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यूपी की सियासत में नया भूचाल: बृजभूषण शरण सिंह के बयान पर अखिलेश यादव का बड़ा पलटवार, कहा- हमारे रिश्ते बहुत अच्छे हैं

उत्तर प्रदेश की राजनीति में इन दिनों बयानों का दौर काफी तेज हो गया है। एक तरफ भाजपा नेता बृजभूषण शरण सिंह ने सपा प्रमुख अखिलेश यादव की तारीफ करते हुए कहा कि उनके बिना सब सूना है, तो वहीं दूसरी तरफ अखिलेश यादव ने भी मुस्कुराते हुए इस पर बड़ा बयान दिया है।
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नेशनल डेस्क, द फ्रीलांस
राष्ट्रीय संपादकीय ब्यूरो•30 सितंबर 2026 • अपडेटेड•33
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यूपी की सियासत में नया भूचाल: बृजभूषण शरण सिंह के बयान पर अखिलेश यादव का बड़ा पलटवार, कहा- हमारे रिश्ते बहुत अच्छे हैं
📷 यूपी की सियासत में नया भूचाल: बृजभूषण शरण सिंह के बयान पर अखिलेश यादव का बड़ा पलटवार, कहा- हमारे रिश्ते बहुत अच्छे हैं — मुख्य घटनाक्रमफोटो साभार: रॉयटर्स / एजेंसीज़ / सोशल मीडिया

खबर की बड़ी बातें (Key Highlights)

  • भाजपा नेता बृजभूषण शरण सिंह ने एक बयान में कहा कि उत्तर प्रदेश में अखिलेश यादव के बिना सब कुछ सूना है।
  • सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने लखनऊ में प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान बृजभूषण शरण सिंह के साथ अपने संबंधों को बहुत अच्छा बताया।
  • सपा नेता अरविंद सिंह गोप ने कांग्रेस नेताओं को नसीहत देते हुए कहा कि बयानबाजी से बचने और आपसी तालमेल बनाए रखने की जरूरत है।

उत्तर प्रदेश की राजनीति में अचानक गरमाया सियासी पारा

उत्तर प्रदेश के राजनीतिक गलियारों में इन दिनों बयानों के तीर और रिश्तों की नई परिभाषाएं चर्चा का विषय बनी हुई हैं। एक तरफ जहां आगामी चुनावों और सीटों के बंटवारे को लेकर विपक्षी दलों के भीतर आंतरिक खींचतान देखने को मिल रही है, वहीं दूसरी तरफ सत्ता पक्ष और विपक्ष के कुछ नेताओं के बीच बयानों के जरिए एक अलग ही सियासी समीकरण बनता हुआ नजर आ रहा है। राजनीतिक विश्लेषक इस बात पर लगातार नजर बनाए हुए हैं कि आखिर पर्दे के पीछे क्या पक रहा है।

इस पूरे घटनाक्रम की शुरुआत तब हुई जब हाल ही में भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता और पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह का एक बयान सामने आया। उनके इस बयान ने राजनीतिक हलकों में खलबली मचा दी, क्योंकि अमूमन विरोधी दलों के नेताओं के बीच इस तरह की बातें कम ही सुनने को मिलती हैं। इस बयान के बाद से ही उत्तर प्रदेश के राजनीतिक तापमान में अचानक तेजी आ गई और तरह-तरह के कयास लगाए जाने लगे।

बृजभूषण शरण सिंह का बड़ा बयान: 'अखिलेश के बिना सब सूना'

दिल्ली में मीडियाकर्मियों से बातचीत के दौरान जब बृजभूषण शरण सिंह से कांग्रेस पार्टी की ओर से 150 सीटों की मांग और सपा के साथ गठबंधन के पेंच पर सवाल पूछा गया, तो उन्होंने बहुत ही बेबाकी से अपनी बात रखी। उन्होंने मुस्कुराते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव के बिना सब कुछ सूना है। उनके इस बयान को राजनीतिक जानकारों ने बहुत गौर से देखा, क्योंकि इसे विपक्षी खेमे की अंदरूनी कलह और सीट शेयरिंग के फार्मूले से जोड़कर देखा जा रहा था।

बृजभूषण सिंह के इस बयान के बाद सोशल मीडिया पर वीडियो तेजी से वायरल हो गया। राजनीतिक पंडितों का मानना है कि ऐसे बयान अक्सर बड़े सियासी संदेश देने का काम करते हैं। जब किसी विरोधी दल के कद्दावर नेता की ओर से इस तरह की बात कही जाती है, तो पार्टी के भीतर और बाहर दोनों जगहों पर इसका अलग ही असर देखने को मिलता है। यही वजह रही कि इस बयान पर तुरंत प्रतिक्रिया की उम्मीद की जा रही थी।

अखिलेश यादव का पलटवार और रिश्तों की नई चर्चा

बृजभूषण शरण सिंह के इस बयान के कुछ ही घंटों बाद लखनऊ स्थित समाजवादी पार्टी के मुख्यालय में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान जब पत्रकारों ने सपा प्रमुख अखिलेश यादव से इस पर सवाल पूछा, तो उन्होंने बहुत ही सधा हुआ और दिलचस्प जवाब दिया। अखिलेश यादव ने कहा कि बृजभूषण सिंह से उनके संबंध बहुत अच्छे हैं। उन्होंने यह भी जोड़ा कि उत्तर प्रदेश के विकास और किसानों की खुशहाली के रास्ते पर लाने के लिए कई बार वैचारिक दूरियों के बावजूद आपसी रिश्ते मायने रखते हैं।

सपा मुखिया ने मजाकिया अंदाज में यह तक कह दिया कि अब बृजभूषण जी को तय करना होगा कि वे लाल और हरा गमछा कब डालते हैं। उनके इस बयान ने राजनीतिक गलियारों में एक नया भूचाल ला दिया है। विश्लेषकों का मानना है कि अखिलेश यादव ने इस बयान के जरिए एक तीर से कई निशाने साधे हैं। एक तरफ जहां उन्होंने व्यक्तिगत संबंधों की बात स्वीकार की, वहीं दूसरी तरफ राजनीतिक रूप से माहौल को अपने पक्ष में मोड़ने की कोशिश भी की।

"हमारे संबंध उनसे बहुत अच्छे हैं। उत्तर प्रदेश के विकास और किसान को खुशहाली के रास्ते पर लाने के लिए हम सब एक हैं। अब उन्हें तय करना होगा कि हरा और लाल गमछा डाल लें।" — अखिलेश यादव, राष्ट्रीय अध्यक्ष, समाजवादी पार्टी

सपा और कांग्रेस के बीच सीट बंटवारे पर बढ़ता तनाव

दूसरी तरफ, समाजवादी पार्टी और कांग्रेस के बीच सीटों के बंटवारे को लेकर स्थिति अभी भी पूरी तरह साफ नहीं हो पाई है। कांग्रेस पार्टी की ओर से लगातार अधिक सीटों पर लड़ने की मांग की जा रही है, जिससे दोनों दलों के बीच अंदरूनी खींचतान बढ़ गई है। आम आदमी पार्टी के नेता संजय सिंह ने भी इस पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि कांग्रेस को बार-बार अपने बयान बदलने से बचना चाहिए, क्योंकि इससे ऐसा संदेश जाता है कि वे बीजेपी से नहीं बल्कि अपने ही सहयोगियों से लड़ रहे हैं।

सपा के राष्ट्रीय सचिव अरविंद सिंह गोप ने भी बाराबंकी में एक बयान देते हुए कांग्रेस नेताओं को नसीहत दी। उन्होंने कहा कि बयानबाजी से बचने की जरूरत है और राहुल गांधी तथा अखिलेश यादव पहले ही गठबंधन के मामलों पर फैसला ले चुके हैं। ऐसे में बार-बार अनावश्यक बयान देने से विपक्षी एकता को नुकसान पहुंचता है और इसका सीधा फायदा भारतीय जनता पार्टी को मिलता है।

राजनीतिक गलियारों में चर्चाओं का बाजार गर्म

इन तमाम घटनाओं के बाद यह साफ हो गया है कि उत्तर प्रदेश की राजनीति में आने वाले दिनों में और भी ज्यादा उथल-पुथल देखने को मिल सकती है। एक तरफ जहां राज्यसभा चुनाव और आगामी विधानसभा उपचुनावों की तैयारियां जोरों पर हैं, वहीं दूसरी तरफ दलों के बीच बयानों के जरिए सियासी जमीन तलाशने का सिलसिला भी जारी है। भाजपा का आलाकमान भी राज्य की इन तमाम गतिविधियों पर अपनी पैनी नजर बनाए हुए है।

विशेषज्ञों का मानना है कि उत्तर प्रदेश का राजनीतिक समीकरण हमेशा से ही जटिल रहा है और यहां जातिगत तथा क्षेत्रीय समीकरणों के आधार पर ही फैसले होते हैं। बृजभूषण शरण सिंह और अखिलेश यादव के बीच बयानों के इस आदान-प्रदान के बाद राज्य की राजनीति में किस प्रकार के नए समीकरण जन्म लेते हैं, यह तो आने वाला वक्त ही बताएगा, लेकिन फिलहाल आम जनता से लेकर राजनीतिक दलों के कार्यकर्ता तक इस नई सियासी पटकथा पर गहरी नजर गड़ाए बैठे हैं।

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