़ने वाला है।


